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मिथुन हो चुके सियासी पारी में बुरी तरह फेल, इसलिए छोड़नी पड़ी थी सांसदी

मिथुन चक्रवर्ती को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2014 में अपनी पार्टी टीएमसी की तरफ से राज्यसभा का सदस्य बनाया था मगर अपनी पहली पारी में मिथुन चक्रवर्ती बुरी तरह फेल साबित हुए थे।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 8 March 2021 5:06 AM GMT

मिथुन हो चुके सियासी पारी में बुरी तरह फेल, इसलिए छोड़नी पड़ी थी सांसदी
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत में पिछले कुछ समय से पहेली बने हुए मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने आखिरकार भाजपा का दामन थाम लिया। वैसे यह मिथुन चक्रवर्ती की पहली सियासी पारी नहीं है। इसके पहले वे उसी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, जिस पार्टी के खिलाफ अब उन्हें बंगाल में जंग लड़नी है।

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मिथुन चक्रवर्ती को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2014 में अपनी पार्टी टीएमसी की तरफ से राज्यसभा का सदस्य बनाया था मगर अपनी पहली पारी में मिथुन चक्रवर्ती बुरी तरह फेल साबित हुए थे। दो साल बाद ही शारदा घोटाले में नाम आने के बाद मिथुन ने राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। वैसे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर इस्तीफा देने की बात कही थी।

mithun chakraborty mithun chakraborty (PC: social media)

काफी दिनों से चल रही थी कयासबाजी

कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में रविवार को हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा से पहले मिथुन चक्रवर्ती को लेकर खूब कयासबाजी चल रही थी। हालांकि शनिवार रात भाजपा के महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय से उनकी मुलाकात के बाद तस्वीर बहुत कुछ साफ हो गई थी।

आखिरकार मिथुन दा ब्रिगेड ग्राउंड में पीएम मोदी की बड़ी जनसभा के मंच पर पहुंचे और पीएम मोदी ने भी अपने भाषण के दौरान मिथुन दा का प्रमुखता से जिक्र किया। पश्चिम बंगाल में मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा आइकन माना जाता रहा है। ऐसे में पीएम मोदी की ओर से उनका स्वागत और प्रमुखता से जिक्र स्वाभाविक ही माना जा सकता है।

खुद को बताया खतरनाक कोबरा सांप

प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भाजपा का झंडा थामने वाले मिथुन चक्रवर्ती ने मंच से हुंकार भरते हुए खुद को कोबरा सांप बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी हक छीनेगा तो मैं खड़ा हो जाऊंगा। ब्रिगेड ग्राउंड की जनसभा में भारी भीड़ से उत्साहित मिथुन ने कहा कि मैं जोलधरा सांप नहीं हूं, बेलबोरा सांप भी नहीं हूं। मैं असली कोबरा हूं। जिसको डसूंगा, उसका एक ही दंश में काम तमाम कर दूंगा।

लोगों की उम्मीदों के मुताबिक मिथुन ने अपनी फिल्मों के कई प्रसिद्ध डायलॉग्स भी सुनाए जिसमें उनका वह मशहूर डायलॉग भी शामिल था कि मारूंगा यहां, लाश गिरेगी श्मशान में।

अब पूरा होगा जीवन का सपना

काफी संख्या में बंगालियों के दिलों पर राज करने वाले मिथुन ने कहा कि मैंने जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना देखा था, लेकिन कभी ऐसे मंच पर रहने का सपना नहीं देखा था जिस पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद होंगे।

मैंने कभी इतनी बड़ी रैली का हिस्सा बनने का सपना नहीं देखा था। मैं 17 साल की उम्र से ही समाज के गरीब तबके की सेवा करने का सपना देखा करता था और अब मैं अपने सपने को पूरा करने में कामयाब होऊंगा।

शारदा घोटाले में आया था नाम

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब मिथुन चक्रवर्ती सियासी मैदान में कूदे हैं। 2011 में ममता बनर्जी के बंगाल की सत्ता पर कब्जा करने के बाद मिथुन चक्रवर्ती का बंगाल की राजनीति से जुड़ाव हो गया था। टीएमसी की ओर से उन्हें 2014 में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया, लेकिन कुछ समय बाद ही शारदा घोटाले में नाम आने के कारण मिथुन चक्रवर्ती की छवि को काफी धक्का लगा। मिथुन चक्रवर्ती बंगाल में शारदा घोटाला करने वाले समूह के ब्रांड एंबेसडर थे। इस घोटाले में टीएमसी के कई अन्य नेताओं का नाम भी सामने आया था।

इस कारण दिया था राज्यसभा से इस्तीफा

शारदा घोटाले के सिलसिले में मिथुन चक्रवर्ती से पूछताछ भी की गई थी। आरोप है कि शारदा समूह की ओर से मिथुन चक्रवर्ती को ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए दो करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था।

मिथुन ने 2015 में प्रवर्तन निदेशालय को 1.1 9 करोड़ रुपए चुकाए भी थे। इसके अगले साल 2016 में चक्रवर्ती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने की बात कही थी। राज्यसभा की कार्यवाही में भी मिथुन चक्रवर्ती सक्रिय नहीं रहा करते थे। राज्यसभा में उनका चेहरा भी बहुत कम दिखाई पड़ता था।

mithun chakraborty mithun chakraborty (PC: social media)

अब दूसरी सियासी पारी पर टिकीं नजरें

अपनी पहली सियासी पारी में बुरी तरह फेल साबित होने के बाद मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर सियासी मैदान में कूदे हैं। पिछले दिनों उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की थी और इसके बाद ही उनके भाजपा में आने की चर्चाएं फैली थीं।

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हालांकि मिथुन समय-समय पर इस बाबत अपनी सफाई देते रहे मगर आखिरकार उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी जनसभा में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब देखने वाली बात यह होगी कि अपनी इस दूसरी सियासी पारी में मिथुन चक्रवर्ती कहां तक कामयाब हो पाते हैं।

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