सितम्बर है खतरनाकः आधी से अधिक आबादी होगी संक्रमित! अभी से रहें सावधान

विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि कोविड-19 को लेकर 60 से 85 प्रतिशत आबादी में प्रतिरक्षा आने से ही हर्ड इम्यूनिटी बन पाएगी। हर्ड इम्युनिटी में डिप्थीरिया के मामलों में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत, पोलियो में 80 से 85 प्रतिशत और मीजल्स में 95 प्रतिशत है। तो फिर क्या कोरोना में ऐसा हो पाएगा।

हर्ड इम्युनिटी

रामकृष्ण वाजपेयी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल रात आठ बजे के संबोधन से देश के अधिकांश नागरिकों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री लॉकडाउन-4 का प्रारूप पेश करेंगे। लेकिन लोगों को उस समय झटका लगा जब प्रधानमंत्री के संबोधन का आखिरी चरण भी निकल गया लेकिन लॉकडाउन-4 पर कुछ भी साफ नहीं हुआ। अलबत्ता प्रधानमंत्री ने सिर्फ इतना संकेत दिये कि जल्द ही लॉकडाउन-4 कैसा होगा इसमें क्या होगा इसका पता आप लोगों को चल जाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री के संबोधन से इशारों इशारों में एक बात साफ हो गई कि अब हमें कोरोना की चुनौती को स्वीकार कर उसके हिसाब से नई जीवनशैली को अपनाकर उसके अनुरूप जीना है। कोरोना से पहले की जीवन शैली को भूल जाना है। मॉस्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अपने ड्रेस कोड में शामिल कर लेना।

सोशल डिस्टेंसिंग के लिए स्पेस की दिक्कत

लेकिन ये आसान काम नहीं है। शिक्षा के निजीकरण के फलस्वरूप स्कूलों में जिस तरह से बच्चों को सब्जी के भाव भर लिया गया है वह बच्चों से सोशल डिस्टेंसिंग कैसे मेनटेन कराएंगे। अगर एक एक मीटर दूरी पर भी बच्चों को बैठाएंगे तो कितनी क्लासों की जरूरत पड़ेगी। सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में जहां एक दूसरे से सट कर बैठने को स्टाफ मजबूर है वह कैसे सोशल डिस्टेंसिंग मेनटेन करेगा।

बड़े शो रूम जहां एक समय में दो तीन सौ या अधिक लोग खरीदारी करते हैं वहां सोशल डिस्टेंसिंग कैसे मेनटेन होगी। खैर बहुत सारी चीजें तो मुमकिन ही नहीं हैं उनके बारे में सोचना बेकार है।

क्या हर्ड इम्युनिटी के रास्ते पर है देश

लेकिन एक बात है कि बिना कोई घोषणा किये देश अब हर्ड इम्युनिटी के रासते पर चल पड़ा है। इसका कारण यह है कि लॉकडाउन में स्थाई रूप से नहीं रहा जा सकता है। इसकी घोषणा न किये जाने के पीछे बहुत बड़ा कारण है इसके असफल होने का भय। क्योंकि जहां कई वैज्ञानिक इसका समर्थन कर रहे हैं वहीं इसके विरोध में खड़े होने वाले भी कम नहीं हैं। कोरोना संकट के दौर में कई देशों की विफलता इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

ये हर्ड इम्युनिटी क्या है तो इसका मोटा गणित यह है कि जब किसी देश की कम से कम 60 फीसदी आबादी संक्रमित हो जाती है तो वहां के लोगों के शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र विकसित हो जाता है। स्वास्थ्य विज्ञानियों का कहना है कि किसी महामारी से बचने का एकमात्र तरीका है- प्रतिरक्षा। यह प्रतिरक्षा हासिल करने के दो ही रास्ते हैं। पहला, वैक्सीन और दूसरा बीमारी से शरीर में एंटीबॉडी निर्माण। जितने ज्यादा लोगों में प्रतिरक्षा होगी, बीमारी उतनी ही कम फैलेगी या थम जाएगी।

58 फीसदी आबादी के चपेट में आने का खतरा

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 10 अप्रैल 2020 को कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा था कि आने वाले समय में कोरोना वायरस (कोविड-19) से स्थिति और भयावह हो सकती है। आज हमारे देश में कोरोना के मामलों के सामने आने की रफ्तार कहीं अधिक है। जबकि इसका कारण देश में जांच सुविधाओं का बढ़ना बताया जा रहा है।

लेकिन अमरिंदर सिंह ने एक बात और कुछ सीनियर और टॉप मेडिकल ऑफिसर्स के हवाले से कही थी कि कोविड-19 सितंबर के मध्य तक अपने चरम पर होगा और इस वायरस की वजह से देश की 58 प्रतिशत आबादी संक्रमित होगी, जबकि पंजाब के 87 फीसद लोग प्रभावित होंगे।

पंजाब के मुख्यमंत्री के मुताबिक पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में सितंबर के मध्य में कोरोना वायरस का कहर अपने चरम पर होगा और देश की 58 फीसदी आबादी इसकी चपेट में होगी।

यही है हर्ड इम्युनिटी

यही हर्ड इम्युनिटी है। विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि कोविड-19 को लेकर 60 से 85 प्रतिशत आबादी में प्रतिरक्षा आने से ही हर्ड इम्यूनिटी बन पाएगी। हर्ड इम्युनिटी में डिप्थीरिया के मामलों में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत, पोलियो में 80 से 85 प्रतिशत और मीजल्स में 95 प्रतिशत है। तो फिर क्या कोरोना में ऐसा हो पाएगा।

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भी संभव है कि अगर यह कारगर न हुआ तो संभव है मौतों और प्रभावितों की संख्या और बढ़ जाए।

इस मामले में सरकार के एक फैसले की लोग आलोचना भी कर रहे हैं वह है मजदूरों और श्रमिकों को उनके घर वापस लाना। लेकिन अगर हर्ड इम्युनिटी पर चलें तो यह फैसला ठीक है। मामले एक बार बढ़ेंगे लेकिन फिर उतनी ही तेजी से देश संकट से बाहर भी आ जाएगा। हालांकि गांव में इन प्रवासियों की कोरंटीन की उचित व्यवस्था इसके बाद भी आवश्यक रहेगी।

लेकिन अभी तो इंतजार है लॉकडाउन-4 के नियमों और शर्तों पर जिस पर चलकर देश को आगे की मंजिल तय करनी है।