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Mine Awareness Day: खदानों के बारे में जानना क्यों जरूरी है, कितनी खतरनाक हैं खदाने

Mine Awareness Day 2025: हर साल 4 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस का उद्देश्य सिर्फ खदानों को हटाना ही नहीं, बल्कि एक ऐसी दुनिया बनाना है जहाँ युद्ध के बाद भी निर्दोष नागरिक सुरक्षित रह सकें।

Akshita Pidiha
Written By Akshita Pidiha
Published on: 4 April 2025 1:56 PM IST
Mine Awareness Day: खदानों के बारे में जानना क्यों जरूरी है, कितनी खतरनाक हैं खदाने
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Mine Awareness Day (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Mine Awareness Day 2025: अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस (International Day for Mine Awareness and Assistance in Mine Action) हर साल 4 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन विश्व भर में खदानों (Landmines) और विस्फोटक अवशेषों (Explosive Remnants of War - ERW) से होने वाले खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों में सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन को घोषित किया ताकि खदान मुक्त दुनिया की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस का उद्देश्य सिर्फ खदानों को हटाना ही नहीं, बल्कि एक ऐसी दुनिया बनाना है जहाँ युद्ध के बाद भी निर्दोष नागरिक सुरक्षित रह सकें। खदानों की समस्या से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक, जागरूकता अभियानों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से हम इस दिशा में ठोस कदम बढ़ा सकते हैं। 4 अप्रैल को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि खदान मुक्त दुनिया बनाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

हर साल 4 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता और खनन कार्रवाई में सहायता के लिए दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 8 दिसंबर, 2005 को आधिकारिक रूप से स्वीकृत किया गया था। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में बारूदी सुरंगों के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।

खदान क्या हैं (What Are Landmines)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

खदानें (Landmines) विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें जमीन में या सतह पर छुपाया जाता है। ये खदानें सैनिकों, वाहनों या आम नागरिकों के संपर्क में आने पर विस्फोट कर सकती हैं। युद्ध के बाद भी ये दशकों तक सक्रिय रहती हैं और आम लोगों की जान के लिए खतरा बनी रहती हैं।

खदानों से होने वाले खतरे (Dangers from Landmines)

मानवीय हानि – खदानें और विस्फोटक अवशेष प्रतिवर्ष हजारों लोगों की जान लेते हैं, जिनमें अधिकांश निर्दोष नागरिक होते हैं।

शारीरिक विकलांगता – खदान विस्फोटों के कारण कई लोग अपंग हो जाते हैं और उनका जीवन कठिन हो जाता है।

आर्थिक प्रभाव – कृषि भूमि और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोगी क्षेत्र खदानों के कारण अनुपयोगी हो जाते हैं।

सामाजिक अस्थिरता – खदान प्रभावित क्षेत्रों में लोग अपने घरों को छोड़कर अन्य स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव – खदान विस्फोटों से पर्यावरण को भी भारी क्षति होती है, जिससे भूमि प्रदूषित हो जाती है और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ता है।

खदान जागरूकता और खनन कार्रवाई दिवस मनाने की आवश्यकता

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

बारूदी सुरंगें हर साल हजारों लोगों की मृत्यु का कारण बनती हैं। एक अध्ययन के अनुसार, 2019 में खदानों से कम से कम 5,554 दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 2,100 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 3,357 लोग घायल हुए। ये दुर्घटनाएँ अफगानिस्तान, कोलंबिया, इराक, माली, नाइजीरिया, यूक्रेन और यमन जैसे देशों में सबसे अधिक दर्ज की गईं। लैंडमाइन विस्फोटों (Landmine Explosion) में सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में 43% छोटे बच्चे होते हैं।

‘लैंडमाइन्स मॉनिटर’ की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 की तुलना में 2020 में बारूदी सुरंगों से घायल होने वालों की संख्या 20% बढ़ी। 2020 में 54 देशों में 7,000 से अधिक लोग मारे गए।हालांकि, 1999 के बाद से 30 से अधिक देशों ने अपने क्षेत्रों से बारूदी सुरंगों को पूरी तरह से हटा दिया है। इस कार्य में चिली और ब्रिटेन सबसे आगे हैं। वर्तमान में, लगभग 70 गैर-सरकारी सशस्त्र संगठन बारूदी सुरंगों का उपयोग न करने पर सहमत हो गए हैं। हाल ही में, श्रीलंका ने 2021 में अपने पूरे बारूदी सुरंग भंडार को नष्ट कर दिया।

