अब जल्द खत्म होगा ट्रेनों में सीटों का झगड़ा

Published by seema Published: July 26, 2019 | 12:55 pm

नई दिल्ली : ट्रेनों के जनरल डिब्बों में जल्द ही सीटों को लेकर होने वाली धक्कामुक्की और मारपीट खत्म होने वाली है। मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से लखनऊ के लिए चलने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमीट्रिक सिस्टम का ट्रायल सफल होने के बाद अब इस उपाय को अन्य ट्रेनों में भी लागू कर भीड़ प्रबंधन की तैयारी है। इस सिस्टम में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर सीटें मिलेंगी। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने खास पहल की है।

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अन्य ट्रेनों में भी लागू करने की तैयारी
आरपीएफ के महानिदेशक और 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि सिस्टम लागू होने से बायोमीट्रिक मशीन से गुजरने के बाद ही यात्री डिब्बों में सवार हो सकेंगे। रेल मंत्री पीयूष गोयल के निर्देश पर आम रेल यात्रियों की तकलीफों को दूर करने के मद्देनजर आरपीएफ ने यह पहल की है। स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ संभालने में इसे बेहद मददगार माना जा रहा है। इस बाबत अरुण कुमार ने बताया कि मुंबई के चार स्टेशनों पर बायोमीट्रिक मशीनें लगा दी गई हैं। पुष्पक एक्सप्रेस में चार महीने से जारी ट्रायल सफल रहा है। अब उन सभी ट्रेनों की जनरल बोगियों में यात्रियों के प्रवेश के लिए बायोमीट्रिक सुविधा लागू करने की तैयारी है, जिसमें भारी भीड़ के कारण मारपीट की नौबत आ जाती है। यह सिस्टम लागू होने पर ट्रेनों की सीटों पर कब्जे के लिए यात्रियों के बीच झगड़े की नौबत नहीं आएगी।

कई स्टेशनों पर की जाती है वसूली
दरअसल दिल्ली, मुंबई आदि स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जुटती है। यहां से बड़ी तादाद में यात्री अनारक्षित यानी जनरल डिब्बों में सफर करते हैं। भारी भीड़ के कारण जनरल डिब्बों में चढऩे के लिए मारामारी होती है। सीट पाने के चक्कर में ही यात्री घंटों पहले से स्टेशनों पर जाकर डट जाते हैं। कई स्टेशनों पर कुली और आरपीएफ के कुछ मनबढ़ सिपाही पैसे लेकर जनरल डिब्बों की सीटें बेच देते हैं। जनरल डिब्बों में वही पहले चढ़ पाता है जो उनकी जेबें गरम करता है। पैसा न देने वालों का नंबर आखिर में आता है। ट्रेनों में मारपीट खत्म करने और यात्रियों की सुविधा के लिए आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने ट्रायल के तौर पर पहले लंबी दूरी की बहुत भीड़भाड़ वाली पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमीट्रिक सिस्टम लागू करने की योजना बनाई। डीजी ने पाया कि तकनीक के इस्तेमाल से क्यू मैनेजमेंट में मदद मिली। प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की नौबत खत्म हुई और यात्री आसानी से बोगियों में सवार होने लगे।

इस तरह काम करता है बायोमीट्रिक सिस्टम
स्टेशन पर पहुंचने के बाद आपको संबंधित ट्रेन में सवार होने के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम से गुजरना होगा। इसके लिए यात्री को मशीन में अंगुली लगाकर फिंगर प्रिंट देना पड़ेगा। फिंगर प्रिंट देने के बाद बोगी में आपके लिए सीट रिजर्व हो जाएगी। यदि आपने यह काम कर लिया तो आप बेफिक्र हो सकते हैं और आपको प्लेटफॉर्म पर ही डटे रहने की जरूरत नहीं। ट्रेन का समय होने पर मौके पर पहुंचकर और फिर से अपना फिंगर प्रिंट मैच कराने पर आपको आरपीएफ की ओर से बोगी में एंट्री मिल जाएगी। मशीन उतनी ही फिंगर प्रिंट लेगी जितनी बोगी की क्षमता होगी। मतलब यह कि पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर लोगों को आसानी से सीट मिल जाएगी। इस सिस्टम के लागू होने पर देरी से आने वाले लोग भी चढ़ सकेंगे, लेकिन उनका कोई जुगाड़ काम नहीं करेगा। उन्हें सीट हासिल नहीं हो पाएगी।