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पहल: एक मर चुकी नदी को जिंदा करने की कोशिश

raghvendra
Published on: 9 Feb 2018 7:18 AM GMT
पहल: एक मर चुकी नदी को जिंदा करने की कोशिश
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देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की ‘रिस्पना’ नदी को सदानीरा करने का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में नदी को पुर्नजीवित करने के प्रयासों के तहत ही हाल ही में जिलाधिकारी एस.ए मुरूगेषन ने संबंधित अधिकारियों के साथ रिस्पना नदी के मोसीफाल, शिखरफाल से मथोरावाला रोड डोईवाला तक स्थलीय निरीक्षण किया है। जिलाधिकारी शिखरफाल से काठबंगला तक नदी के बीचो-बीच पांच किमी तक पैदल चले ।

मसूरी की जड़ से निकली ऋषिपर्णा अपभ्रंश रिस्पना नदी एक समय दून घाटी की प्राण शक्ति हुआ करती थी। यह अपने दोनों किनारों पर हरियाली की चादर के साथ आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह लेकर चलती थी लेकिन आज रिस्पना (ऋषिपर्णा) नदी का उद्गम स्थल विलुप्त हो चुका है। उद्गम क्षेत्र के केलाघाट, काठ बंगला, सुमननगर चालंग क्षेत्र में ही रिस्पना नदी पर कब्जे हो चुके हैं।

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इतिहास

केलाघाट में ही अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए बैराज से रिस्पना नदी पहली बार नहर में डाली गई थी। अंग्रेजों से पहले रानी कर्णावती ने केलाघाट में ही बैराज बनवाया था। यह लगभग चार सौ साल पुराना है। वर्तमान में इस बैराज की लोहे की मोटी जंजीरें पुली से जुड़ी हुई हैं जो बैराज को खोलने और बंद करने के काम आती हैं। रिस्पना बैराज के ऊपर की ओर एक शिव मंदिर के पास एक बावड़ी भी है। रानी कर्णावती के पति का नाम कुंवर अजब सिंह था उन्होंने इस बैराज का निर्माण 17वीं शताब्दी में कराया था। रानी कर्णावती ने करनपुर मोहल्ला भी बसाया। राजपुर नहर बैराज के बाद बनी और इसकी देखरेख का काम पहले श्री गुरुराम राय गुरुद्वारा के जिम्मे था। बाद में 1841 के बाद अंग्रेजों ने नहर की देखरेख शुरू की।

क्या है स्थिति

  • रिस्पना का जलस्तर शिखर फाल के बाद कम होना शुरू हो जाता है और सुमन नगर तक आते आते यह नदी गायब हो जाती है। 1992 के बाद तो रिस्पना को पाटने का काम शुरू हो गया और इसे कूड़े कचरे का डंपिंग जोन बना दिया गया।
  • रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए नदी को 14 सेक्टरों में बांटा गया है। जिसमें पहला सेक्टर शिखरफाल से मकरेत गांव तक, दूसरा सेक्टर मकरेत गांव से तपोभूमि आश्रम तक, तीसरा सेक्टर तपोभूमि आश्रम से काठबंगला तक, चौथा सेक्टर काठबंगला से धोरण तक, पांचवा सेक्टर धोरण से बाला सुन्दरी तक, छठा सेक्टर बाला सुन्दरी से कंडोली तक, सातवां सेक्टर कंडोली से अधोईवाला नालापानी चैक तक, आठवां सेक्टर अधोईवाला नालापानी चैक से एम.डी.डी.ए कालोनी तक, नौवां सेक्टर एम.डी.डी.ए कालोनी से संजय कालोनी तक, दसवां सेक्टर संजय कालोनी से बलबीर रोड तक, ग्यारहवां सेक्टर बलबीर रोड से विधानसभा रिस्पना नदी तक, बारहवां सेक्टर विधानसभा रिस्पना पुल से दीपनगर लालपुल तक, तेरहवां सेक्टर दीपनगर लालपुल से केदारपुरम नारी निकेतन तक तथा चौदहवां सेक्टर केदारपुरम नारी निकेतन से डोईवाला तक बनाया गया है।
  • रिस्पना नदी के शिखरफाल से लेकर डोईवाला तक के भूमि का राजस्व विभाग के अधिकारियों से सत्यापन कराने को कहा जा चुका है। सत्यापन में यह देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में वन विभाग की भूमि है या वन क्षेत्र या ग्राम सभा की भूमि है या नगर निगम एम.डी.डी.ए की भूमि है। इसके अगले चरण में कार्रवाई की रूपरेखा बनेगी। नदी के किनारे जो भी अतिक्रमण हैं उन्हें हटाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। नदी में जो भी सीवरेज डाला जा रहा है इसके सम्बन्ध में भी पूरा विवरण तैयार करने को कहा गया है।
  • अधिषासी अभियन्ता सिंचाई का कहना है कि मोसीफाल के हेड पर इस समय 17 एमएलडी पानी बह रहा है, जिससे 14 एमएलडी पानी पेयजल के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है, शेष पानी रिस्पना में तथा अन्य स्त्रोत से भी बह रहा है तथा पीने का पानी इस फाल से वर्श 1985 से लिया जा रहा है।

