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Mathura's Shahi Idgah Mosque Case: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर नोटिस जारी किया, 8 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
Mathura's Shahi Idgah Mosque Case: शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने मस्जिद कमेटी के वकील और हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलों पर विचार किया और नोटिस जारी किए।
हिंदू पक्ष के दावे को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती ( फोटो: सोशल मीडिया)
Mathura's Shahi Idgah Mosque Case: उच्चतम न्यायालय ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष से संबंधित सभी मामलों को एकीकृत करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मस्जिद कमेटी की याचिका पर शुक्रवार को नोटिस जारी किए। उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2023 को शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंधन समिति द्वारा दायर एक अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें 11 जनवरी के अदालती आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया गया था।
इस आदेश में हिंदू पक्ष के सभी मामलों को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया गया था। 19 मार्च 2023 को उच्चतम न्यायालय ने मस्जिद कमेटी से कहा था कि वह इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील करे। इसके बाद कमेटी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने मस्जिद कमेटी के वकील और हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलों पर विचार किया और नोटिस जारी किए। पीठ ने कहा कि सभी प्रतिवादियों को सात दिन के भीतर नोटिस भेजे जाएं। मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में "भगवान श्रीकृष्ण विराजमान" सहित 10 अन्य पक्षकारों को प्रतिवादी बनाया है।
पीठ ने इस मामले पर सुनवाई 8 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी, जब कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई होगी। यह विवाद मुग़ल बादशाह औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित है, और हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर स्थित एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष से संबंधित सभी मामलों को एकीकृत करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मस्जिद कमेटी की याचिका पर शुक्रवार को नोटिस जारी किए। उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2023 को शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंधन समिति द्वारा दायर एक अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें 11 जनवरी के अदालती आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया गया था।
इस आदेश में हिंदू पक्ष के सभी मामलों को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया गया था। 19 मार्च 2023 को उच्चतम न्यायालय ने मस्जिद कमेटी से कहा था कि वह इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील करे। इसके बाद कमेटी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने मस्जिद कमेटी के वकील और हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलों पर विचार किया और नोटिस जारी किए। पीठ ने कहा कि सभी प्रतिवादियों को सात दिन के भीतर नोटिस भेजे जाएं। मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में "भगवान श्रीकृष्ण विराजमान" सहित 10 अन्य पक्षकारों को प्रतिवादी बनाया है।
पीठ ने इस मामले पर सुनवाई 8 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी, जब कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई होगी। यह विवाद मुग़ल बादशाह औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित है, और हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर स्थित एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।