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लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी सवर्णों का आरक्षण बिल हुआ पास

165 लोगों ने बिल का समर्थन किया और 7 लोगों ने बिल के विरोध में वोटिंग की। कुल 172 लोगों ने वोटिंग में भाग लिया था। और अन्तत: ये बिल सदन में पास हो गया।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 9 Jan 2019 4:57 PM GMT

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी सवर्णों का आरक्षण बिल हुआ पास
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नई दिल्ली : आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल आज राज्यसभा में पेश हुआ। सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संशोधन बिल राज्यसभा में पेश किया गया। जिसमें कि 165 लोगों ने बिल का समर्थन किया और 7 लोगों ने बिल के विरोध में वोटिंग की। कुल 172 लोगों ने वोटिंग में भाग लिया था। और अन्तत: ये बिल सदन में पास हो गया।

यह बिल मंगलवार को लोकसभा से पास हुआ था। मंगलवार को बिल पर दिन भर की चर्चा के बाद लोकसभा के सदस्यों ने वोटिंग की , जिसमें 3 के मुकाबले 323 मतों से यह बिल पास हो गया था। वोटिंग के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा में मौजूद थे। आपको बता दें, राज्यसभा में 246 सदस्य हैं और अगर सभी सदस्य वोटिंग में हिस्सा लेते हैं तो बिल को 164 वोट की जरूरत पड़ेगी। विपक्ष यहां अपने दबदबे का इस्तेमाल कर सकता है।

टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन क्या बोले

महिला आरक्षण पर बीजेपी बात नहीं करती, बिल क्यों नहीं लाती बीजेपी।

स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि कार्यक्रम नहीं चीट इंडिया चल रहा है।

हर साल 2 करोड़ रोजगार के जो वादे किए गए वे कहां हैं? अब पकौड़ानॉमिक्स दिया जा रहा।

इस सरकार में 80 फीसदी कानून बिना स्क्रूटनी के पास किए गए, इसलिए हमें इसपर आपत्ति है।

यह बिल युवाओं, गरीबों और आम लोगों को धोखा है, संसद का अपमान किया जा रहा है।

पहले कानून बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया का पालन होता था, अब इस बिल को लाने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया गया।

सपा नेता रामगोपाल क्या बोले

इस विधेयक के द्वारा जो ये लोग देश के अगड़ों तो मूर्ख बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो मुझे इनकी बुद्धि पर तरस आता है। क्योंकि देश के पिछड़े, अनुसूचित लोगों को तो आप घुमा लेते हैं लेकिन जो सबको घुमाते हैं उनको घुमाना इतना आसान नहीं है।

98 प्रतिशत गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण और 2 प्रतिशत अमीर लोगों को 40 फीसदी आरक्षण देने की बात को जरा समझाइए। अगर आप समता के अधिकार की बात करते हैं तो बताइए कहां है समता अधिकार?

मैं सत्ता पक्ष के लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या यह सरकार हमारी सरकार नहीं है? अगर हम इस बिल का समर्थन कर रहे हैं तो क्या इसमें हमारा योगदान नहीं है।

अपनी बात को शुरू करने से पहले मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमारी पार्टी इस बिल के समर्थन में है। लेकिन मैंने वह समय भी देखा है जब अनुसूचित जाति के लोगों के साथ भेदभाव हुए। ये भेदभाव बाबा साहब आंबेडकर और बाबू जगजीवन राम के साथ भी हुआ। हमें इसका ध्यान रखने की जरूरत है।

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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा क्या बोले

हम सभी राजनीतिक दलों से आते हैं। अगर ये राजनीति से प्रेरित नहीं होता और आपका अच्छा दिन का वादा पूरा हो जाता तो आप ये बिल कभी नहीं लाते।

आप सोचते हैं कि देश एक आवाज में आपके साथ खड़ा है लेकिन आपने देश के साथ वादा खिलाफी की है। आपने देश को सपना दिखाने का काम किया। महिलाओं के आरक्षण का बिल क्यों नहीं लाया। आप तीन तलाक पर राजनीति करते हैं लेकिन बाकी महिलाओं के लिए आप कुछ नहीं कर पाते। बेटी बचाए-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया लेकिन किया क्या?