बारूदी सुरंगों के खिलाफ वैश्विक पहल

बारूदी सुरंगें मानवता के लिए एक गंभीर खतरा हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, 1997 में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, जिसमें इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की सहमति बनी। उसी वर्ष, ‘एंटी-पर्सनल माइन बैन कन्वेंशन’ (ओटावा संधि) पारित की गई । इस संधि पर 164 देशों ने हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य मानव-विरोधी बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध लगाना था।

ओटावा संधि के 4 प्रमुख उद्देश्य:

पीड़ितों की सहायता करना।

खनन-प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।

बारूदी सुरंगों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों में सार्वभौमिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

युद्ध के विस्फोटक अवशेषों को नष्ट करना और सरकारों व गैर-राज्य सशस्त्र समूहों द्वारा संरक्षित बारूदी सुरंगों को समाप्त करना।

ओटावा संधि का उल्लंघन करने वाले देश

संयुक्त राष्ट्र ने कई ऐसे देशों की पहचान की है जो अब भी बारूदी सुरंगों का निर्माण कर रहे हैं और ओटावा समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:- चीन, क्यूबा, ईरान, म्यांमार, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, कैमरून, मिस्र, नाइजर, फिलीपींस, थाईलैंड, ट्यूनीशिया और वेनेज़ुएला।

इनमें से 33 देश ऐसे हैं जिन्होंने ओटावा संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन फिर भी इसका उल्लंघन कर रहे हैं।भारत और अमेरिका भी पूरी तरह से इस संधि के दायरे से बाहर नहीं हैं।

अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस का इतिहास

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2005 में एक प्रस्ताव पारित कर 4 अप्रैल को "अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस और माइन एक्शन में सहायता" के रूप में मनाने की घोषणा की। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि विश्व स्तर पर खदान उन्मूलन के प्रयासों को समर्थन मिले और प्रभावित क्षेत्रों में अधिक से अधिक सहायता पहुँचाई जा सके।

प्रमुख घटनाएं:-

1997: एंटी-कार्मिक माइन बैन कन्वेंशन पर हस्ताक्षर।

1999: यह संधि लागू हुई, जिसमें 164 देशों ने पुष्टि की।

2005: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस घोषित किया।

2008: क्लस्टर हथियारों पर प्रतिबंध लागू हुआ।

संयुक्त राष्ट्र मौजूदा कानूनी ढांचे के सार्वभौमिकरण का समर्थन करता है और सदस्य देशों को प्रोत्साहित करता है कि वे नागरिकों को बारूदी सुरंगों और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों से बचाने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय समझौतों को विकसित करें। यह कार्य इच्छुक देशों, नागरिक संगठनों, खदान कार्रवाई एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से किया जाता है।

एंटी-कार्मिक माइन बैन कन्वेंशन, जो बारूदी सुरंगों के उपयोग, भंडारण, उत्पादन, स्थानांतरण और विनाश को प्रतिबंधित करता है, 1997 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था। अब तक, 164 देश इस संधि की पुष्टि कर चुके हैं और इसे स्वीकार कर चुके हैं।

हालांकि, युद्ध के अन्य विस्फोटक अवशेषों से संबंधित चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। 12 नवंबर, 2006 को, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कुछ पारंपरिक हथियारों पर कन्वेंशन के तहत युद्ध के विस्फोटक अवशेषों पर प्रोटोकॉल के लागू होने का स्वागत किया। इसके सार्वभौमिकरण और प्रभावी कार्यान्वयन का आह्वान किया। इसके अलावा, दिसंबर 2008 में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्लस्टर हथियारों पर कन्वेंशन के हस्ताक्षर के उद्घाटन का समर्थन किया।

