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Astonomical Knowledge Heritage: प्राचीन खगोलशास्त्री पहले ही जानते थे, ऊपर अंतरिक्ष में क्या हो रहा है, आइए जानते हैं भारत की खगोलीय ज्ञान की विरासत को

Development of Ancient Indian Astronomy: भारत में खगोलशास्त्र का विकास वेदों के समय से ही देखा जा सकता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ब्रह्मांड की संरचना, ग्रहों की गति, सूर्य और चंद्रमा के परिक्रमण और नक्षत्रों की स्थिति का उल्लेख मिलता है।

Akshita Pidiha
Written By Akshita Pidiha
Published on: 2 April 2025 2:16 PM IST
Astonomical Knowledge Heritage: प्राचीन खगोलशास्त्री पहले ही जानते थे, ऊपर अंतरिक्ष में क्या हो रहा है, आइए जानते हैं भारत की खगोलीय ज्ञान की विरासत को
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Astonomical Knowledge Heritage (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Astonomical Knowledge Heritage: भारत की खगोलीय ज्ञान विरासत अत्यंत समृद्ध और प्राचीन रही है। हजारों वर्षों से भारतीय खगोलविदों ने न केवल ग्रहों और नक्षत्रों की गतिविधियों को समझने में योगदान दिया, बल्कि उन्होंने गणित और ज्योतिष से संबंधित महत्वपूर्ण सिद्धांत भी विकसित किए। भारतीय खगोलविदों (Indian Astronomers) के कार्य न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में वैज्ञानिक क्रांति के लिए आधारशिला बने। इस लेख में हम भारत के खगोलीय ज्ञान की विरासत का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्र का विकास (Development of Ancient Indian Astronomy)

भारत में खगोलशास्त्र का विकास वेदों के समय से ही देखा जा सकता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ब्रह्मांड की संरचना, ग्रहों की गति, सूर्य और चंद्रमा के परिक्रमण और नक्षत्रों की स्थिति का उल्लेख मिलता है।

1. वेदों में खगोलशास्त्र

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और खगोलीय घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। खासकर वेदों में पंचांग गणना, ग्रहों की चाल और समय मापन के बारे में गहन अध्ययन किया गया।

2. वेदांग ज्योतिष

वेदांग ज्योतिष भारतीय ज्योतिष और खगोलशास्त्र का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। इसमें खगोलीय पिंडों की गति, ऋतुओं का निर्धारण और पंचांग गणना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। वेदांग ज्योतिष दो भागों में विभाजित है:-

निरुक्त: इसमें नक्षत्रों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है।

कल्प: इसमें धार्मिक अनुष्ठानों और कालगणना से संबंधित ज्ञान दिया गया है।

प्रसिद्ध भारतीय खगोलविद और उनके योगदान

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

भारत में कई महान खगोलविद (Great Indian Astronomer) हुए, जिन्होंने ब्रह्मांड और ग्रहों की चाल को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1. आर्यभट्ट (476 ई.)

आर्यभट्ट भारत के सबसे प्रसिद्ध खगोलविदों में से एक थे। उन्होंने अपनी पुस्तक 'आर्यभटीय' में खगोलशास्त्र और गणित के कई महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए। उनके प्रमुख योगदान इस प्रकार हैं:

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।

ग्रहों की गति और कक्षा का वर्णन।

सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक सिद्धांत।

पाई (π) का सटीक मान (3.1416)।

2. वराहमिहिर (505-587 ई.)

वराहमिहिर ने 'पंचसिद्धांतिका' और 'बृहतसंहिता' जैसी महत्वपूर्ण खगोलीय पुस्तकें लिखीं। उनके प्रमुख योगदान:-

ग्रहों और नक्षत्रों की गति का अध्ययन।

नक्षत्रों और ग्रहों के प्रभाव का वर्णन।

ज्योतिष और मौसम विज्ञान का समन्वय।

3. ब्रह्मगुप्त (598-668 ई.)

ब्रह्मगुप्त ने अपनी पुस्तक 'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' में खगोलशास्त्र से संबंधित कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उनके प्रमुख योगदान:-

ग्रहों और नक्षत्रों की सटीक गणना।

शून्य की खोज और गणितीय समीकरणों का विकास।

सूर्य और चंद्र ग्रहण की भविष्यवाणी।

4. भास्कराचार्य (1114-1185 ई.)

