इंदौर: जब्त हुआ ऐसा खतरनाक केमिकल, एकसाथ 50 लाख लोगों की ले सकता है जान

नई दिल्ली: राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। डीआरआई ने रक्षा अनुसंधान और विकास के वैज्ञानिकों की टीम के साथ मिलकर इंदौर में एक हफ्ते लंबे आपरेशन के बाद एक गैर कानूनी लैबोरेटरी पर छापा मारकर देश के अंदर चल रही एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। छापेमारी के दौरान मौके से नौ किलो जानलेवा सिंथेटिक आपिओइड फेंटेनिल बरामद किया गया है। जिससे एक बार में करीब पचास लाख लोगों को जान से मारा जा सकता है। इस लेबोरेटरी को एक स्थानीय व्यापारी और एक अमेरिका से घृणा करने वाला पीएचडी स्कालर केमिस्ट चला रहे थे।

नागरिकों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
देश में पहली बार इतनी बड़ी बरामदगी से दिल्ली में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं क्योंकि यदि रासायनिक युद्ध में हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाए तो इस केमिकल से बड़े पैमाने पर जनसंहार किया जा सकता है। इसने अलीस्टेयर मैकलिन के थ्रिलर सतान बग की याद ताजा कर दी है। इस संबंध में एक मैक्सिकन नागरिक भी गिरफ्तार किया गया है।

किसी भी केंद्रीय एजेंसी के लिए अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी- डीआरआई
डीआरआई के डीजीपी डीपी दास ने कहा कि फेंटेनिल में हेरोइन से 50 गुना अधिक ऐसे तत्व होते हैं जो सूंघने पर भी बेदम कर सकते हैं। किसी भी केंद्रीय एजेंसी की ओर से ये अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है। ये एक लैंडमार्क है कि डीआरआई देश में इस खतरनाक ड्रग को तैयार करने से रोकने में सफल रहा है। इस बरामदगी ने वैज्ञानिकों को हैरानी में डाल दिया है। क्योंकि इस ड्रग को तैयार करने के लिए विशेष रूप से दक्ष वैज्ञानिकों और उच्च स्तरीय लैबोरेटरी की जरूरत पड़ती है। इस दवा का अंश बेहोश करने और दर्द से राहत देने में इस्तेमाल किया जाता है।

दो मिग्रा दवा सुला सकती है मौत की नींद
यह दवा शरीर में खाल के जरिये या गंध के जरिये पहुंच कर बहुत तेजी से काम करती है। दो मिग्रा दवा भी किसी व्यक्ति को मारने के लिए पर्याप्त है।
पिछले हफ्ते डीआरडीओ की लेबोरेटरी डीआरडीई से जैविक और रासायनिक हथियारों से निपटने में सक्षम और अनुभवी वैज्ञानिकों की एक टीम बुलाई गई थी ताकि वह इस खतरनाक रसायन की तीव्रता की पुष्टि कर सकें।

मारफीन से 100 गुना ज्यादा असरदार
यह दवा मारफीन से 100 गुना ज्यादा असरदार होती है। बरामद केमिकल की कीमत 110 करोड़ है। इसका इस्तेमाल नशे के तस्कर अमेरिका भेजने के लिए करते हैं। जहां इसमें अन्य केमिकल मिलाकर नशे की गोलियां तैयार करके उन्हें महंगी कीमत में अमेरिका की गलियों में बेचा जाता है।

 2016 में इस रसायन से बीस हजार लोगों की मौत
सूत्रों का कहना है कि इस रसायन के ओवरडोज से 2016 में अमेरिका में बीस हजार लोगों की मौत हो गई थी। एजेंसी का कहना है कि आम तौर पर इस रसायन से तैयार गोलियों को नशेड़ियों के बीच अपाचे, चाइना गर्ल, चाइना टाउन कहकर जाना जाता है। चाइना में नशे के सौदागरों की कमर टूटने के बाद इन दिनों मैक्सिको से नशे की खेप आ रही है। एजेंसियां अभी इस बात की जांच कर रही हैं कि बरामद खेप का उद्देश्य नशे का कारोबार था या रासायनिक युद्ध की तैयारी।

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