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प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए जुटीं टॉप कंपनियां

प्राइवेट कंपनियों के बीच टेंडर या नीलामी की प्रक्रिया चंद हफ्तों में शुरू होने की उम्मीद है। कंपनियां रूटों के नेटवर्क के लिह बोलियां लगाएंगीं और रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर उनका चयन किया जाएगा।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 31 Jan 2020 10:01 AM GMT

प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए जुटीं टॉप कंपनियां
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नई दिल्ली: भारत में ट्रेनें चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को दिए गए न्यौते का खूब स्वागत किया गया है। कम से कम दो दर्जन कंपनियों ने भारत सरकार की पेशकश में रुचि दिखाई है। इन कंपनियों में आल्सटॉम ट्रांसपोर्ट, बॉम्बार्डियर, सीमेन्स एजी और मैक्वेरी जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनके अलावा अडानी पोर्ट्स, IRCTC, नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड (NIIF) और केईसी इंटेनेशनल लि. जैसी देशी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है।

प्राइवेट कंपनियों के बीच टेंडर या नीलामी की प्रक्रिया चंद हफ्तों में शुरू होने की उम्मीद है। कंपनियां रूटों के नेटवर्क के लिह बोलियां लगाएंगीं और रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर उनका चयन किया जाएगा।

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100 रूटों पर प्राइवेट 150 आधुनिक ट्रेनें चलेंगी

सरकार का इरादा 100 रूटों पर प्राइवेट कंपनियों की ट्रेनें चलाने का है। इस कदम से सरकार का ट्रेन संचालन पर एकाधिकार समाप्त हो जाएगा और साथ ही भारतीय रेलवे में जिस भारी निवेश की जरूरत है उसकी पूर्ति भी हो जाएगी। शुरुआत में 100 रूटों पर प्राइवेट ऑपरेटर 150 आधुनिक ट्रेनें चलाएंगे और यात्रियों को वल्र्ड क्लास तकनीक और सेवाएं मिलेंगी।

भारतीय रेलवे अभी 13 हजार यात्री ट्रेनें संचालित कर रही है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद यादव के अनुसार बढ़ती मांग को पूृरा करने के लिए 20 हजार ट्रेनों की जरूरत है। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा है कि पहली प्राइवेट ट्रेन चलने में कम से कम दो साल का वक्त लगेगा।

रेलवे

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योजना के अनुसार, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मेंटेनेंस, ऑपरेशंस और सुरक्षा का काम भारतीय रेलवे के हाथ में रहेगा। प्राइवेट ऑपरेटर लीज पर रेक ले कर यात्रियों को ऑन बोर्ड सुविधाएं प्रदान कर सकेंगे। प्राइवेट ऑपरेटर को 35 साल तक ट्रेनें चलाने की इजाजत मिलेगी। नीति आयोग और रेल मंत्रालय के अनुमान के अनुसार 100 रूटों पर 150 प्राइवेट ट्रेनें चलाने के लिए 22500 करोड़ का निवेश करना होगा।

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