सोनभद्र कत्लेआमः अफसरों की आंखों पर पट्टी और कानों में तेल, फिर तो ये होना ही था

सोनभद्र कत्लेआम से कई माह पूर्व अपना दल( एस) के दुद्धि विधायक हरिराम चेरो द्वारा कई माह पूर्व ही मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्राचार के माध्यम से समस्या के त्वरित निस्तारण करने के लिए आग्रह व निवेदन किया गया था किंतु नौकरशाही ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। यदि नौकरशाही चेत जाती तो सोनभद्र कत्लेआम से बच सकता था।

सोनभद्र। सोनभद्र कत्लेआम के बाद जहां आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वहीं अब मामले की बंद तहें खुलने लगी हैं जिसमें नौकरशाही की लापरवाही और मूंदौ आंख कतौ कछु नाहीं वाला अंदाज व्यवस्था पर इतना भारी पड़ गया कि दस निर्दोष लोगों की जान चली गई।

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यदि तथ्यों पर गौर करें तो अपना-दल(यस) के दुद्धी विधायक और ग्रामीणों के पत्र को यदि नौकरशाही द्वारा समय रहते गंभीरता से लेकर एक्शन ले लिया गया होता तो आज इस मामले के तथ्य कुछ और होते। नौकरशाही के अनसुनी और नजरअंदाज करने की कार्यशैली के कारण ही इतनी बड़ी घटना हुई।

सोनभद्र कत्लेआम से कई माह पूर्व अपना दल( एस) के दुद्धि विधायक हरिराम चेरो द्वारा कई माह पूर्व ही मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्राचार के माध्यम से समस्या के त्वरित निस्तारण करने के लिए आग्रह व निवेदन किया गया था किंतु नौकरशाही ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। यदि नौकरशाही चेत जाती तो सोनभद्र कत्लेआम से बच सकता था।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष को संबोधित पत्र में ग्राम उम्भा तहसील घोरावल के आदिवासियों को गांव से उजाड़ने एवं उत्पीड़न से बचाने का अनुरोध किया गया था।

जिला प्रशासन व पुलिस उजाड़ रही गांव

पत्र में कहा गया था कि पूरा जिला व पुलिस प्रशासन बिहार के दो आईएएस के इशारे पर दबाव में आकर प्रार्थीगण को गांव से उजाड़ना चाहते हैं। पूरा गांव पुलिस के दमनकारी उत्पीड़न से उजड़ने की स्थिति में है।

जिले का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांव में जाकर गांव वालों की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। अतः निवेदन है कि बहू बेटियों की इज्जत एवं प्रार्थीगणों की जान माल की रक्षा की जाए।

12सौ लोगों ने लिखा था पत्र

पत्र में अनुरोध किया गया था कि उच्चस्तरीय जांच कराकर खतौनी की फर्जी इन्द्राज को निरस्त कर जमीन गांव सभा में बरकरार रखी जाए।

यह प्रार्थना पत्र कैलाश अनिल विजय रामराज, रामबली, रामसुंदर, जामवन्त. श्रीराम, हरिशंकर, रामपति, संतोष जयकरन जवाहिर भोला रामचंदर बसन्तलाल संतलाल राम सिंह अमर सिंह सुरेन्द्र बबुंदर महेंद्र रामकुंवर व घोरावल तहसील के उम्भा गांव के 12 सौ लोगों की ओर से दिया गया था।

जंगल पलायन कर गए थे सारे पुरुष

पत्र में सीधे सीधे आरोप लगाया गया था कि पुलिस दो आईएएस के दबाव में फर्जी मुकदमे कर रही है। पत्र में तीन फर्जी मुकदमों का जिक्र किया गया। इसके अलावा पुलिस पर पीएसी के साथ गांव जाकर तांडव करने व बहू बेटियों का शारीरिक शोषण करने का भी आरोप लगाया गया।

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पत्र में यह भी कहा गया कि पुरुष वर्ग पुलिस के भय से जंगलों में रहकर खुद को बचा रहे हैं। पूरा जिला व पुलिस प्रशासन गांव को उजाड़ना चाहा रहा है। जिले का कोई भी अधिकारी गांव जाकर गांव वालों की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।

दुद्धी विधायक उवाच

दुद्धी के विधायक हरीराम चेरो ने भी भूमाफिया द्वारा जबरदस्ती जमीन हड़पे जाने के संबंध में पत्र लिखा। जिसमें निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराकर न्याय दिलाने व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग की गई। लेकिन नौकरशाही की नींद नहीं टूटी और इतना बड़ा कांड हो गया।