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तबलीगी जमात बेगुनाह: सभी विदेशी जेल से रिहा, कोर्ट ने पुलिस को फटकारा

दिल्ली की एक अदालत ने तबलीगी जमात से जुड़े केस में 36 विदेशियों को मंगलवार को बरी कर दिया। देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी सरकारी दिशानिर्देश का पालन ना करने पर दिल्ली पुलिस ने अन्य धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था।

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MonikaBy Monika

Published on 16 Dec 2020 3:17 AM GMT

तबलीगी जमात बेगुनाह: सभी विदेशी जेल से रिहा, कोर्ट ने पुलिस को फटकारा
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तबलीगी जमात केस: सभी 36 विदेशी बरी, नहीं मिले ठोस सबूत
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दिल्ली की एक अदालत ने तबलीगी जमात से जुड़े केस में 36 विदेशियों को मंगलवार को बरी कर दिया। देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी सरकारी दिशानिर्देश का पालन ना करने पर दिल्ली पुलिस ने अन्य धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था।

लगी थी ये धारा

अदालत ने 24 अगस्त को भारतीय दंड संहिता की धरा 188 (सरकारी सेवक द्वारा लागू आदेश का पालन नहीं करना), 269 (संक्रमण फैलाने के लिए लापरवाही भरा कृत्य करना) और महामारी कानून की धारा तीन (नियमों को नहीं मानना) के तहत विदेशियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आपदा प्रबंधन कानून, 2005 की धारा 51 के तहत भी उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

6 विदेशियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किए

वही विदेशी कानूनों की धरा 14( 1)(B) वीजा नियमों का उल्लंघन, आईपीसी की धारा 270 (संक्रमण फैलाने के लिए लापरवाही भरा कृत्य करना), और 271 (आइसोलेशन के नियमों को नहीं मानना )के तहत उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया। अदालत ने इनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिलने पर 6 देशों के आठ विदेशी नागरिकों को भी आरोपमुक्त कर दिया था। इन 6 लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किए गए थे।

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन "मरकज परिसर के अंदर अभियुक्तों की उपस्थिति को साबित करने में विफल रहा' और गवाहों के बयानों में 'विरोधाभास' थे। आदेश पारित करते हुए मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने हजरत निजामुद्दीन SHO को भी तलब किया।

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अलग अलग जगहों से उठाया

गवाहों के बयानों में विरोधाभास का जिक्र करते हुए अदालत ने कुछ अभियुक्तों द्वारा दलील को स्वीकार किया कि 'उस अवधि के दौरान उनमें से कोई भी मरकज में मौजूद नहीं था और उन्हें अलग-अलग से उठाया गया था ताकि गृह मंत्रालय के निर्देश पर दुर्भावना से उन पर मुकदमा चलाया जा सके ।

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