और भी हैं नदियां

  • रिस्पना नदी को नया जीवन मिलेगा तो बिंदाल, सुसवा, सौंग, तमसा, टौंस, दुल्हनी, चंद्रभागा आदि नदियों को भी नया जीवन मिलेगा।
  • बिंदाल भी नाले में तब्दील हो चुकी है। बिंदाल छोटी नदी थी। नदी बूंदों से बनती थी। इसलिए नदी का नाम था बिंदाल। राजपुर कस्बे से छोटी जलधारा के रूप में निकलने वाली बिंदाल का भी हाल रिस्पना की तरह हो गया है। शहंशाही आश्रम के नीचे और ढाकपट्टी राजपुर के बाईँ ओऱ से बहने वाली बिंदाल नदी भूमाफिया के कब्जे में जकड़ चुकी है।
  • यही हाल सुसवा का है। यह आज इस कदर प्रदूषित है कि किसान उसका पानी खेत में नहीं डालते। यह पूरी नदी विषैली हो चुकी है, जिस नदी क्षेत्र में होने वाली घास भी स्वादिष्ट ‘साग’ हुआ करता थी, वहाँ होने वाली घास आज पशु भी नहीं खाते। नदी क्षेत्र में रहने वाले लोग गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। रिस्पना और बिंदाल के संगम से बनी यही सुसवा नदी आगे सौंग में मिलकर गंगा को भी प्रदूषित कर रही है।
  • देहरादून में मालदेवता के पास से निकलने वाली करीब 45 किलोमीटर लंबी सौंग नदी अब सूख चुकी है। यह नदी लालतप्पड़ के पास सुसुवा नदी को अपने साथ लेकर गौहरी में गंगा में मिलती है। कभी यह पानी से लबालब रहती थी फिर थोड़ा बहुत पानी रहने लगा अब यह सूख गई है।
  • स्कंद पुराण में तमसा नदी के तट पर आचार्य द्रोण को भगवान शिव द्वारा दर्शन देकर शस्त्र विद्या का ज्ञान कराने का उल्लेख मिलता है। यह भी कहा जाता है कि आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वात्थामा द्वारा दुग्धपान के आग्रह पर भगवान शिव ने तमसा तट पर स्थित गुफा में प्रकट हुए शिवलिंग पर दुग्ध गिराकर बालक की इच्छा पूरी की थी। यह स्थान गढ़ी छावनी क्षेत्र में स्थित टपकेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर बताया जाता है। टपकेश्वर में हाल ही में तमसा नदी पर सीएम ने सफाई की थी। यह नदी भी अपना रूप खो चुकी है। मान्यता है कि यह नदी शापित है। यमुना जी ने इसे श्राप दिया था कि इस नदी का पानी कही भी प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। आज यह नदी विलुप्त होने को है।

    क्या है प्रस्तावित कार्ययोजना

  • भौतिक सत्यापन में यह भी सामने आया है कि नदी के दायें एवं बायें किनारे की पहाडिय़ों का क्षरण हो रहा है इसके लिए केन्द्रीय भूमि एव जल संरक्षण संस्थान को भी साथ में लेने के लिए कहा गया है।
  • सिंचाई विभाग के अधिषासी अभियन्ता को कहा गया है कि पहले सेक्टर के मकरेत गांव से शिखरफाल तक दो तीन जगह चैकडाम बनवायें
  • सुन्दरता के लिए वन प्रभाग एवं इको-टास्कफोर्स वृक्षारोपण का कार्य भी यहां करें।
  • शिखर फाल से मकरेत गांव तक की स्वच्छता एवं साफ-सफाई नगर पालिका मसूरी करे, जिससे पर्यटक यहां आकर्षित हो सकें

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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