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कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो आखिर क्यों जाना चाहते हैं स्वर्ण मंदिर?

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amanBy aman

Published on 18 Feb 2018 11:21 AM GMT

कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो आखिर क्यों जाना चाहते हैं स्वर्ण मंदिर?
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नई दिल्ली: वैश्वीकरण के इस दौर में कोई भी देश किसी समुदाय विशेष को अछूता नहीं छोड़ सकता है। रंगभेदी नीतियां भी धीरे-धीरे बीते समय की बातें होती जा रही हैं। कनाडा और भारत के बीच बढ़ते और मजबूत होते रिश्तों का ही नतीजा है कि सपरिवार भारत के दौरे पर आए हुए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने दौरे के दौरान अब अमृतसर में स्वर्ण मंदिर जाने की तैयारी हैं। कनाडा के पीएम का स्वर्ण मंदिर जाना महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि कनाडा 1914 में हुई 'कामागाटामारू' त्रासदी के लिए भारतीयों से पहले ही अधिकारिक रूप से क्षमा मांग चुका है और अब स्वर्ण मंदिर जाना कहीं न कहीं उनकी भारत से रिश्तों में मिठास घोलने की ललक का नतीजा दिखाई दे रही है।

क्या थी कामागाटामारू त्रासदी?

कामागाटामारू भाप से चलने वाला समुद्री जहाज था। यह जहाज हांगकांग में रहने वाले बाबा मुरदित्त सिंह ने खरीदा था। 1914 में इस जहाज से पर सवार होकर पंजाब के 376 कामगार कनाडा गए थे, लेकिन वहां के नस्लीय आव्रजन कानूनों के कारण उन्हें वहां उतरने नहीं दिया गया। केवल 24 लोगों को उतार कर बाकी को वापस कर दिया गया। इस जहाज में 340 सिख, 24 मुसलमान और 12 हिन्दू थे। जब जहाज वापस भारत लौटा तो कोलकाता में बजबज घाट पर ब्रिटिश पुलिस फायरिंग कर दी। जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी।

पहले भी कनाडाई पीएम जाता चुके हैं दुख

इससे पहले 2006 में कनाडाई प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने भी कामागाटा मारू को देश के इतिहास का एक दुखद क्षण करार दिया था। हार्पर ने कहा था, कि 'किसी भी अन्य देश की तरह हमारे देश में भी कमियां हैं। मैं कहना चाहता हूं कि कनाडा की सरकार उस दुखद घटना को स्वीकार करती है।' 20 मई, 2016 को प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी संसद में इस घटना के लिए आधिकारिक रूप से माफ़ी मांगी थी।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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