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HC: खेल के बीच नहीं बदल सकते नियम, CBSE मॉडरेशन पॉलिसी रद्द करने पर रोक

अदालत ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि सीबीएसई अपनी घोषित नीति का पालन करेगी, इसमें मॉडरेशन पालिसी भी शामिल है जो उस वक्त प्रचलन में थी जब बच्चों ने परीक्षा दी थी।"

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zafarBy zafar

Published on 23 May 2017 9:00 PM GMT

HC: खेल के बीच नहीं बदल सकते नियम, CBSE मॉडरेशन पॉलिसी रद्द करने पर रोक
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नई दिल्ली: कक्षा 10वीं व 12वीं की परीक्षा में उपस्थित हुए छात्रों को भारी राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह मॉडरेशन पालिसी को समाप्त करने के अपने फैसले को इस साल लागू नहीं करे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की खंडपीठ ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा देने के बाद मॉडरेशन नीति को खत्म करने का फैसला किया है।

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खेल के बीच नहीं बदल सकते नियम

पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, "यह छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को पूरी तरह से बदल सकता है। नियम खेल के शुरू होने के बाद नहीं बदला जा सकता।"

अदालत ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि सीबीएसई अपनी घोषित नीति का पालन करेगी, इसमें मॉडरेशन पालिसी भी शामिल है जो उस वक्त प्रचलन में थी जब बच्चों ने परीक्षा दी थी।"

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अदालत का यह निर्देश एक जनहित याचिका पर आया है जिसमें यह तर्क दिया गया कि यह नीति इस साल नहीं खत्म होनी चाहिए क्योंकि इससे कक्षा 12वीं के छात्रों पर असर पड़ेगा जिन्होंने विदेश में दाखिले के लिए आवेदन किया है।

बड़ी राहत

यह याचिका एक अभिभावक व वकील द्वारा दायर की गई थी जिसमें कहा गया कि यह नीति इस साल की परीक्षा के बाद अधिसूचना के द्वारा बदली गई और इसलिए इसका छात्रों पर विपरीत असर पड़ेगा।अंकों का मॉडरेशन मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए किया जाता है जिसमें विभिन्न परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों को एक मानक के अनुरूप किया जाता है।

--आईएएनएस

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