×

मध्य प्रदेश चुनाव भाजपा या कांग्रेस किसके सिर सजेगा जीत का ताज

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 18 Nov 2018 3:50 PM GMT

मध्य प्रदेश चुनाव भाजपा या कांग्रेस किसके सिर सजेगा जीत का ताज
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo

भोपाल : मध्य प्रदेश में यह देखना रोचक होगा कि क्या भाजपा 2018 में भी राज्य में जीत का इतिहास रचने में सफल हो पाती है या 15 साल के बाद कांग्रेस वापसी करती है। वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। राज्य के लोग नई सरकार बनाने के लिए 230 सीटों पर वोट डालेंगे। चुनाव इस महीने के अंत में होने हैं।

भाजपा तमाम घोटालों के आरोपों को लेकर निशाने पर है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का आरोप है कि राज्य सरकार ने संघ को नियमों का उल्लंघन कर 500 करोड़ की जमीन एलौट कर दी है। वह यहीं नहीं रुकते वे भाजपा पर व्यापम, अवैध बालू की खुदाई, 2500 करोड़ सिंहस्थ घोटाले, बांध और तालाब घोटाले, मिड डे मील घोटाले आदि के आरोप लगाते हैं। हम इन घोटालों को देखते हैं और भाजपा पर भविष्य में इसके प्रभाव का आंकलन करते हैं।

ये भी देखें : राजस्थान चुनाव : कांग्रेस के मुस्लिम नेता ने पार्टी छोड़ी, बीजेपी के लिए आई खुशखबरी

ये भी देखें : भीमा-कोरेगांव हिंसा: कोर्ट ने वरवरा राव को भेजा न्यायिक हिरासत में

ये भी देखें :राजस्थान चुनाव: ये लगा जोर का झटका, बीजेपी सांसद हरीश मीणा कांग्रेस में शामिल

ये भी देखें :राजस्थान इलेक्शन : बीजेपी MLA ने कहा, मुस्लिम होने की वजह से नहीं मिला टिकट

ये भी देखें :इलेक्शन 2018 : राजस्थान में टिकट कटा तो मंत्री ने दिया पार्टी से इस्तीफा

शुरुआत सबसे बड़े व्यापम घोटाले से करते हैं। व्यापम प्रवेश परीक्षा, दाखिले और प्रवेश का घोटाला था। जो कि मध्य प्रदेश में 2013 में हुआ। इस घोटाले में राजनेता, वरिष्ठ कनिष्ठ अधिकारी, कारोबारी सुनियोजित ढंग से शामिल थे जिसमें अधिकारियों को घूस देकर पेपर लिखवाने, बैठने की व्यवस्था को प्रभावित करने और जाली आनसरशीट की आपूर्ति करवाना शामिल था।

अब बालू घोटाले पर आते हैं। राज्य सरकार ने नर्मदा प्लान में 2012 में बालू के खनन को प्रतिबंधित कर दिया था जबकि तीस फीसदी बालू खनन ही वैध होता था। केवल वैध खनन को ही बैन कर दिया गया। लेकिन 70 फीसदी अवैध खनन जारी रहा। बालू माफिया कानून और नियमों को अपने अनुसार ढाल लेते हैं। इसमें चौहान का भतीजा भी शामिल रहा। इससे वैध डीलरों के लिए संकट खड़ा हुआ।

1500 करोड़ का सिमहस्त घोटाला उस समय हुआ जब राज्य सरकार सिमहस्त कुंभ का आयोजन उज्जैन में 2016 में करा रही थी। विपक्ष के उपनेता बाला बच्चन ने इस घोटाले पर हुए खर्च के संबंध में पेश अपनी रिपोर्ट मई 2016 में दी थी। श्री यादव कहते हैं कि सवालों के जवाब में राज्य सरकार ने लोकसभा को सूचित किया है कि उज्जैन सिमहस्त में 4471 करोड़ से अधिक खर्च किये गए।

अंत में मध्य प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर बात करते हैं। मध्य प्रदेश में 26 लाख से अधिक किसानों ने सहकारी बैंकों से 13 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया था। जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 11 हजार किसानों ने पिछले नौ सालों में आत्महत्या की है। यह आंकड़े हर साल बढ़ते जा रहे हैं।जबकि मध्य प्रदेश में 20 प्रतिशत कृषि विकास दर पिछले कुछ सालों में दर्ज की गई है। यह एक विश्व रिकार्ड लग सकता है लेकिन किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के हालात के चलते ये आंकड़े बेकार हो जात हैं।

हालांकि चौहान सरकार कह रही है कि राज्य में विरोध की कोई लहर नहीं है लेकिन हाल के नगरीय चुनाव के नतीजे चौहान सरकार के माथे पर बल डालने के लिए काफी हैं। रागोगढ़ नगर निकाय के चुनाव में 24 सीटों में से कांग्रेस 20 सीटें ले गई थी। जबकि भाजपा को केवल चार मिली थीं। चित्रकूट में कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी 14133 मतों से जीती थीं, पिछले 14 सालों में पार्टी की यह सबसे बड़े अंतर से जीत है। राज्य में 14 सालों से शासन कर रही भाजपा चित्रकूट सीट केवल एक बार 2008 में जीती थी वह भी 722 मतों के अंतर से। 2013 में भाजपा इस सीट को कांग्रेस से 10970 मतों के अंतर से हारी थी।