भास्कराचार्य ने 'सिद्धांत शिरोमणि' नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें उन्होंने खगोलशास्त्र और गणित के कई महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए। उनके प्रमुख योगदान:

पृथ्वी और ग्रहों की गति की सटीक गणना।

गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की चर्चा।

खगोलीय घटनाओं की गणना।

भारतीय खगोलशास्त्र और आधुनिक विज्ञान (Indian Astronomy and Modern Science)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

भारत के खगोलविदों द्वारा किए गए कार्य आधुनिक खगोलशास्त्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। आधुनिक खगोलविद जैसे कोपरनिकस, केपलर और न्यूटन ने जिन खगोलीय सिद्धांतों को विकसित किया, उनके कई आधार भारतीय खगोलविदों की प्राचीन गणनाओं में देखे जा सकते हैं।

1. पृथ्वी की धुरी पर घूर्णन

आर्यभट्ट ने सबसे पहले यह बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जबकि पश्चिमी वैज्ञानिकों ने इसे सैकड़ों वर्षों बाद सिद्ध किया।

2. ग्रहों की गति और कक्षा

ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर के कार्यों में ग्रहों की गति से संबंधित गणनाएँ पाई जाती हैं, जो आधुनिक खगोलशास्त्र से मेल खाती हैं।

3. ग्रहण की भविष्यवाणी

भारतीय खगोलविदों ने गणितीय सिद्धांतों का उपयोग करके सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की सटीक भविष्यवाणी करना संभव बनाया।

भारतीय खगोलशास्त्र की विरासत (Legacy of Indian Astronomy)

भारतीय खगोलशास्त्र ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है। आज भी कई वैज्ञानिक सिद्धांतों की जड़ें भारतीय खगोलविदों के कार्यों में मिलती हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा का यह योगदान न केवल भारत के लिए गर्व की बात है, बल्कि समूचे विश्व के वैज्ञानिक विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इसरो और अंतरिक्ष कार्यक्रम

भारत ने इसरो (ISRO) के माध्यम से चंद्रयान, मंगलयान और अन्य अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जो भारतीय खगोलशास्त्र की विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

भारत की खगोलीय ज्ञान विरासत अत्यंत समृद्ध रही है। प्राचीन खगोलविदों ने ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में जो योगदान दिया, वह आधुनिक विज्ञान की नींव बना। भारतीय खगोलशास्त्र न केवल गणित और खगोलीय गणनाओं में उन्नत था, बल्कि इसने आधुनिक खगोलशास्त्र के लिए भी मजबूत आधार तैयार किया। आज भी भारत इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और वैज्ञानिक अनुसंधान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

भारत के 8 सबसे खूबसूरत खगोलीय वेधशालाएं (8 Most Beautiful Astronomical Observatories in India)

भारत में खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा रही है, जिसका प्रमाण प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक स्थापित वेधशालाओं में मिलता है। ये वेधशालाएँ न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि अपनी स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी आकर्षण का केंद्र हैं। आइए जानते हैं भारत की 8 सबसे खूबसूरत खगोलीय वेधशालाओं के बारे में-

हनले वेधशाला, लद्दाख

लद्दाख के मनमोहक परिदृश्यों के बीच, समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory) विश्व की दूसरी सबसे ऊँची ऑप्टिकल वेधशाला है। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics) द्वारा संचालित, यह वेधशाला 2-मीटर हिमालयी चंद्र दूरबीन (Himalayan Chandra Telescope) की मेजबानी करती है। यहाँ गामा-रे विस्फोट (Gamma-ray bursts), सुपरनोवा (Supernovae), और ब्लैक होल (Black Holes) जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण शोध किए जाते हैं। इसके अलावा, यहाँ से दिखाई देने वाले पर्वतीय दृश्य खगोल विज्ञान और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।

वैणु बाबू वेधशाला, कवलूर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के शांत वातावरण में स्थित वैणु बाबू वेधशाला (Vainu Bappu Observatory) भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान का एक प्रमुख केंद्र है। इस वेधशाला में कई दूरबीनें मौजूद हैं, जिनमें 2.3-मीटर वैणु बाबू टेलीस्कोप, जो एक समय एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन थी, विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह वेधशाला सप्ताहांत पर जनता के लिए खुली रहती है, जिससे लोग ग्रहों और तारों को टेलीस्कोप के माध्यम से देख सकते हैं और खगोल विज्ञान के रहस्यों से जुड़ सकते हैं।

उदयपुर सौर वेधशाला, राजस्थान

फतेह सागर झील, उदयपुर में एक द्वीप पर स्थित उदयपुर सौर वेधशाला (Udaipur Solar Observatory) सूर्य के अध्ययन के लिए समर्पित है। 1975 में स्थापित, इस वेधशाला का संचालन भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory) द्वारा किया जाता है। यहाँ मल्टी-एप्लिकेशन सोलर टेलीस्कोप (Multi-Application Solar Telescope) जैसी आधुनिक सुविधाएँ हैं, जो सूर्य की सतह और वातावरण की उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियाँ कैप्चर करती हैं। इसके अलावा, इस वेधशाला का द्वीप पर स्थित होना इसे वायुमंडलीय अशांति से बचाता है, जिससे सौर अवलोकन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

