शाहिन बाग के प्रदर्शनकारियों को लगा झटका, आई ऐसी चौंकाने वाली खबर

शाहीन में प्रदर्शनकारियों को लेकर अब तरह-तरह की खबरें आ रही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रतिनिधियों को भी वार्ता के लिए दो दिन लगातार भेजा था। जिसको…

Published by Deepak Raj Published: February 21, 2020 | 5:46 pm
Modified: February 21, 2020 | 8:30 pm

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नई दिल्ली। शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों को लेकर अब तरह-तरह की खबरें आ रही है। वहीं दुसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रतिनिधियों को भी वार्ता के लिए दो दिन लगातार भेजा था। आज वार्ता का तीसरा दिन है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला पाया है।

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आप को बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए वकील संजय हेगड़े एवं साधना रामाचंद्रन को नियुक्त किया है। ये दोनों लोगों ने शाहिन बाग में लगातार दो दिन जाकर प्रदर्शनकारियों से बात की थी। और लोगों की समस्या को सुना एवं जाना।

प्रदर्शनकारियों में नेतृत्व  को लेकर मतभेद

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शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन को दो महीने से अधिक समय हो चुका है, वहीं प्रदर्शनकारियों की तरफ से लगातार मांग की जा रही है कि इस कानून को वापस लिया जाए, लेकिन इस कानून के विरोध में एकजुट हुए प्रदर्शनकारियों में नेतृत्व और अगुवाई करने वाला कोई नहीं है, जिसे लेकर उनके बीच मतभेद भी है।

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शाहीनबाग में आए दिन लोग आपस में इस बात को लेकर झगड़ रहे हैं कि किससे पूछ कर तुम ने यह कदम उठाया। जैसे-जैसे दिन बढते जा रहे हैं और प्रदर्शन खींचता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों में दूरियां भी बढ़ती जा रही है।

मीडिया में आई तनातनी वाली खबर

शाहीन बाग में स्थिति फिलहाल यह है कि कोई भी कभी भी मंच पर आकर कोई ऐलान कर देता है और फिर बाद में कोई और मंच पर आकर उसी ऐलान को खारिज कर देता है। वहीं मीडिया के सामने कौन रहेगा, इसको लेकर भी तनातनी देखी जाती है।


अगर कोई शख्स मीडिया के सामने आकर कुछ बोलता है तो दूसरा शख्स उसी बात को मीडिया के सामने ही नकार देता है, जिससे कोई सूचना तो स्पष्ट होने की बात दूर है, लोग भ्रमित अलग ही हो रहे हैं।

दादियों के नाम पर हो रहा ‘खेल’

शाहीन बाग में दादियों के नाम पर सबसे अधिक राजनीति देखी जा सकती है। कुछ बुजुर्ग महिलाएं इस प्रदर्शन का चेहरा बनी हुई हैं जो कि दंबग दादी के नाम से मशहूर हैं। स्थिति यह है कि जब कोई बात नहीं सुनता या किसी को अपनी बात रखनी होती है तो वो बस दादी के मुंह से उस बात को सबके सामने कहलवा देता है, जिससे उसकी बात बड़ी हो जाती है। वहीं दूसरा शख्स दादी से उसी बात को बाद में खारिज करवा देता है।

बन रहे हैं अलग-अलग गुट

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शाहीन बाग में एक से अधिक गुट बनते नजर आ रहे हैं और उस गुट की कोई न कोई अगुवाई भी करता है। सबसे मजेदार बात तो यह है कि हर गुट के लोग संचालक बने हुए हैं, जिससे कुछ भी तय नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उनके बीच अनबन होती है और फैसला लेने में परेशानी आती है, लेकिन इस मतभेद के बावजूद भी सभी कानून को वापस लेने की बात कहते हैं और यह भी कहते हैं कि हम यहां से नहीं उठेंगे।