संयुक्त राष्ट्र की अंतर-एजेंसी नीति के तहत, संयुक्त राष्ट्र खान कार्रवाई अंतर-एजेंसी समन्वय समूह (IACG-MA) कार्य करता है। इसमें 12 विभाग, एजेंसियां, फंड और कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान और विश्व बैंक जैसी पर्यवेक्षक संस्थाएँ भी इस प्रयास में सहयोग करती हैं। यह समूह खदान कार्रवाई के सभी स्तंभों और गतिविधियों में एकीकृत और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है।

2018 में, संयुक्त राष्ट्र खान कार्य सेवा (UNMAS) ने संयुक्त राष्ट्र खदान कार्य रणनीति 2019-2023 का मसौदा तैयार किया और नेतृत्व किया। इस रणनीति के दो प्रमुख पहलू हैं: यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के लिए एक जवाबदेही ढांचे को परिभाषित करता है।

यह खदान कार्रवाई में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के लिए बदलाव के सिद्धांत को प्रस्तुत करता है।

संयुक्त राष्ट्र का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर बारूदी सुरंगों और विस्फोटक अवशेषों के खतरों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

खदान से प्रभावित देश

विश्व के कई देश आज भी खदानों से प्रभावित हैं। इनमें कुछ प्रमुख देश हैं: अफगानिस्तान, अंगोला, कंबोडिया, कोलंबिया, इराक, लाओस, लेबनान, माली, म्यांमार, यूक्रेन।

खदानों को हटाने की आधुनिक तकनीकें

मैनुअल डिमाइनिंग – प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा विशेष उपकरणों का उपयोग कर खदानों को हटाना।

खदान हटाने वाले रोबोट – आधुनिक युग में रोबोटिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे खदान निष्क्रिय करने का काम सुरक्षित और प्रभावी होता जा रहा है।

ड्रोन तकनीक – खदानों की पहचान और निष्क्रियता के लिए ड्रोन तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।

खास तरह के प्रशिक्षित जानवर – कुछ देशों में खदान खोजने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्तों और चूहों का उपयोग किया जाता है।

खदान पीड़ितों की सहायता

चिकित्सा सहायता – घायलों को समय पर प्राथमिक चिकित्सा और सर्जिकल सहायता दी जाती है।

कृत्रिम अंग और पुनर्वास – जिन लोगों ने खदान विस्फोट में अपने अंग खो दिए हैं, उन्हें कृत्रिम अंग और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

आर्थिक सहायता – प्रभावित लोगों को आजीविका कमाने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जाती है।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता – विस्फोट पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

खदानों के खिलाफ भारत की भूमिका

भारत ने अभी तक ओटावा संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं पर युद्धकालीन खदानों को हटाने के लिए कई पहल की हैं। भारतीय सेना ने राजस्थान और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कई खदान निष्कासन अभियान चलाए हैं। भारत मानवीय सहायता अभियानों में भी भाग लेता है और खदान प्रभावित देशों को सहायता प्रदान करता है। भारत प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है और यहां विभिन्न प्रकार की खदानें मौजूद हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा, सोना, चूना पत्थर, और अन्य खनिजों की प्रचुरता है।

भारत में खनन क्षेत्र का महत्व (Importance of Mining Sector in India)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

खनन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल औद्योगिक विकास में योगदान देता है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है। खनन उद्योग भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2-2.5% योगदान देता है और कई उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराता है।

भारत में खनन क्षेत्र की चुनौतियाँ

खनन से भूमि क्षरण, वनों की कटाई, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ती है.झारखंड, ओडिशा और कर्नाटक में अवैध खनन एक गंभीर समस्या है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। खनन के कारण कई जनजातीय और ग्रामीण समुदाय विस्थापित होते हैं। खनन क्षेत्र में दुर्घटनाएँ आम हैं, जिससे मजदूरों की जान को खतरा रहता है।

आधुनिक तकनीक, जागरूकता अभियानों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से हम इस दिशा में ठोस कदम बढ़ा सकते हैं। 4 अप्रैल को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि खदान मुक्त दुनिया बनाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

Admin 2

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