आर्यभट्ट खगोलीय अनुसंधान संस्थान, नैनीताल

1,950 मीटर की ऊँचाई पर नैनीताल की मनोरम मैनोरा चोटी (Manora Peak) पर स्थित आर्यभट्ट खगोलीय अनुसंधान संस्थान (Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences - ARIES) का नाम प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के सम्मान में रखा गया है। यह वेधशाला 3.6-मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप (Devasthal Optical Telescope) और 1.3-मीटर देवस्थल फास्ट ऑप्टिकल टेलीस्कोप जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। यहाँ सार्वजनिक आउटरीच कार्यक्रमों के तहत रात के आकाश को देखने और खगोल-फोटोग्राफी के अवसर मिलते हैं, जिससे विज्ञान और आम जनता के बीच संवाद को बढ़ावा मिलता है।

जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT), खोडद, महाराष्ट्र

खोडद गाँव, महाराष्ट्र के पास स्थित जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (Giant Metrewave Radio Telescope - GMRT) विश्व की सबसे बड़ी और सबसे संवेदनशील रेडियो वेधशालाओं में से एक है। यहाँ 30 एंटीना मौजूद हैं, जिनमें से प्रत्येक का व्यास 45 मीटर है, और ये कुल 25 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए हैं। इसे राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र (National Centre for Radio Astrophysics - NCRA) द्वारा संचालित किया जाता है। यह वेधशाला आम जनता के लिए खुली रहती है, जहाँ लोग रेडियो खगोल विज्ञान की दुनिया को करीब से देख सकते हैं और विशाल एंटेना को काम करते हुए देख सकते हैं।

एम. पी. बिड़ला तारामंडल और वेधशाला, कोलकाता

1963 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्घाटित, एम. पी. बिड़ला तारामंडल और वेधशाला (M. P. Birla Planetarium and Observatory) खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग समान है। यहाँ 15-इंच सेलेस्ट्रॉन टेलीस्कोप मौजूद है, जिससे आम लोग चंद्रमा, ग्रह, तारे और धूमकेतु को देख सकते हैं। इसके अलावा, यह वेधशाला सौर दूरबीन, खगोलीय घटनाओं पर कार्यशालाएँ और विज्ञान प्रदर्शनियाँ भी आयोजित करती है, जिससे खगोल विज्ञान की शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।

जंतर मंतर, जयपुर

महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 18वीं शताब्दी में निर्मित, जंतर मंतर (Jantar Mantar) पारंपरिक वेधशालाओं से कहीं अधिक है। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। यहाँ 19 पत्थर और पीतल से निर्मित यंत्र मौजूद हैं, जिनका उपयोग समय मापन, ग्रहों की स्थिति ज्ञात करने और ग्रहण की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता था। इस वेधशाला का सबसे प्रमुख उपकरण सम्राट यंत्र (Samrat Yantra) है, जो 27 मीटर ऊँचा दुनिया का सबसे बड़ा सूर्य घड़ी (Sundial) है। यह वेधशाला भारत की समृद्ध खगोल विज्ञान परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण है।

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics - IIA), बैंगलोर, भारत के प्रमुख खगोलीय अनुसंधान केंद्रों में से एक है। 1786 में ब्रिटिश खगोलशास्त्री विलियम पेट्री (William Petrie) द्वारा स्थापित इस वेधशाला में भारत की सबसे पुरानी कार्यशील दूरबीन, एक 20-सेमी अपवर्तन दूरबीन (Refractor Telescope) और भारत की सबसे बड़ी 100-सेमी परावर्तन दूरबीन (Reflector Telescope) स्थित है। यहाँ एक संग्रहालय भी मौजूद है, जो भारत में खगोल विज्ञान के विकास को दर्शाता है। इसके अलावा, यहाँ नियमित रूप से आकाश दर्शन कार्यक्रम (Sky Shows) और खगोल विज्ञान पर व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं, जिससे वैज्ञानिक समुदाय और आम जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित किया जाता है।

भारत की ये वेधशालाएँ खगोल विज्ञान में अनुसंधान के लिए तो महत्वपूर्ण हैं ही, साथ ही अपनी स्थापत्य सुंदरता और वैज्ञानिक योगदान के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यदि आपको ब्रह्मांड और खगोल विज्ञान में रुचि है, तो इनमें से कुछ वेधशालाओं की यात्रा अवश्य करें।

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