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Waqf Amendment Bill: राज्यसभा से भी पास हुआ वक्फ संशोधन बिल, अब राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी
Waqf Amendment Bill: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े।
Waqf Amendment Bill
Waqf Amendment Bill: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े। इससे पहले लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट डाले गए थे। दोनों सदनों में लंबी बहस के बाद बिल को पास किया गया और अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर यह कानून का रूप ले लेगा।
बिल पर राज्यसभा में हुई 14 घंटे की बहस
इस विधेयक पर राज्यसभा में 14 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को सदन में पेश करते हुए कहा कि यह संशोधन किसी भी मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि "वंस अ वक्फ, ऑलवेज अ वक्फ" की नीति को बरकरार रखा जाएगा और वक्फ की संपत्ति को किसी तरह से बदला या छुआ नहीं जाएगा।
विपक्षी दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इसमें कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को कमजोर करते हैं। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कटौती कर रही है और मौजूदा योजनाओं को बंद किया जा रहा है।
बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी
बिल पर चर्चा के दौरान कुछ राजनीतिक दलों का रुख अलग रहा। बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने सांसदों को अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की छूट दी थी। वहीं बीआरएस ने बिल का विरोध किया जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने व्हिप जारी नहीं किया। रिजिजू ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि शुरूआती ड्राफ्ट से लेकर आज के मसौदे में कई सुधार किए गए हैं और कई विपक्षी सुझावों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को बहुमत में लाने का कोई इरादा नहीं है और इस मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रांतियों का कोई आधार नहीं है।
अब जबकि दोनों सदनों से बिल पारित हो चुका है, इसे राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी के बाद यह कानून लागू हो जाएगा और वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और करोड़ों लोगों को लाभ होगा, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बता रहा है।