मप्र नगर परिषद चुनाव 2018 के नतीजे 20 जनवरी 2018 को घोषित हुए थे। इसमें कुल 20 नगर निकायों के चुनाव व दस जिलों में उपचुनाव हुए थे। हालांकि भाजपा अपनी 13 सीटें बचाने में कामयाब रही थी और कांग्रेस सात सीटों पर काबिज हुई थी कांग्रेस की दिन प्रति दिन बढ़ती ताकत को देखते हुए यह नतीजे भाजपा के लिए खतरे की घंटी थे।

शिवराज सिंह चौहान को अब कांग्रेस के खतरे को समझना चाहिए। लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की एक नई शुरुआत हो चुकी है। कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया युवाओं में खासा लोकप्रिय हैं। अरुण यादव भाजपा सरकार को निशाने पर लेने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। अजय सिंह का महाकौशल बघेलखंड और बुंदेलखंड में खासा प्रभाव है। इन नेताओं की एकजुटता ही चुनाव में कांग्रेस की जीत की कुंजी होगी।

भाजपा हिंदुत्व और हिंदू पार्टी के रूप में जानी जाती है। जनसंख्या का विभाजन भाजपा को विजयी बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। बहुसंख्य हिंदू आबादी के चलते ही वह साल दर साल जीतती चली आ रही है।

राज्य में 2017 के आर्थिक सर्वे के अनुसार राज्य में 14.1 लाख बेरोजगार हैं जिसमें 12.9 लाख शिक्षित हैं। 2017 में शिक्षित बेरोजगारों का प्रतिशत 2015 के 79.60 से बढ़कर 85.74 हो गया है। 2016 और 2018 का सूखा ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है।

मध्य प्रदेश मध्य भारत का एक राज्य है। भौगोलिक स्थिति के चलते इसे भारत का दिल भी कहा जाता है। 1956 में यह राज्य बना था। इस राज्य की राजधानी भोपाल है जो कि मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है। राज्य में करीब 50 जिले हैं। राज्य की आबादी करीब सात करोड़ बीस लाख है। साक्षरता में मध्य प्रदेश का आठवां स्थान है यहां साक्षरता दर 76.5 प्रतिशत है। राज्य की आधिकारिक भाषा हिंदी है।

राज्य की वर्तमान समय में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल हैं और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है। जो कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। मध्य प्रदेश से संसद में 40 सदस्य जाते हैं। जिसमें 29 लोकसभा और 11 राज्य सभा में जाते हैं। राज्य में भाजपा और कांग्रेस दो मुख्य पार्टियां हैं या यों कहें राज्य में दो दलीय प्रणाली है। हाल के चुनावों में राज्य में क्षेत्रीय दलों को अधिक सफलता नहीं मिलती नहीं दिखी है। नवंबर 2008 में राज्य में हुए चुनाव में भाजपा ने 143 सीटों पर सफलता पायी थी जबकि पराजित होने वाली कांग्रेस को 71 सीटों से संतोष करना पड़ा था। 2013 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को मात्र आठ सीटें मिली थीं।

2013 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा आठ दिसंबर को हुई थी। इसमें भाजपा ने कांग्रेस को तीसरी बार हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह पराजय हुई थी और 230 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को मुश्किल से 58 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि भाजपा को 165 सीटों पर कामयाबी मिली थी और शेष सात सीटें अन्य दलों के खाते में गई थीं। राज्य में भाजपा की जीत की हैट्रिक बनाने वाले शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे। इससे वह नरेंद्र मोदी की कतार में शामिल हो गए थे जिन्होंने ऐसा ही रिकार्ड गुजरात में बनाया था।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण मुख्यमंत्री पद के दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव, अजय सिंह, कमलनाथ हैं।नतीजे बताते हैं कि मध्य प्रदेश में कोई वर्तमान शासन विरोधी लहर काम नहीं कर रही है। इसके अलावा चौहान की सफलता में तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीद्वार नरेंद्र मोदी के राज्य में प्रचार का भी हाथ रहा।

1956 में गठित इस राज्य को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल, महाकौशल और मध्य प्रदेश को मिलाकर बनाया गया था। पहली राज्य विधानसभा का कार्यकाल 1 नवंबर 1956 से 5 मार्च 1957 तक रहा। राज्य के पुनर्गठन के बाद पहले चुनाव 1957 में हुए। इस राज्य की विधानसभा को मध्य प्रदेश विधानसभा के रूप में जाना जाता है। इस राज्य से राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिनिधित्व रहा है। यहां नियमित चुनाव होते रहे हैं। वर्तमान में राज्य विधानसभा के स्पीकर सीताराम शर्मा हैं। जो कि भाजपा विधायक हैं। वर्तमान विधानसभा 5 दिसंबर 2013 को गठित हुई थी।

राम केवी

राम केवी

Next Story