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Waqf Board Kya Hai: वक्फ बोर्ड क्या है? जिस पर इतना घमासान मचा हुआ है
Waqf Board Controversy: वक्फ अधिनियम, 1954 के तहत भारत में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। बाद में इसे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत संशोधित किया गया।
Waqf Board (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
Waqf Board Kya Hai: वक्फ बोर्ड एक कानूनी संस्था है, जो मुसलमानों द्वारा धार्मिक, सामाजिक, कल्याणकारी या परोपकारी कार्यों के लिए दी गई संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन करती है। वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'रोक देना' या 'समर्पित कर देना'। इसका तात्पर्य ऐसी संपत्ति से है, जो किसी धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्य के लिए स्थायी रूप से समर्पित कर दी गई हो। वक्फ बोर्ड (Waqf Board) इन संपत्तियों की देखरेख करता है और सुनिश्चित करता है कि उनके उपयोग से प्राप्त आय समाज कल्याण में लगे।
भारत में वक्फ को वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा विनियमित किया जाता है। एक सर्वेक्षण आयुक्त स्थानीय जांच करके, गवाहों को बुलाकर और सार्वजनिक दस्तावेजों की मांग करके वक्फ के रूप में घोषित सभी संपत्तियों को सूचीबद्ध करता है। वक्फ का प्रबंधन एक मुतवली द्वारा किया जाता है, जो पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है। भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत स्थापित ट्रस्टों के विपरीत, जो व्यापक उद्देश्यों की पूर्ति कर सकते हैं और बोर्ड द्वारा भंग किए जा सकते हैं, वक्फ विशेष रूप से धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए होते हैं और इन्हें स्थायी माना जाता है।
प्रमुख विवाद (Waqf Board Controversies)
-2022 में तमिलनाडु के वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के बसाए पूरे थिरुचेंदुरई गांव पर वक्फ होने का दावा ठोंक दिया।
-बेंगलुरू का ईदगाह मैदान विवाद। इस पर 1950 से वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है।
-सूरत नगर निगम भवन को वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा रहा। तर्क यह है कि इसे मुगलकाल में सराय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
-कोलकाता के टॉलीगंज क्लब, रॉयल कलकत्ता गोल्फ क्लब और बेंगलुरु में आईटीसी विंडसर होटल के भी वक्फ भूमि पर होने का दावा है।
सरकार और विपक्ष का तर्क (Government And Opposition Arguments)
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
वक्फ बोर्ड की स्थापना और कानूनी आधार
वक्फ अधिनियम, 1954 के तहत भारत में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। बाद में इसे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत संशोधित किया गया।
देशभर में 32 राज्य वक्फ बोर्ड हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा स्थापित केंद्रीय वक्फ परिषद (CWC) के अंतर्गत कार्य करते हैं।
वक्फ बोर्ड में धार्मिक विद्वान, सरकारी अधिकारी, अधिवक्ता और समाजसेवी शामिल होते हैं।
वक्फ संपत्ति क्या होती है (Waqf Property Kya Hoti Hai)
वक्फ संपत्ति में जमीन, मस्जिदें, दरगाहें, कब्रिस्तान, मदरसे, ईदगाहें, धार्मिक स्थल, अनाथालय और सामाजिक सेवा के लिए दान दी गई संपत्तियां शामिल होती हैं।
वक्फ संपत्तियां बेचने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने के लिए प्रतिबंधित होती हैं।
इन संपत्तियों से होने वाली आय शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबों की मदद और सामाजिक कल्याण में खर्च की जाती है।
वक्फ अधिनियम 1995: विवाद का मूल कारण
1995 में लागू वक्फ अधिनियम में वक्फ बोर्ड को अत्यधिक शक्तियां दी गईं। इसके तहत यदि वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई संपत्ति उसकी है, तो उसे इसे साबित करने की जरूरत नहीं होती। बल्कि, संपत्ति धारक को प्रमाण देना होता है कि संपत्ति वक्फ की नहीं है।
यह अधिनियम कहता है कि वक्फ बोर्ड निजी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकता। लेकिन यह तय करने का अधिकार बोर्ड के पास ही होता है कि संपत्ति निजी है या वक्फ की।
वक्फ बोर्ड के पास कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किए बिना ही भूमि पर अधिकार जताने का अधिकार होता है, जबकि असली मालिक को अपने स्वामित्व के सारे दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं।
वक्फ बोर्ड को लेकर वर्तमान विवाद (Waqf Board Latest Controversy)
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
1. संपत्तियों का रिकॉर्ड और विवाद
वर्तमान में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर देशभर में विवाद चल रहा है। कई मामलों में वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने अवैध रूप से संपत्तियों का अधिग्रहण कर लिया है या उन्हें गलत तरीके से लीज पर दिया गया है। कई राज्यों में सरकारी जमीन को वक्फ संपत्ति बताकर दावा किया जा रहा है, जिससे विवाद बढ़ गया है।
2. सुप्रीम कोर्ट में मामला
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संपत्तियों को लेकर एक अहम मामला चल रहा है। इसमें वक्फ बोर्ड के भूमि अधिकारों को चुनौती दी गई है। कुछ याचिकाओं में आरोप है कि वक्फ अधिनियम का दुरुपयोग करके सार्वजनिक जमीनों को वक्फ संपत्ति घोषित किया जा रहा है।
3. मध्य प्रदेश सरकार का फैसला