ये सबका देश है इसे बनाने में जो भी लोग शामिल रहे अगर सबका सम्मान नहीं होगा ये गलत होगा। ये कहना कि साल 2014 से पहले कुछ नहीं हुआ था तो ये बताएं कि इससे पहले क्या कुछ था ही नहीं। इन लोगों ने कई वादे किए गए थे।

प्रश्न ये है कि क्यों अचानक इस विधेयक को लाया गया। संविधान का संशोधन जब आता है तो ये व्यापक विषय होता है। 2006 में इस पर एक कमीशन बैठाया गया था। सिन्हॉ कमीशन जिसकी रिपोर्ट भी आई थी। लोगों की सोच रही। हमने अपने घोषणा पत्र में भी इसका ज़िक्र किया। लेकिन सवाल ये है कि आपको चार साल चार महीने लगे। अब आखिरी सत्र में आप ये बिल लेकर आए हैं।

अभी तो आपने 5-0 से चुनावी सीरीज हारी। आपको लगा कि आप सही रास्ते पर ही नहीं है।

बीजेपी सांसद प्रभात झा क्या बोले

सामान्य वर्ग के गरीब लोग हमेशा ये चर्चा करते थे कि उन्हें कब आरक्षण मिलेगा। मैं नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ऐसे लोगों के लिए सोचा। उन्होंने कहा ही नहीं करके दिखाया।

70-72 साल बाद ऐसे लोगों की आवाज नरेंद्र मोदी ने उठाई है। हमारा साथ नहीं देश के युवाओं का साथ दीजिए।

देश की 95 फीसदी आबादी इस दायरे में आती हैं क्या ऐसे में सदन को इस पर विचार नहीं करना चाहिए। देश का 5 फीसदी परिवार ही इस दायरे से बाहर होगा।

लोकसभा में तीन लोगों को छोड़कर सभी लोगों ने इस विधेयक का साथ दिया।

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9वीं अनुसूची में डाला जाए आरक्षण: पासवान

आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान रामविलास पासवान ने कहा कि मंडल कमीशन के दौरान भी मेरा विरोध हो रहा था तब मैंने कहा था ये डबल लॉक है, अगर तुम नहीं करोगो को एक दिन सब तुम्हारा ही आरक्षण खत्म कर देंगे। अगर 50 फीसदी पहले से ही है और कल तक आरक्षण का विरोध करने वालों को भी 10 फीसदी आरक्षण मिल रहा है तो इसमें क्या गलत है, इससे किसी का हक भी नहीं मारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिल में कोई भेदभाव नहीं किया गया है और इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं।

पासवान ने कहा कि इस कुल 60 फीसदी आरक्षण को 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए ताकि कोई कोर्ट में इसे चुनौती न दे सके। इसके अलावा पासवान ने राजनाथ सिंह से मांग करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र में भी इस 60 फीसदी आरक्षण को लागू कराना चाहिए। भारतीय न्यायिक सेवा में हर जाति और धर्म के लोगों को स्थान मिलना चाहिए।

विपक्षी दलों ने दिया था अनआरक्षित वर्ग को आरक्षण देने का जुमला : जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन के अंदर केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि आज तक कई सरकारें आईं, जिन्होंने अनआरक्षित वर्ग को आरक्षण देने की बात कही थी लेकिन सही रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि अनआरक्षित वर्ग को आरक्षण देने का जुमला तो विपक्षी दलों ने दिया था।

संविधान में 50 फीसदी आरक्षण का दायरा सामजिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए लागू है, आर्थिक तौर पर पिछड़ों के लिए यह लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक तौर पर भेदभाव खत्म करने की कोशिश इस बिल के जरिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज हर नागरिक को समान अवसर देने की जरूरत है। आर्थिक आधार पर आरक्षण 50 फीसदी से भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह जातिगत आरक्षण से अलग है।

आरक्षण बिल पर बोलते हुए कांग्रेस के के वी थॉमस ने कहा कि हम बिल के खिलाफ नहीं है, लेकिन हमारी पार्टी की मांग है कि बिल को पहले जेपीसी में भेजा जाए क्योंकि यह काफी अहम बिल है।

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पिछड़ों के उत्थान के लिए आरक्षण: थंबीदुरई

लोकसभा में AIADMK सांसद थंबीदुरई ने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए दिया जाता है, मुझे समझ नहीं आ रहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि पिछड़ों के उत्थान के लिए आरक्षण नीति लाई गई थी, लेकिन यह सरकार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने जा रही, जबकि आपकी सरकार ने गरीबों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। अगर आप गरीबों का आरक्षण देने जा रहे हैं तो सरकार की इन योजनाओं से क्या फायदा हुआ, इससे साफ है कि आपकी सारी योजनाएं फेल हो गई हैं।

सामाजिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए आरक्षण बहुत जरूरी था, क्योंकि उसके बाद भी आजतक सामाजिक बराबरी नहीं आ पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले सामाजिक तौर पर पिछड़ों को सशक्त करना चाहिए। जाट, पटेल से लेकर ओबीसी के कई वर्ग आरक्षण की मांग कर रहे हैं और अगर सभी को शामिल करेंगे तो सीमा 70 फीसदी तक चली जाएगी। पहले सरकार तमिलनाडु के 69 फीसदी आरक्षण दे उसके बाद इस बिल पर विचार किया जाएगा। अगर आप किसी को आज आर्थिक आधार पर आरक्षण देते हैं और कल वो नौकरी पाकर अमीर हो जाता है फिर क्या आरक्षण को खत्म कर दिया जाएगा. जाति इस समाज में सच है जो हमेशा बनी रहती है।

दुर्बल लोगों को आरक्षण से मदद मिलेगी: शिवसेना

शिवसेना सांसद ने आनंदराव अडसुल कहा कि आर्थिक रूप से दुर्बल लोगों को आरक्षण से काफी मदद मिलती है। लेकिन समाज में SC, ST और ओबीसी के अलावा भी अन्य वर्गों के लोग भी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक तौर पर कमोजरों को आरक्षण देने का समर्थन बाला साहब और हमारी पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे भी इसका समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसमें साढ़े चार साल क्यों लगे यह सवाल मेरे मन भी आता है लेकिन कभी-कभी देरी से आए फैसले में दुरुस्त साबित होते हैं।

टीएमसी ने सरकार की मंशा पर उठाये सवाल

टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्याय ने बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि बिल को पेश करने के समय से हमारे मन में शक पैदा हुई कि सरकार की मंशा आखिर है क्या। सरकार क्या वाकई में युवाओं को रोजगार देना चाहती है या फिर 2019 के चुनाव में फायदा उठाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण बिल को क्यों नहीं लाया गया, क्या वह जरूरी नहीं था।

टीएमसी सांसद ने कहा कि बिल का समर्थन कर भी दिया गया तो नौकरियों का देश में क्या हाल है, सरकार कैसे घोषित नीतियों को पूरा करने जा रही है। यह बिल युवाओं के बीच झूठी उम्मीदें जगाएगा जो कभी सच्चाई नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इस बिल का समर्थन करते हुए उम्मीद करती है कि युवाओं को रोजगार देने का काम होगा।

निजी क्षेत्र की नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण

थावर चंद गहलोत ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार की सेवाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने का अधिकार होगा, इसके अलावा निजी क्षेत्र की नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। गहलोत ने कहा कि पहले भी इस तरह का आरक्षण देने की कोशिश की गई थी लेकिन संविधान में संशोधन के बगैर ऐसा नहीं किया जा सकता। मंत्री ने कहा कि संविधान में बदलाव के जरिए ही आरक्षण देना मुश्किल है ताकि बाद में कोई भी सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती नहीं दे सके।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने पहले ही अपने सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।

विपक्ष इस बिल के चुनावी प्रभाव को देखते हुए विरोध तो नहीं कर रहा है, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठा रहा है। ऐसे में शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन हंगामे की भेंट चढ़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार के पास न तो संख्या बल है और न ही समय, तो संसद में इसे लाने का मकसद सिर्फ सियासी है।

यह भी पढ़ें……मंदिर नहीं आरक्षण चाहिए अति पिछड़ो को: राष्ट्रीय आरक्षण आंदोलन संगठन

लालू की आरजेडी ने लोकसभा में सवर्ण आरक्षण का विरोध किया है। आरक्षण बिल बोलते हुए आरजेडी सांसद जेपी नारायण यादव ने कहा कि सवर्ण आरक्षण बिल धोखा है।

सपा ने इस बिल का समर्थन किया है। आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सपा सांद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आबादी के आधार पर आरक्षण मिले। सरकार सभी पदों पर असमानता दूर करे। इसके साथ ही धर्मेंद्र यादव सरकार की नीयत पर सवाल खड़ किए। धर्मेंद्र यादव ने पूछा कि कार्यकाल के आखिरी दिनों में क्यों बिल लाया गया?

10% आरक्षण का ये बिल संविधान के साथ धोखा: असदुद्दीन ओवैसी

बाबा साहब अंबेडकर का अपमान है सवर्ण आरक्षण बिल: ओवैसी

-सवर्ण आरक्षण बिल का फैसला ऐतिहासिक: रामदास अठावले

-10 फीसदी आरक्षण का बिल चुनावी स्टंट: भगवंत मान

-PM मोदी का 56 इंच का सीना लोगों के भले के लिए: महेंद्रनाथ पांडे

-रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सभी आरक्षण में 50% वाली सीमा का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन इस सीमा के बारे में संविधान में कोई जिक्र नहीं है। इसके बारे में जिक्र जजमेंट में केवल आया।

-आरक्षण बिल पर कपिल सिब्बल ने सरकार से पूछा- 8 लाख का मापदंड कैसे तय किया।

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