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हमीरपुर: कोरोना के बीच स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग हुई शुरू

कोरोना के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना स्वाभविक था, लेकिन धीरे-धीरे अब स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से सुचारू हो गई हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने भी रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 10 Dec 2020 11:45 AM GMT

हमीरपुर: कोरोना के बीच स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग हुई शुरू
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हमीरपुर: कोरोना के बीच स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग हुई शुरू photos (social media)
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हमीरपुर। कोरोना संकट के बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने स्कूली बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। जिले के समस्त सातों ब्लाकों में टीम स्कूलों का भ्रमण कर छात्र-छात्राओं की सेहत की जांच कर रही है। अब तक तीन दर्जन से अधिक बच्चों को इलाज और परामर्श के लिए संबंधित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर किया गया है। ज्यादातर बच्चों में आंख संबंधी शिकायत मिल रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर हुआ असर

कोरोना के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना स्वाभविक था, लेकिन धीरे-धीरे अब स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से सुचारू हो गई हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने भी रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में ही आरबीएसके की समस्त ब्लाकों में कार्यरत टीमों ने स्कूलों का भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना शुरू कर दिया है।

नोडल अधिकारियों ने किया परीक्षण

आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ.रामअवतार ने बताया कि राजकीय इण्टर कॉलेज कुरारा में 480 के सापेक्ष 240, राजकीय इण्टर कॉलेज मौदहा में 300 के सापेक्ष 118, जूनियर हाईस्कूल टोलारावत में 49 के सापेक्ष 4, राजकीय इण्टर कॉलेज मुस्करा में 86 के सापेक्ष 45, भारत कुमार इण्टर कॉलेज सरीला में 238 के सापेक्ष 5 छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए किया गया रेफर

गायत्री विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज सुमेरपुर में 295 के सापेक्ष 47 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इस तरह 1448 छात्र-छात्राओं में 539 की स्क्रीनिंग के बाद 41 बच्चों को इलाज के लिए संबंधित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के सातों ब्लाकों में आरबीएसके की टीम है, जो इस वक्त कोरोना संकट में भी काम कर रही हैं। कक्षा नौ से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं शुरू की गई है, इसलिए टीमें भी स्क्रीनिंग में लग गई हैं। अभी बच्चों की संख्या भी कम है। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर गौरीश राज पाल ने बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान 15 बच्चों में दृष्टि दोष, 12 में त्वचा रोग, नेत्र रोगी और त्वचा रोग के ज्यादा बच्चे हैं। दंत रोग के छह बच्चे मिले हैं।

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आरबीएसके से होने वाले उपचार

नोडल अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 साल तक के बालक-बालिकाओं को जन्मजात नौ प्रकार के विकारों डाउन सिंड्रोम, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, कटा होंठ-तालू, जन्मजात मुड़े पैर या पंजा, जन्मजात हृदय रोग का उपचार कराया जाता है। इसके अलावा विटामिन ए, बी, डी की कमी, गंभीर एनीमिया, त्वचा रोग, आंख-दांत सहित 31 अन्य स्वास्थ्य दशाओं को शामिल किया गया है, जिसका नि:शुल्क उपचार कराया जाता है। अब इस प्रोग्राम में टीबी और लैप्रोसी (कुष्ठ रोग) को भी शामिल किया गया है।

रिपोर्टर : रविन्द्र सिंह

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