अयोध्या विवाद पर उद्धव का वार! फैसले का श्रेय नहीं ले सकती भाजपा

अयोध्या में विवादित ज़मीन (राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। इस मसले पर सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता से लेकर संत समाज और सभी समुदाय के धर्म गुरुओं ने भी शांति-व्यवस्था और सौहार्द बनाये रखने की अपील जनता से की है।

मुंबई: अयोध्या में विवादित ज़मीन (राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। इस मसले पर सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता से लेकर संत समाज और सभी समुदाय के धर्म गुरुओं ने भी शांति-व्यवस्था और सौहार्द बनाये रखने की अपील जनता से की है।

इसी बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान आया है, उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या विवाद पर दिए जाने वाले फैसले का श्रेय नहीं ले सकती।
हमने सरकार से निवेदन किया था कि राम मंदिर बनाए जाने को लेकर कानून बनाना चाहिए मगर सरकार ने ऐसा नहीं किया। अब जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाने जा रही है तो सरकारक इसका श्रेय नहीं ले सकती है।

मीठी-मीठी बातें बोलकर 2014 में फायदा उठाया…

इसके साथ ही उद्धव ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सामने 50-50 का फॉर्मूला फाइनल हुआ था। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने कहा था कि अभी तक जो हुआ सो हुआ, अब न्याय होगा।
शाह ने कहा था कि हम पद और जिम्मेदारियां बराबर बांट लेंगे। शाह ने कहा था कि मैं मुख्यमंत्री पद का नहीं जिक्र करूंगा। उन्होंने यह जरूर कहा था कि 50-50 पर कब बोलना है, यह मैं तय करूंगा।

शिवसेना अध्यक्ष ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद भी अमित शाह ने मुझसे पूछा था कि आप को कौन सा मंत्रालय चाहिए? मैंने कहा कि कोई अच्छा मंत्रालय दीजिए। उन्होंने मुझे वही मंत्रालय दिया, जो मैं नहीं चाहता था।

“हमने जिसका साथ दिया, उसको शत्रु बोलने की परंपरा शिवसेना की नहीं है। 2014 में भाजपा ने हमारा फायदा उठाया और मीठी-मीठी बातें कीं।’

साथ ही साथ उद्धव ने यह भी कहा कि फडणवीस की जगह अगर कोई और मुख्यमंत्री होता तो शायद शिवसेना उनके साथ भी खड़ी नहीं होती। हमें उनसे कोई दिक्कत नहीं। कौन झूठ बोल रहा है, यह जनता को पता है। लोकसभा में जो हमें मेंडेट मिला था, विधानसभा में वक्त कम क्यों हो गया? यह भी सभी को पता है।

उन्होंने कहा कि चर्चा को लेकर हमने कभी दरवाजा बंद नहीं किया। बस मैं उनके झूठ से परेशान हूं। हमने सरकार को लेकर कांग्रेस से कभी चर्चा नहीं की। अहमद पटेल से मेरी नहीं, अमित शाह की पहचान है।

डिप्टी सीएम के पद स्वीकार नहीं…

हम डिप्टी सीएम के पद पर तैयार नहीं हैं। वादा मुख्यमंत्री का हुआ था तो मुख्यमंत्री ही मिलना चाहिए। आप महबूबा मुफ्ती, नीतीश कुमार जैसे लोगों के साथ सरकार चला सकते हैं और हमारे साथ सरकार चलाने में दिक्कत है।

 

फडणवीस ने कहा…

फडणवीस ने इस्तीफे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने के मुद्दे पर मेरे सामने कभी शिवसेना से बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बातचीत विफल होने के लिए शिवसेना ही सौ फीसदी जिम्मेदार है।

पिछले 10 दिनों में मोदीजी के खिलाफ जिस तरह की बयानबाजी हुई, वह असहनीय है। राउत ने कहा कि हमने कभी भी नरेंद्र मोदी या अमित शाह के खिलाफ व्यक्तिगत बयानबाजी नहीं की है।

शिंदे ने कहा..

एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ कांग्रेस नेताओं की बैठक खत्म हुई। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि हमारा उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखना है, लेकिन इसको लेकर कोई भी तय चर्चा अभी नहीं हुई है।

सरकार बनाने पर थोराट ने कहा…

बैठक के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने कहा कि पवार साहब से हमने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की है।

बताते चलें कि वह अघाड़ी के बड़े नेता हैं, इसलिए उनसे चर्चा जरूरी था। सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रण देने की जिम्मेदारी माननीय राज्यपाल जी की है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे पास सरकार निर्माण के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं, इसलिए हमने इस पर अभी तक कोई भी निर्णय नहीं किया है।

भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा दल है इसलिए उन्हें सरकार बनाने के लिए अपना मत पेश करना चाहिए। हम वर्तमान की सिचुएशन को देख रहे हैं और हमने कोई भी स्ट्रैटेजी नहीं बनाई है।

गडकरी ने कहा…

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अभी समय है, मैं महसूस करता हूं कि महाराष्ट्र के लोगों के हितों के लिए भाजपा और शिवसेना को साथ आना चाहिए और सरकार बनानी चाहिए। 50-50 के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना से ऐसा कोई वादा नहीं किया था।

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