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Presidential Election 2022: भाजपा का मास्टरस्ट्रोक, एक तीर से तीन निशाने

Presidential Election 2022: भाजपा ने एक आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित करके इतिहास रच दिया।

Neel Mani Lal
Updated on: 22 Jun 2022 4:07 AM GMT
Presidential Election 2022
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द्रौपदी मुर्मू (photo: social media )

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Presidential Election 2022: आदिवासी बेल्ट में लाभ, ओडिशा और झारखंड में मजबूत उपस्थिति और महिला मतदाताओं को लुभाना। द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को प्रेसिडेंट प्रत्याशी बना कर भाजपा ने तीन तीन निशाने साधे हैं। ये है भाजपा का मास्टरस्ट्रोक (BJP masterstroke) ।

भाजपा ने एक आदिवासी महिला (tribal woman) द्रौपदी मुर्मू को एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित करके इतिहास रच दिया। किसी आदिवासी को देश में पहली बार राष्ट्रपति प्रत्याशी बनाया गया है।

1.मुर्मू की घोषणा करके भाजपा ने महिला मतदाताओं को जीतने का मास्टरस्ट्रोक खेला है। महिला आबादी पहले से ही पार्टी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के फोकस पर है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उज्ज्वला, स्वच्छ भारत और गरीबों को मुफ्त राशन जैसी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कारण महिला मतदाता भाजपा के लिए एक वफादार वोट बैंक के रूप में उभरी हैं।

2.एक आदिवासी नेता का राष्ट्रपति के लिए चयन देश की एससी / एसटी आबादी के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश है। इसका फायदा गुजरात और हिमाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में होगा क्योंकि दोनों राज्यों में इस समुदाय का निर्णायक हिस्सा है। ओडीशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों और पूर्वोत्तर में आदिवासी समुदाय का बोलबाला है ही।

3.पार्टी ओडिशा और झारखंड में पैर जमाने की कोशिश कर रही है और मुर्मू के नाम की घोषणा को इस दिशा में भाजपा के फायदेमंद साबित होगी। मुर्मू ओडिशा की रहने वाले हैं और झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं। भाजपा मुर्मू को राज्य का पहला राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बताकर उड़िया मतदाताओं को भी खुश कर रही है। इससे राष्ट्रपति चुनावों में बीजद का समर्थन भी सुनिश्चित होता है और यह भविष्य में ओडिशा में भाजपा को पैर जमाने का मौका देता है।

प्रतीकात्मक और राजनीतिक रूप से बेहतर

मुर्मू को चुनकर भाजपा ने विपक्ष को दिखाया है कि उनका उम्मीदवार विपक्ष की पसंद (यशवंत सिन्हा) की तुलना में प्रतीकात्मक और राजनीतिक रूप से बेहतर है।

पार्टी का फोकस आदिवासियों पर भी चला गया है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस साल मई में भाजपा मुख्यालय में आदिवासी दलों की बड़ी बैठक की मेजबानी की थी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के दलों को आमंत्रित किया गया था। लोकसभा में 47 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं सो अगले आम चुनाव के नजरिये से भी भाजपा के लिए ये केजीएम फायदा दे सकता है।

Monika

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