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केंद्रीय बजट से भारत के शहरों के लिए एक नए युग की शुरुआत

प्रधानमंत्री आवास योजना, अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटीज मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं ने शहरी शासन में एक नया दृष्टिकोण अपनाया है।

Chitra Singh

Chitra SinghBy Chitra Singh

Published on 27 Feb 2021 11:07 AM GMT

केंद्रीय बजट से भारत के शहरों के लिए एक नए युग की शुरुआत
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केंद्रीय बजट से भारत के शहरों के लिए एक नए युग की शुरुआत (photo- social media)
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Hardeep S Puri

हरदीप एस पुरी

दशकों से भारतीय शहरों की घोर उपेक्षा की गई है। पिछली सरकारों ने इस दुस्वप्न को नजरअंदाज करने की कोशिश की या फिर टुकड़े-टुकड़े में इसका समाधान देखा। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने जो शुरुआत की उसे दुनियाभर में सबसे व्यापक, नियोजित शहरीकरण प्रयास के रूप में स्वीकार किया जाता है। यूपीए सरकार के 2004-2014 के दस वर्षों के दौरान शहरी क्षेत्र में 1,57,000 करोड़ रुपये के निवेश के मुकाबले मोदी सरकार में पिछले 6 वर्षों में ही 6 गुना बढ़ोतरी हुई है जो लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

भारत के शहरों के लिए एक नए युग की शुरुआत

केंद्रीय बजट 2021-22 और 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट ने मिलकर भारत के शहरों के लिए एक नए युग की शुरुआत की है। महामारी वाले साल में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये के अभूतपूर्व बजट और अनुदान परिव्यय ने 5 साल से ज्यादा की अवधि में हमारे शहरों की क्षमता को अनलॉक करने की एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, इसमें जीवन जीने में आसानी और व्यापार सुगमता दोनों शामिल हैं।

7 लाख करोड़ रुपये में से पानी और स्वच्छता के लिए 5 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शामिल है। शेष राशि में से 88,000 करोड़ मेट्रो रेल, 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 33 हजार करोड़ रुपये का अनुदान, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 26,000 करोड़ रुपये, बस परिवहन के लिए 18,000 करोड़ रुपये, स्वच्छ हवा के लिए 15 हजार करोड़ और नए शहरों व नगरपालिका की साझा सेवाओं के लिए 8450 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

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योजनाओं ने शहरी शासन में एक नया दृष्टिकोण अपनाया

प्रधानमंत्री आवास योजना, अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटीज मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं ने शहरी शासन में एक नया दृष्टिकोण अपनाया है क्योंकि मोदी सरकार ने अतीत की पुरातन धारणाओं को चुनौती दी और नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को केंद्र में रखा। पांच वर्षों से ज्यादा की अवधि में 2.87 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जल जीवन मिशन और 1.41 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वच्छ भारत मिशन संस्करण-2 को लेकर हालिया बजट घोषणाएं नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को अगले स्तर तक ले जाने और इसे पूरे भारत में पहुंचाने का संकल्प व्यक्त करती हैं।

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भारत में एक शानदार शहरी प्रयोग

मई 2014 से, भारत में एक शानदार शहरी प्रयोग चल रहा है। आदर्श बदलाव के तहत केंद्र सरकार देश के नागरिकों के भविष्य को संवारने के लिए नए रास्ते तैयार कर रही है। शहरी मामलों के तहत प्रत्येक मिशन सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना को जागृत करता है। शहरी परिदृश्य को बदलने के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम कर रही है। जैसे-जैसे शहरी योजना फलीभूत होने लगेगी, नागरिक के पास होगा- एक शहर जो स्वच्छ है, एक शहर जो अपनी संस्कृति पर गर्व करेगा, एक शहर जो नवीनतम तकनीक से संचालित होगा लेकिन अपनी परंपराओं को समेटे हुए होगा, एक ऐसा शहर आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देगा और गर्व के साथ वहां के निवासी उसकी देखभाल करेंगे।