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड ने कई सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है। इस फैसले के बाद पूरे देश में वक्फ संपत्तियों पर चर्चा तेज हो गई है।
4. उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का सर्वे
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी 2022 में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण शुरू किया था। इसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि वक्फ बोर्ड ने सरकारी जमीनों को भी अपनी संपत्ति में शामिल कर लिया है।
वक्फ बोर्ड पर लगे प्रमुख आरोप (Major Allegations Against Waqf Board)
अवैध कब्जा: कई मामलों में वक्फ बोर्ड पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने सरकारी जमीनों को अपनी संपत्ति में शामिल कर लिया है।
भ्रष्टाचार: वक्फ बोर्ड के अधिकारियों पर संपत्तियों की गैर-कानूनी लीजिंग और बिक्री में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
धार्मिक पक्षपात: कई बार यह आरोप भी लगे हैं कि वक्फ बोर्ड संपत्तियों का उपयोग राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे के लिए करता है।
वक्फ बोर्ड को लेकर राजनीतिक बहस (Political Debate On Waqf Board)
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
बीजेपी का रुख: बीजेपी का कहना है कि वक्फ बोर्ड का दुरुपयोग करके सरकारी जमीनों को कब्जे में लिया जा रहा है। पार्टी वक्फ अधिनियम में संशोधन की मांग कर रही है ताकि वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित किया जा सके।
कांग्रेस और अन्य दलों का रुख-कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM जैसे दल वक्फ बोर्ड का समर्थन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वक्फ संपत्तियों को मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक भलाई के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए।
वक्फ बोर्ड का भविष्य और सुधार की मांग
वक्फ बोर्ड को लेकर विवाद बढ़ने के बाद सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन पर विचार कर रही है। वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की मांग उठ रही है ताकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर पारदर्शिता लाने और बाहरी निगरानी का प्रस्ताव दे सकती है। वक्फ बोर्ड भारत में मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों और धार्मिक स्थलों का प्रबंधन करने वाला एक महत्वपूर्ण संगठन है। हालांकि, हाल के वर्षों में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों ने इसकी विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। देश में वक्फ अधिनियम में संशोधन और पारदर्शिता लाने की मांग तेज हो रही है।
वक्फ बोर्ड से जुड़ी कानूनी पेचीदगियां
यदि वक्फ बोर्ड आपकी संपत्ति को अपनी घोषित कर दे, तो आप सीधे कोर्ट नहीं जा सकते। पहले आपको वक्फ बोर्ड में ही अपनी आपत्ति दर्ज करनी होगी। यदि बोर्ड का निर्णय आपके खिलाफ आता है, तब भी आप अदालत में अपील नहीं कर सकते। आपको वक्फ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाना होगा। वक्फ एक्ट की धारा 85 कहती है कि वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम होगा। और उसे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।
वक्फ बोर्ड की संपत्ति: आंकड़े और विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में वक्फ बोर्ड के पास लगभग 8 लाख एकड़ जमीन है।
2009 में यह आंकड़ा 4 लाख एकड़ था, जो अब दोगुना हो गया है।
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की अनुमानित कीमत लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
देश में रेलवे और रक्षा विभाग के बाद वक्फ बोर्ड तीसरा सबसे बड़ा भूमि स्वामी है।
देशभर में 32 राज्य वक्फ बोर्ड हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और बिहार में शिया वक्फ बोर्ड भी शामिल हैं।
वक्फ बोर्ड से जुड़ी प्रमुख समस्याएं (Major Problems Related To Waqf Board)
वक्फ बोर्ड के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कई जगह वक्फ संपत्तियों को गलत तरीके से निजी कंपनियों को लीज पर देने के मामले सामने आए हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल में मामला जाने के बाद व्यक्ति के पास हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार नहीं है। इससे कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। वक्फ बोर्ड पर कई स्थानों पर सरकारी जमीनों को अवैध रूप से वक्फ संपत्ति बताने के आरोप हैं। कई मामलों में वक्फ बोर्ड ने बिना किसी वैध दस्तावेज के संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया।
वक्फ बोर्ड में सुधार की मांग
वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण और सार्वजनिक रजिस्ट्रेशन आवश्यक है ताकि फर्जी दावों को रोका जा सके। वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार दिया जाना चाहिए। सरकार वक्फ संपत्तियों की स्वतंत्र जांच एजेंसी से ऑडिट कराने की योजना बना रही है। वक्फ बोर्ड वर्तमान में देशभर में विवाद का केंद्र बन गया है। 1995 के वक्फ अधिनियम ने इसे बेहद शक्तिशाली बना दिया, जिससे निजी संपत्तियों पर भी वक्फ बोर्ड द्वारा दावा जताए जाने की घटनाएं बढ़ गईं।
संपत्तियों के स्वामित्व विवाद में कानूनी प्रक्रिया जटिल और पक्षपातपूर्ण हो गई है। सरकार वक्फ बोर्ड में सुधार के लिए अधिनियम में संशोधन लेकर आ गई है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसे लोकसभा में दो अप्रैल और राज्य सभा में तीन अप्रैल को पेश किया जायेगा।