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IOC को पीछे छोड़ राजस्व मामले में सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बनी रिलायंस इंडस्ट्रीज

31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2018-19 में रिलायंस ने 6.23लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया। दोनों कंपनियों द्वारा विनियामक फाइलिंग के अनुसार, आईओसी ने वित्त वर्ष में 6.17लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह वित्त वर्ष 2019 में आईओसी के शुद्ध लाभ से दोगुने से अधिक के शुद्ध लाभ के साथ देश की सबसे अधिक लाभदायक कंपनी भी बनी है।

SK Gautam
Updated on: 21 May 2019 2:28 PM GMT
IOC को पीछे छोड़ राजस्व मामले में सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बनी रिलायंस इंडस्ट्रीज
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नई दिल्ली: सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी की दूरसंचार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने राज्य के स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) को राजस्व के मामले में पीछे छोड़ते हुए देश की सबसे बड़ी कंपनी होने का गौरव हासिल किया है।

31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2018-19 में रिलायंस ने 6.23 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया

31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2018-19 में रिलायंस ने 6.23लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया। दोनों कंपनियों द्वारा विनियामक फाइलिंग के अनुसार, आईओसी ने वित्त वर्ष में 6.17लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह वित्त वर्ष 2019 में आईओसी के शुद्ध लाभ से दोगुने से अधिक के शुद्ध लाभ के साथ देश की सबसे अधिक लाभदायक कंपनी भी बनी है।

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रिलायंस, जो लगभग एक दशक पहले तक आईओसी से आकार में आधी ही थी, लेकिन उपभोक्ता आधार और दूरसंचार जैसे नए व्यवसायों में प्रवेश के साथ कंपनी ने दूरसंचार, खुदरा और डिजिटल सेवाओं में व्यापक रूप से विस्तार किया और बीते वित्त वर्ष 19 में कंपनी ने 39,580 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। दूसरी ओर, आईओसी ने वित्त वर्ष 19 में 17.274 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ के साथ वर्ष का अंत किया।

पिछले साल तक आईओसी सबसे अधिक लाभदायक पीएसयू थी लेकिन 2018-19 में तेल और प्राकृतिक गैस कॉर्प (ओएनजीसी) के मुकाबले ये रैंक भी खो सकती है। ओएनजीसी को अभी तक अपनी वित्त वर्ष 19 की आय की घोषणा करनी है लेकिन उसने वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 22,671 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।

22,189.45 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

आईओसी का शुद्ध लाभ, जो अपने राजस्व के लिए तेल शोधन, पेट्रोकेमिकल्स और गैस व्यवसाय पर निर्भर करता है, ने वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में 23.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,189.45 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है।

दूसरी ओर, रिलायंस ने 2017-18 में दर्ज किए गए 34,988 करोड़ रुपये के मुनाफे में 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है।

ओएनजीसी को 2017-18 के वित्तीय वर्ष में 19,945.26 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो आईओसी से कम रहा था।

तीनों मापदंडों में अव्वल

इस बड़ी सफलता के साथ, रिलायंस ने सभी तीन मापदंडों - राजस्व, लाभ, और बाजार पूंजीकरण के मामले में प्रमुखता हासिल की है।

मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और मजबूत खुदरा कारोबार के साथ, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 19 में राजस्व में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और वित्त वर्ष 10 और वित्त वर्ष 19 के बीच 14 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वार्षिक वृद्धि दर पोस्ट की। इसके विपरीत, आईओसी का कारोबार वित्त वर्ष 19 में 20 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2010 और वित्त वर्ष 19 के दौरान 6.3प्रतिशत बढ़ा है।

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मंगलवार के ट्रेडिंग मूल्य 1,345 रुपये के आधार पर, रिलायंस का बाजार पूंजीकरण 8.52 लाख करोड़ रुपये था।

सबसे अधिक नकदी भंडार

दिलचस्प बात यह है कि रिलायंस ऑन द बुक सबसे अधिक 1.33लाख करोड़ रुपये का नकदी भंडार रखता है, उस पर भी मार्च 2019 के अंत में सबसे अधिक 2.87 लाख करोड़ रुपये का सकल ऋण है।

इसके विपरीत, आईओसी पर पास 92,700 करोड़ रुपये से अधिक के लघु और दीर्घकालिक ऋण हैं।

SK Gautam

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