शहरी गतिशीलता

जीवंत शहरों के साथ एक और महत्वपूर्ण घटक सतत शहरी गतिशीलता समाधान है, खासतौर से बड़े पैमाने पर परिवहन प्रणाली। छोटे शहरों के लिए मेट्रो लाइट और मेट्रो नियो वेरिएंट समेत बस परिवहन और मेट्रो रेल में निवेश इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। सस्ता सार्वजनिक परिवहन जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है और साथ ही बेहतर आजीविका के अधिक विकल्प खोलता है। इसके अलावा कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। बड़े पैमाने पर ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अनुमोदन के डिजिटलीकरण और शहरों में लाइसेंस व्यवस्था के सरलीकरण की दिशा में बड़ा कदम विशेष रूप से नगरपालिका सेवाएं देने के लिए मानव इंटरफेस को कम करने की केंद्र सरकार की मंशा को व्यक्त करता है। एक पारदर्शी, मजबूत, प्रौद्योगिकी संचालित नगरपालिका शासन जीवन सुगमता को बढ़ाने का महत्वपूर्ण पैरामीटर है।

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नगरपालिकाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

मजबूत संस्थागत तंत्र शहरी शासन की कुंजी है। प्रमुख मिशनों के माध्यम से कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेप के अलावा हमारे शहरों में स्थानीय सरकारों को मजबूत करने के लिए सम्मिलित, एकीकृत प्रयास किए गए हैं। नगरपालिकाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन सभी पहलों में विशिष्ट उपायों के माध्यम से संपत्ति कर सुधारों पर जोर दिया गया है। वास्तव में, नौ यूएलबी ने नगरपालिका बांडों के माध्यम से 3,690 करोड़ रुपये की धनराशि सफलतापूर्वक जुटाई है, जो संकेत है कि दोनों, क्रमिक व्यावसायिक कुशलता को सिस्टम में विकसित किया जा रहा है और साथ ही उनके कामकाज को स्थायी और पारदर्शी बनाने के लिए आत्मविश्वास भी दिखाता है और खुद को जवाबदेह बनाता है। अपने संसाधनों को बढ़ाने के लिए अब ज्यादा यूएलबी विश्वास के साथ इस दिशा में बढ़ेंगे।

शहरीकरण में नवाचार के मौका

मध्यम अवधि में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और उत्पादकता में बड़े शहरों की भूमिका भी बड़ी होगी। शहरों के लिए 38,000 करोड़ रुपये के मिलियन प्लस चैलेंज फंड 15वें वित्त आयोग का एक स्वागत योग्य कदम है। यह महानगरीय क्षेत्रों में विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच बेहद जरूरी एकीकरण और समन्वय को प्रोत्साहित करता है। नए शहरों के लिए 8,000 करोड़ रुपये का सीड फंड राज्यों द्वारा नियोजित शहरीकरण में नवाचार के मौके प्रदान करता है। साझा नगरपालिका सेवाओं की अवधारणा सामूहिक तरीके से शहरों के क्षमता निर्माण को रफ्तार प्रदान करती है।

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'द अर्बन लर्निंग इंटर्नशिप प्रोग्राम'

भविष्य में समस्याओं से निपटने के लिए शहरों को उपयुक्त रूप से कुशल नगरपालिका प्रशासन की आवश्यकता होगी। आज दुर्भाग्य से कौशल के संबंध में अपर्याप्त कार्यबल शहरी स्थानीय निकायों के सामने सबसे कठिन चुनौती है। इन चुनौतियों को समझते हुए शिक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 'द अर्बन लर्निंग इंटर्नशिप प्रोग्राम' (टीयूएलआईपी) शुरू किया है। यूएलबी और स्मार्ट शहरों में शहरी प्रशासन के क्षेत्र में नए स्नातकों, डिप्लोमा धारकों या स्नातकोत्तरों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जाते हैं। यह उन छात्रों के लिए फायदे की बात है जिन्हें क्षेत्र का बेहतरीन अनुभव प्राप्त होता है और बदले में यूएलबी को ऊर्जावान, युवा छात्रों से नए विचार मिलते हैं जो खुद को साबित करना चाहते हैं।

कोविड वॉररूम

कोविड-19 ने बेशक इस बात को साबित किया है कि 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए सभी स्तरों पर सरकारों और नागरिक समाज, व्यवसाय और शिक्षाविदों के बीच साझेदारी की जरूरत होती है। महामारी के दौरान स्मार्ट शहरों के नर्व सेंटर एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) की अहम भूमिका देखी गई है। ये आईसीसीसी कोविड वॉररूम में तब्दील किए गए और रीयल टाइम में शहर के प्रशासकों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रही। राजनीतिक रूप से मजबूत लीडरशिप की अगुआई में युवा भारतीयों की पीढ़ी बेताब है और अब इंतजार किए बिना देश को तेजी से आगे ले जाना चाहते हैं। हम उन्हें निराश नहीं कर सकते और न करेंगे।

(हरदीप एस पुरी केंद्रीय आवास और शहरी मामले और नागरिक उड्डयन मंत्री तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। )

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