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कारगिल विजय दिवस: इस जवान ने मां को लिखा था भावुक कर देना वाला खत, ऐसे हुआ था शहीद

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 26 July 2018 3:05 AM GMT

कारगिल विजय दिवस: इस जवान ने मां को लिखा था भावुक कर देना वाला खत, ऐसे हुआ था शहीद
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लखनऊ: 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा। इस खास मौके पर newstrack.com आपको एक ऐसे जवान के बारे में बताने जा रहा है। जिसका सपना देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने का था। उस जवान का नाम कैप्टन विजयंत थापर है।

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कारगिल की लड़ाई के दौरान उनका हौसला इतना बुलंद था कि हिन्दी फिल्मों के गाने गुनाते हुए उन्होंने अपनी टीम के साथ तोलोलिंग चोटी को फतेह किया था। उसके बाद जंग लड़ते हुए देश के लिए शहीद हो गये थे। उन्होंने जंग में जाने से पहले अपनी मां को एक भावुक कर देना वाला खत भी लिखा था।

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पहली पोस्टिंग में मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विजयंत थापर को सेना में सिर्फ तीन महीने ही हुए थे, जब करगिल युद्ध की शुरुआत हुई। विजयंत अपने कमांडिग ऑफिसर के कमांड पर द्रास पहुंचे, जहां बटालियन 2 राजपूताना राइफल्स को तोलोनिंग से दुश्मनों को मार भगाने का मिशन मिला।

तोलोलिंग पर फहराया तिरंगा

13 जून 1999 को तोलोलिंग की पहाड़ियों पर जीत हासिल कर तिरंगा फहराया था। ये जीत करगिल युद्ध के दौरान भारत के हक में काफी महत्वपूर्ण थी। तोलोलिंग की जीत के बाद 28 जून को कैप्टन विजयंत थापर को थ्री-पिंपल्स नाम की पहाड़ी को पाकिस्तानी घुसपैठियों के कब्जे से आजाद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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5 हजार फीट पर दी शहादत

15 हजार फीट की ऊंचाई और सीधी चढ़ाई भी विजयंत थापर के हौसलों को डिगा नहीं सकी। इस मुश्किल मिशन में उनकी टुकड़ी के कई जांबाज शहीद हो चुके थे, लेकिन विजयंत थापर आगे बढ़ने से रुके नहीं।बेहद मुश्किल हालात में लड़ी गई इस जंग में कैप्टन विजयंत ने दुश्मनों के खिलाफ बेमिसाल बहादुरी दिखाई और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए।

शहादत से पहले मां को लिखा खत

शहादत से पहले तोलोलिंग पर फतेह करने के बाद कैप्टन विजयंत थापर ने अपनी मां को एक खत लिखा था, जिसमें लिखा था कि "हमारी बटालियन ने तोलोलिंग पर जीत हासिल कर ली है। अब 15 हजार फीट की ऊंचाई और माइनस 15 डिग्री टेमप्रेचर में नॉल (तोलोलिंग और टाइगर हिल के बीच की पहाड़ी) पर विजय हासिल करना जाना है। मां अब हमारी 20 दिन तक बातचीत नहीं हो पाएगी। आप मेरा इंतजार मत करना" लेकिन, 20 दिन से पहले ही कैप्टन विजयंत थापर का पार्थिक शरीर घर आ गया।

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