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अदालतों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा बल की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर ट्रायल व जिला अदालतों सहित देश की सभी अदालतों में सुरक्षा विशेष सुरक्षा बलों को सौंपे जाने के लिए नोटिस जारी की है। यह नोटिस न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की खंड पीठ ने जारी की है।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 13 Dec 2019 2:54 PM GMT

अदालतों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा बल की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर ट्रायल व जिला अदालतों सहित देश की सभी अदालतों में सुरक्षा विशेष सुरक्षा बलों को सौंपे जाने के लिए नोटिस जारी की है। यह नोटिस न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की खंड पीठ ने जारी की है।

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एडवोकेट दुर्गा दत्त ने जनहित याचिका के माध्यम से यह मुद्दा उठाया था कि तमाम समाज विरोधी तत्व हथियारों के साथ अदालतों के परिसर में घुस जाते हैं और ये अत्यधिक असुरक्षित माहौल बना देते हैं। इसलिए अदालतों की वर्तमान की स्थिति को देखते हुए अदालतों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है।

जनहित याचिका में अदालत परिसर में बार काउंसिल चेयरमैन दरवेश यादव की हत्या और दिल्ली अदालत परिसर में तीस हजारी हिंसा का उल्लेख किया गया है।

सतर्कता की आवश्यकता है

याची का तर्क था “हमारी न्यायिक प्रणाली की अखंडता की रक्षा के लिए, अदालतों में आने और काम करने वाले लोगों में सुरक्षा की भावना और उन में आजादी का अहसास होना चाहिए। सुरक्षा एक बार की उपलब्धि नहीं है। यह एक गंभीर और निरंतर लक्ष्य है और निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है। इसके अलावा, यह न्यायपालिका में भरोसा रखने वाले सभी लोगों के लिए हर एक दिन नंबर एक की प्राथमिकता होनी चाहिए। ”

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याचिकाकर्ता का तर्क था कि स्थानीय पुलिस काम के दबाव में और लगातार काम करने से घबरा जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता बिगड़ जाती है। इसके अलावा, स्थानीय पुलिस बल न तो अच्छी तरह से हथियारों से लैस है और न ही अदालतों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित है। इसलिए समर्पित पुलिस प्रणाली के साथ ऐसी पुलिस की आवश्यकता है जिसे बीच बीच में बदला जाता रहे। बदले में वह अदालत परिसर में सभी के लिए पूर्ण पैमाने पर सुरक्षा प्रदान करे।

याची ने कहा कि एक समर्पित पुलिस बल की अवधारणा नई नहीं है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) रेलवे की संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा भी करती है और उसे तलाशी लेने गिरफ्तार करने, जांच और अभियोजन का अधिकार भी है।

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