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पूर्व PM मनमोहन सिंह बोले- आर्थिक सुधार की प्रक्रिया अब भी अधूरी है

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amanBy aman

Published on 5 Oct 2017 12:24 AM GMT

पूर्व PM मनमोहन सिंह बोले- आर्थिक सुधार की प्रक्रिया अब भी अधूरी है
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बेंगलुरु: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा है, कि 'आर्थिक सुधार की जो प्रक्रिया उन्होंने शुरू की थी, वो अब भी अधूरी है। आज देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों को स्वरूप देने के लिए नई सोच की जरूरत है।' उन्होंने कहा, कि 'हमें ऐसी पॉलिसी की जरूरत है जिसके तहत आर्थिक विकास की ऊंची दरें हासिल करने के साथ आर्थिक असमानता को काबू करने पर ध्यान दिया जाए। जिन आर्थिक सुधारों से वह जुड़े थे उनका मकसद सामाजिक और आर्थिक सुविधाओं से वंचित लोगों के लिए नए मौके पैदा करना था।'

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पूर्व पीएम ने कहा, कि 'यह प्रक्रिया अब भी अधूरी है और अब हमें इसके लिए नई सोच की आवश्यकता है। विकास के लिए योजना तैयार करने की नीति और योजना आयोग की परिकल्पना इस उद्देश्य से की गई थी कि अर्थव्यवस्था में तरक्की हो लेकिन असमानता न बढ़े।'

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आर्थिक असमानता दूर करने की प्रक्रिया जारी है

मनमोहन सिंह ने ये बातें बेंगलुरु में डॉ. बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स के अकादमिक सत्र का उद्घाटन करते हुए कही। बोले, 'हमने आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए शुरू की थी। आर्थिक विकास दर बढ़ी है लेकिन आर्थिक असमानता दूर करने की प्रक्रिया जारी है।'

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रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय पर जोर

मनमोहन सिंह ने कहा, कि 'आर्थिक और सामाजिक नीतियों का आकार तय करने में हमें नई सोच अपनानी होगी। नई नीतियां ऐसी होनी चाहिए जिनमें तेज आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण जैसी चीजें शामिल हों। ये नीतियां सामाजिक न्याय और समानता पैदा करने वाली होनी चाहिए।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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