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सेना के लिए वरदान अटल टनल: अब आसान होगी ये चींजे, जानें इससे जुड़ीं खास बातें

हिमाचल प्रदेश में मनाली से लेह को जोड़ने वाली दुनिया की सबसे लंबी रोड सुरंग यानी अटल टनल (Atal Tunnel) बनकर तैयार हो गई है। इसे बनाने में करीब दस साल का वक्त लगा है। अब इस सुरंग से ना केवल आम लोगों को बल्कि फौजियों को भी काफी फायदा मिलने वाला है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 1 Oct 2020 10:44 AM GMT

सेना के लिए वरदान अटल टनल: अब आसान होगी ये चींजे, जानें इससे जुड़ीं खास बातें
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सेना के लिए वरदान है Atal Tunnel
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में मनाली से लेह को जोड़ने वाली दुनिया की सबसे लंबी रोड सुरंग बनकर तैयार हो गई है। इस सुरंग का नाम अटल टनल (Atal Tunnel) है। यह सुरंग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इन टनल के निर्माण में करीब साढ़े तीन से चार हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 10 हजार फीट पर स्थित इस टनल को बनाने में करीब दस साल का वक्त लगा है। इसके बनने से सबसे ज्यादा फायदा लद्दाख में तैनात भारतीय जवानों को मिलेगा। क्योंकि इसके चलते सर्दियों में भी हथियार और रसद की आपूर्ति आसानी से हो सकेगी।

दुनिया की सबसे लंबी हाइवे टनल

अटल सुरंग लाहौल के निवासियों के लिए एक वरदान होगा, जो भारी बर्फबारी की वजह से लगभग छह महीने तक देश के बाकी हिस्सों से कटा रहता है। यह महत्वाकांक्षी अटल सुरंग, लेह और लद्दाख के आगे के क्षेत्रों को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह अटल टनल दुनिया की सबसे लंबी हाइवे टनल है। इसमें हर 60 मीटर की दूरी पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही इस टनल के अंदर 500 मीटर की दूरी पर इमर्जेंसी एग्जिट भी बनाए गए हैं।

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सुरंग तैयार करने में आई काफी परेशानियां

प्रधान मंत्री अटल बिहारी वायपेयी द्वारा तीन जून 2000 को उस परियोजना की घोषणा की गई थी। वहीं इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन (BRO ) को सौंपी गई थी। इसे बनाने में BRO के इंजीनियरों और कर्मचारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। क्योंकि सर्दियों में यहां पर काम करना काफी मुश्किल हो जाता था। बता दें कि इस सुरंग को बनाने के लिए 8 लाख क्यूबिक मीटर पत्थर और मिट्टी निकाली गई।

लेह तक जाने में होगी समय की बचत

वहीं इस सुरंग का निर्माण करते वक्त कई चीजों का काफी ध्यान रखा गया है। यहां पर सीसीटीवी तो लगाए ही गए हैं, साथ ही किसी भी तरह की बुरी घटना से बचने के लिए फाइटरक हाइड्रेंट लगाए गए हैं। इसकी चौड़ाई 10.5 मीटर है. इसमें दोनों ओर एक-एक मीटर के फुटपाथ भी बनाए गए हैं। मनाली से लेह तक जाने में ये सुरंग काफी समय बचाएगी। इसके जरिए मनाली से लेह के बीच 46 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है। इस टनल के जरिए पहाड़ों पर लगने वाले जाम से बचा जा सकेगा।



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रोजाना गुजर सकेंगे 5 हजार वाहन

अटल टनल प्रोजेक्ट की लागत 2010 में 1,700 रुपये से बढ़कर सितंबर 2020 तक 3,200 करोड़ रुपये हो गई। यह सुरंग करीब 8.8 किलोमीटर लंबी है और दस मीटर चौड़ी है। इस टनल से 80 किमी प्रतिघंटे की गति से रोजाना 5000 वाहन गुजर सकते हैं। एक बार में इसके अंदर 3000 कारें या 1500 ट्रक एक साथ निकल सकते हैं। अटल टनल के अंदर अत्याधुनिक ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मेथड का उपयोग किया गया है। साथ ही वेंटिलेशन सिस्टम भी ऑस्ट्रेलियाई तकनीक पर आधारित है।

DRDO ने भी डिजाइन बनाने में की मदद

इस टनल की डिजाइन बनाने में DRDO ने भी मदद की है, जिससे बर्फ और हिमस्खलन से इस पर कोई असर न पड़े। टनल के अंदर हर 200 मीटर की दूरी पर एक फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था की गई है, जिससे आग लगने की स्थिति में नियंत्रण पाया जा सके।



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