अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 2 अगस्त से रोजाना होगी सुनवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने गोपाल सिंह के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि अयोध्या जमीन विवाद मामला पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की फ़ाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट की फ़ाइल फोटो

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज यानि गुरुवार को अयोध्या जमीन विवाद मामले में मध्यस्थता कमेटी की प्रगति रिपोर्ट आज दाखिल कर दी है। इस मामले में सूत्रों का कहना है कि सभी पक्षों से बात होने के बाद मध्यस्थता कमेटी ने प्रगति रिपोर्ट को दाखिल किया है। मध्यस्थता कमेटी को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने 31 जुलाई तक का समय दिया है। इसके बाद 2 अगस्त को दोपहर 2 बजे खुली कोर्ट में सुनवाई होगी।

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कोर्ट से की थी पक्षकार ने सुनवाई की मांग

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के एक पक्षकार गोपाल सिंह विशारद द्वारा याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में गोपाल सिंह ने कहा था कि विवाद सुलझने के आसार मध्यस्थता कमेटी के नाम पर बेहद कम हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इससे सिर्फ और सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है। ऐसे में मध्यस्थता कमेटी को कोर्ट को खत्म करके खुद इस मामले का निस्तारण करना चाहिए।

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69 सालों से अटका है मामला

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने गोपाल सिंह के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि अयोध्या जमीन विवाद मामला पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है। इस मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता शुरू की गई थी लेकिन इसका रुख सकारात्मक नजर नहीं आ रहा है। बता दें कि अब तक 1 संयुक्त सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। मगर ऐसा लगता है कि कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। यह विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझाना मुश्किल है।

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