डॉन शहाबुद्दीन को जमानत मिलने के बाद सजा देने वाले जज का ट्रांसफर

Published by Published: September 21, 2016 | 11:28 am
Modified: September 21, 2016 | 2:26 pm
शहाबुद्दीन

पटना: तेजाब कांड के आरोपी आरजेडी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को जमानत मिलने के बाद उम्रकैद की सजा देने वाले जज का ट्रांसफर हो गया है। शहाबुद्दीन को 7 सितंबर को जमानत मिली और जज अजय कुमार श्रीवास्तव का 9 सितंबर को सीवान से पटना ट्रांसफर कर दिया गया है।

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हालांकि खबर है कि उन्होंने तबादले के लिए खुद अर्जी दी थी। एक तरफ जहां इसे रोटीन ट्रांसफर के रूप में देखा जा रहा है वहीं हवा यह भी उड़ रही है कि जज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे, इसलिए उन्‍होंने ट्रांसफर के लिए अर्जी दी थी।

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कौन है मोहम्मद शहाबुद्दीन
-शहाबुद्दीन बिहार में दहशत के दूसरे नाम से जाने जाते हैं।
-शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के प्रतापपुर में हुआ था।
-उन्होंने बिहार से अपनी एजूकेशन पूरी की। वह राजनीति से एमए और पीएचडी हैं।
-उन्होंने हिना शहाब से शादी की थी। उनका एक बेटा और दो बेटी हैं।

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कॉलेज से शुरू किया अपराध
-शहाबुद्दीन ने कॉलेज टाइम से ही अपराध और राजनीति में कदम बढ़ा दिया था।
-थोड़े समय में ही शहाबुद्दीन ने अपराध और राजनीति में काफी नाम कमा लिया।
-शहाबुद्दीन सिवान से चार बार MP और दो बार MLA रह चुका है।
-राजनीति के गलियारों में शहाबुद्दीन ने लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में जनता दल की युवा इकाई में कदम रखा।

-1990 में विधानसभा का टिकट दिया, शहाबुद्दीन ने जीत हासिल की।
-यही नहीं पहली बार जनता दल के टिकट पर उस समय के सबसे कम उम्र के जनप्रतिनिधि के रूप में विधानसभा पहुंचा।
-दोबारा उसी सीट से1995 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की।
-इसके बाद शहाबुद्दीन ने की ताकत और बढ़ती गई।

शहाबुद्दीन पर आपराधिक मामले
-शहाबुद्दीन पर अलग अलग आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह सीवान जेल में 2003 से बंद थे। उन्हें 1996 में तत्कालीन एसपी एसके -सिंघल की हत्या की कोशिश के मामले में 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी।
-वहीं 1999 में सीपीआई (एमएल) के नेता छोटे लाल गुप्ता के अपहरण मामले में बिहार की अदालत ने शहाबुद्दीन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।
-पूर्व सांसद पर इतने मामले चल रहे हैं कि इस ज़मानत से उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिली।

क्या है तेजाब कांड?
-बिहार के सीवान में साल 2004 में दो भाइयों गिरीश राज और सतीश राज की तेजाब डालकर हत्या कर दी गई थी।
-दोनों भाई व्‍यवसाई चंद्रकेश्‍वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के बेटे थे
-हत्याकांड का गवाह मृतकों का तीसरा भाई राजेश रोशन था।
-उसकी भी बाद में हत्या कर दी गई। पीड़ित परिवार ने शहाबुद्दीन पर हत्‍या का आरोप लगाया था।
-इसके बाद उन्‍हें हत्‍या के मामले में जेल हुई थी।

ये है राजदेव मर्डर केस
बिहार के सीवान जिले में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में पांच शूटरों को पकड़ा था। इन शूटरों ने पूछताछ में लड्डन मियां का नाम लिया था। शहाबुद्दीन के करीबी लड्डन मियां के कहने पर ही राजदेव की हत्या की गई थी। लड्डन ने बाद में पुलिस के सामने सरेंडर किया था। बता दें कि शहाबुद्दीन भले ही राजदेव की हत्या में अपने हाथ से इनकार करते हों, लेकिन राजदेव की पत्नी आशा ने आशंका जताई है कि शहाबुद्दीन उनपर भी हमला करा सकते हैं।

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