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कोरोनाः जनता-कर्फ्यू जरूरी

यदि भारत के लोग अगले 15 दिन के लिए अपने पर खुद कर्फ्यू लगा लें तो निश्चय ही कोरोना को काफी काबू किया जा सकता है।

Dr. Ved Pratap Vaidik

Dr. Ved Pratap VaidikWritten By Dr. Ved Pratap VaidikChitra SinghPublished By Chitra Singh

Published on 17 April 2021 5:00 AM GMT

कोरोनाः जनता-कर्फ्यू जरूरी
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जनता कर्फ्यू (फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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कोरोना महामारी का दूसरा हमला जितनी ज़ोरों से भारत में हो रहा है, शायद दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं हुआ। एक दिन में सवा दो लाख मरीज़ों का होना भयंकर खतरे की घंटी है। हजारों लोग रोज़ मर रहे हैं। उनमें बुजुर्ग तो हैं ही, अब जवानों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

कई शहरों में श्मशान घाट और कब्रिस्तान छोटे पड़ रहे हैं। मरीज़ लोग दवा और पलंगों की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं। कोरोना की दवा की कालाबाजारी शुरु हो गई है। मध्यवर्गीय और गरीब आदमी तो उसे खरीद भी नहीं सकता। किसी दवा-विक्रेता के पास कल सैकड़ों फर्जी इंजेक्शन इंदौर में पकड़े गए हैं। इससे ज्यादा दुखद और शर्मनाक बात क्या हो सकती है ? यदि वे इंजेक्शन नकली हों तो उनके निर्माता और विक्रेताओं को तत्काल मृत्युदंड क्यों नहीं दिया जाना चाहिए ? सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभी तक बहुत सराहनीय काम कर दिखाया है लेकिन अब उसकी असली परीक्षा की घड़ी आ गई है। यह वक्त सीना फुलाकर डींग मारने का नहीं है। अपने देश में लोग दवाई के अभाव में मर रहे हैं और हम डींग मार रहे हैं कि भारत ने 80 देशों को अपनी दवाएं देकर उपकृत किया है। उसने सही किया है लेकिन उसने तब ज़रा भी ख्याल नहीं किया कि यह महामारी भारत के दरवाजे पर दुबारा दस्तक दे सकती है।

हरिद्वार में हजारों लोग संक्रमित

सरकार का गणित थोड़ा जरुर गड़बड़ाया लेकिन यह महामारी बढ़ी है, सरकार के नहीं, जनता के कारण ! भारत की जनता ने सावधानी लगभग छोड़ दी। कई शहरों में हजारों लोग मुखपट्टी के बिना घूमते हुए आज भी देखे जा सकते हैं। इसके अलावा कुंभ-स्नान के लिए लाखों लोगों का हरिद्वार में इकट्ठे होना और मस्जिदों में बैठकर नमाज़ का आग्रह करना घनघोर अंधविश्वास और लापरवाही का प्रमाण है। हरिद्वार में हजारों लोग संक्रमित हो गए और एक महंत भी चल बसे।

महाकुंभ (फोटो- सोशल मीडिया)

रात के कर्फ्यू से कितना लाभ?

हमारे नेता हमारे साधुओं से भी एक कदम आगे हैं। प. बंगाल में चुनावों के दौरान क्या हो रहा है ? न तो नेताओं के मुख पर पट्टी है और न ही भीड़ के ! कई राज्यों में रात का कर्फ्यू लगा दिया गया है। उससे कोरोना कितना काबू होगा, पता नहीं लेकिन पुलिसवालों की जेबें जरुर गर्म हो जाएंगी। आश्चर्य तो यह है कि संक्रमण को रोकने के पारंपरिक भारतीय तरीकों पर कोई जोर नहीं दे रहा है, क्योंकि वे सस्ते और सुलभ हैं। उनसे डाॅक्टरों को मोटी कमाई भी नहीं होनी है। कोरोना की इस भयंकर वापसी के दौरान भी लोग जन्म-दिन, शादी-समारोह, श्रद्धांजलि सभा आदि के लिए भीड़ जुटाने में ज़रा भी संकोच नहीं कर रहे हैं। यदि भारत के लोग अगले 15 दिन के लिए अपने पर खुद कर्फ्यू लगा लें तो निश्चय ही कोरोना को काफी काबू किया जा सकता है।

(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं।)

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Chitra Singh

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