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PNB: एसोचैम ने बताया खतरे की घंटी, सरकारी बैंकों के निजीकरण पर जोर

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amanBy aman

Published on 18 Feb 2018 7:19 AM GMT

PNB: एसोचैम ने बताया खतरे की घंटी, सरकारी बैंकों के निजीकरण पर जोर
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PNB घोटाला: CCI की मांग- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हो निजीकरण
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नई दिल्ली: उद्योग मंडल एसोचैम ने हीरा व्यापारी नीरव मोदी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 11,300 करोड़ रुपए के घोटाले का हवाला देते हुए रविवार (18 फरवरी) को कहा, कि 'सरकार को सरकारी बैंकों में अपनी अधिकतम हिस्सेदारी बेच देनी चाहिए ताकि ये बैंक निजी तौर पर काम कर सकें।'

गौरतलब है, कि पीएनबी ने इस सप्ताह खुलासा किया था कि बैंक की मुंबई की एक शाखा में 1,77.169 करोड़ डॉलर की धोखाधड़ी हुई है। यह राशि बैंक की शुद्ध आय का लगभग 1,320 करोड़ रुपए के आठ गुना के बराबर है।

यह घोटाला सरकार के लिए खतरे की घंटी

एसोचैम ने जारी बयान में कहा, 'पीएनबी का 11,300 करोड़ रुपए का घोटाला सरकार के लिए खतरे की घंटी है। वह बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से कम कर दें ताकि ये बैंक निजी बैंकों की तरह काम कर सकें। इस स्थिति में अपने हितधारकों और ग्राहकों के हितों की रक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी बैंकों की होगी।'

एक के बाद एक सरकारी बैंक संकट से गुजर रहे

बयान में कहा गया है कि 'सरकारी बैंक एक के बाद एक संकट से गुजर रहे हैं। सरकार द्वारा करदाताओं के पैसे से इन्हें राहत पैकेज देने की भी एक सीमा है।' उद्योग मंडल ने कहा, कि सरकारी बैंकों का वरिष्ठ प्रबंधन अपना अधिकतर समय नौकरशाहों के निर्देशों का पालन करने में लगा देता है।' उन्होंने कहा, 'इस प्रक्रिया में सभी जोखिमों को कम करने और प्रबंधन सहित सभी मुख्य बैंकिंग कामकाज बैंकों की प्राथमिकता से हट गए हैं। यह समस्या और गंभीर हो गई है क्योंकि बैंक नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो वरदान या अभिशाप कुछ भी सिद्ध हो सकते हैं।'

सीबीआई ने 10 अन्य नाम नामित किए

इस संबंध में मुंबई में सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को तीन आरोपियों की तीन मार्च तक पुलिस हिरासत की मांग की है। इन तीन आरोपियों में पीएनबी के सेवानिवृत्त उपप्रबंधक गोकुलनाथ शेट्टी, सिंगल विंडो ऑपरेटर मनोज खराट और मुख्य आरोपी नीरव मोदी की कंपनियों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस घोटाले में 10 अन्य निदेशकों और अधिकारियों को नामित किया है।

ये भी कहा

एसोचैम का कहना है, कि 'सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम होने पर वरिष्ठ प्रबंधन को जवाबदेही और जिम्मेदारी के साथ अधिक स्वायतत्ता भी मिल जाएगी।'

एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत ने जारी बयान में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पूरे वित्तीय क्षेत्र में कारोबार में पारदर्शिता बहाल करने के तरीकों में शामिल होने का आग्रह किया है फिर चाहे वह निजी बैंक हो या सरकारी बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां। इस संदर्भ में मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों में निजी भागीदारी को और बढ़ाने की वकालत की।

आईएएनएस

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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