तुझे पॉलिटिक्स में ढालूंगा, सावन को आने दो

नवल कान्त सिन्हा

‘तुझे गीतों में ढालूंगा, सावन को आने दो…’ पता नहीं ये गाना साक्षी मिश्रा, अजितेश और नुसरत जहां ने सुना है या नहीं। अब आप कहेंगे कि इनसे क्या मतलब तो मैं कहूंगा, ये ही तो बचे हैं यूथ आइकॉन, बाकी तो घुइयाँ छील रहे हैं। कुछ को लगता है कि वो कुछ खास नहीं कर रहे हैं, उन्हें साक्षी की तरह ‘किक’ चाहिए। अजितेश जैसी ख्वाहिश तो हजारों साल से लाखों लडक़ों की रही है कि कुछ करना-धरना न पड़े और किसी बड़े खानदान की खूबसूरत लडक़ी इश्क कर ले। फिर नुसरत जहां तो वाकई आइकॉन हैं, आशय ये कि कोई फिल्म स्टार बनना चाहता है, कोई पॉलिटिशियन और कोई अमीर… मोहतरिमा तो तीनों क्वालिटी से लबालब हैं।

खैर छोडिय़े, मेरी चर्चा तो इस पर थी कि यदि कोई पिछले एक साल से वादा करता आ रहा है कि ‘तुझे गीतों में ढालूंगा, सावन को आने दो…’ तो अब सावन आ गया है, ये वादा कैसे पूरा हो सकता है। जिसे पता नहीं, वो संकट में है। क्योंकि इश्क में अगर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर पाया तो राम-राम होना तय है। अब प्रेमी सियासी लोगों की तरह माहिर तो होते नहीं कि हर साल वादा करें, फिर भूल जाएं। अब आप कहेंगे कि हर साल कैसे धोखा दिया जा सकता है, तो बाबू बाढग़्रस्त इलाकों की सैर कर आइए। वहां नेताजी से पूछ लीजिए कि इस बदहाली का क्या उपाय है, जवाब मिलेगा, अगले साल तक सब ठीक हो जाएगा। दूरदराज के गांव नहीं जा सकते तो अपने शहर के किसी मोहल्ले में चले जाइए, गड्ढों में दरिया बह रही है, पर सभासद यही आलाप करेंगे कि बस बरसात खत्म और सडक़ें टंच।

मुझको तो लगने लगा है कि अब सावन का इंतजार लोगों को कम नेताओं को ज्यादा रहता है। हां, इस सावन एक अच्छी चीज जरूर हुई है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कह दिया कि इस सावन कांवड़ की यात्रा सुविधाजनक तरीके से पूरी हो। पच्चीस से ज्यादा जिलों से गुजरने वाली इस यात्रा पर डीजे बजाने की भी छूट है, बस मामला भक्तिमय ही रहे, फिल्मी न हो। यूपी की बात हुई है तो बता दें कि स्वतंत्रदेव सिंह का भी सावन हरा हो गया है। यूपी भाजपा के बॉस बना दिए गए हैं। इस बार एमपी प्रभारी रहते हुए एक लाख बीस हजार से वोटों से जीतने वाले सिंधिया की सीट को ठिकाने लगा दिया था। अब अध्यक्ष बन अपना दल की वोटों के खेत में भाजपा के बीज बोएंगे।

वैसे बीजेपी ही नहीं अपने सुशासन बाबू भी किसी से कम नहीं। इस सावन उन्होंने क्राइम ब्रांच को ये फरमान ठोंक दिया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल से लेकर स्वेदशी जागरण मंच तक सबको खंगालो, कुछ गड़बड़ हो तो ढूंढ निकालो। अब उन्होंने ये बिहार में अगले साल चुनाव की रणनीति के तहत मुसलमानों को प्रभावित करने के लिए किया या बीजेपी को बिहार में उसकी औकात दिखाने के लिए, बिहार के इस टेंशन से मुझे क्या। मैं तो बस इतना कहूंगा कि बिहारियों को अपने केजरीवाल जी खुश कर रहे हैं। तभी तो आठवीं से बारहवीं तक स्कूलों में मैथिली को पढ़ाने का निर्णय लिया है। अब आप इसे चुनाव से जोड़ें तो ये आपकी मर्जी, मैं तो सावन अंधा हूँ, बस हरा-हरा देख रहा हूँ। लेकिन ‘कर’ नाटक में किसे हरा-हरा दिख रहा है, मुझे नहीं पता। पता तो बस इतना है कि वहां पर बीएस येदियुरप्पा बैटिंग कर रहे हैं…।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)