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World Brain Tumour Day 2021: ब्रेन ट्यूमर है खतरनाक, जानिए क्यों

World Brain Tumour Day : हर साल 8 जून को विश्व मस्तिष्क ट्यूमर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे उद्देश्य है कि लोगों को ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूक करना।

brain tumor day
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कांसेप्ट इमेज (फोटो - सोशल मीडिया )

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आज हम 8 जून को एक ऐसी खतरनाक बीमारी जो जानलेवा बीमारी की श्रेणी में आती है| उसके दिवस की बात कर रहे हैं| आज के समय में अधिकतर , खराब लाइफस्टाइल के कारण किडनी, फेफड़े, हार्ट सबंधी कई रोगों का शिकार हो जाते हैं इन्हीं में से एक है ब्रेन ट्यूमर। हर साल 8 जून को विश्व मस्तिष्क ट्यूमर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे उद्देश्य है कि लोगों को ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूक करना।

क्या है ब्रेन ट्यूमर ?

मस्तिष्क में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने पर जो गांठ बन जाती है उसे ही ब्रेन ट्यूमर कहते हैं। इसमें मस्तिष्क के खास हिस्से में कोशिकाओं का गुच्छा बन जाता है। यह गांठ लगातार बड़ी होती जाती है इसका प्रभाव बॉडी पर अलग-अलग तरह से पड़ता है| अगर इसका शुरुआती दौर में इलाज नहीं किया जाए तो यह कई बार कैंसर की गांठ में तब्दील हो जाता है, इसलिए ब्रेन ट्यूमर को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर में मुख्य रूप से दो प्रकार के ट्यूमर होते हैं, जिनके नाम है –Benign(गैर-कैंसरयुक्त)

Malignant (कैंसरयुक्त)

यदि ट्यूमर में कोशिकाएं सामान्य हैं, तो यह Benign है | (इसका मतलब है कि कोशिकाएं बढ़ीं और उनमें गांठ पड़ गई ). यदि कोशिकाएं असामान्य हैं और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो वे कैंसर कोशिकाएं हैं, और यह ट्यूमर Malignant है|ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में असामान्य कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं| ट्यूमर Benign (गैर-कैंसरयुक्त) और Malignant (कैंसरयुक्त) हो सकता है|


ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों

इन लक्षणों को हमेशा ध्यान रखें ताकि आप ब्रेन ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारी के गिरफ्तारी में आने से बच सकें |सिर दर्द का होना खासतौर पर सोते समय या सुबह उठते वक्त, मिर्गी के झटके आना ,कमजोरी ,शरीर का सुन्न हो जाना ,आवाज में बदलाव ,देखने की क्षमता प्रभावित होना ,कम सुनाई देना या याददाश्त प्रभावित होना ,चलने में नियंत्रण ना होना ,शरीर में अचानक किसी भी तरह की संवेदना महसूस न होना,मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना, अचानक से बेहोशी आना। अगर आपको इसमें से कोई भी लक्षण दिखें तो एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

विश्व ब्रेन ट्यूमर डे की शुरुआत

जर्मन ब्रेन ट्यूमर एसोसिएशन की स्थापना 1998 में हुई थी। उस समय 14 देशों के 500 सदस्यों ने एसोसिएशन में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। एसोसिएशन विश्वभर में ब्रेन ट्यूमर के पेशेंट्स और उनके परिवार के सहयोग के लिए था। इसके साथ ही साल 2000 से हर साल विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है।

ब्रेन ट्यूमर का इलाज

वैसे तो ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसे लेकर स्ट्रेस लेना मरीज के लिए और भी हानिकारक हो सकता है| ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है इसलिए जितना हो सके मरीज को शांत और पॉजिटिव रखने की कोशिश करें| ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए डॉक्टर व्यक्ति का क्रेनियल नर्व टेस्ट करने के लिए मस्तिष्क का एमआरआई, एंजियोग्राफी, सिर का एक्सरे और बायोप्सी टेस्ट कराने को कह सकते हैं|


ब्रेन ट्यूमर का इलाज कुछ चीजों को ध्यान में रखकर किया जाता है। जिसमें ट्यूमर का प्रकार, स्थिति, आकार, कितना फैला हुआ है, कोशिकाएं कितनी असामान्य है आदि देखकर किया जाता है।ब्रेन ट्यूमर जिसका आमतौर से इलाज केवल सर्जरी ही माना जाता है इसकी सर्जरी भी बहुत ही जटिल होती है लेकिन मॉडर्न टेक्नोलॉजी की वजह से अब ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में हाइड्रोसील या हर्निया के ऑपरेशन जितना ही रिक्स फैक्टर बचा है| सर्जरी में डॉक्टर पूरे ट्यूमर को या उसके कुछ भाग को निकाल देता है। ब्रेन ट्यूमर को निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी में कई जोखिम होते हैं जैसे संक्रमण और ब्लीडिंग भी अधिक हो सकती है। अगर ट्यूमर का आकार बड़ा है तो डॉक्टर रेडियेशन या कीमोथेरिपी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं|

ब्रेन ट्यूमर की कुछ भ्रांतियाँ

हर सर का दर्द ट्यूमर का लक्षण नहीं होता है| सभी ब्रेन ट्यूमर के रोगियों के लक्षण एक जैसे हो यह जरूरी नहीं है मुझे ब्रेन ट्यूमर नहीं हो सकता यह भी बहुत बड़ा भ्रम है| मैं मोबाइल फोन सिर के पास रख कर सोता हूं क्या मुझे ब्रेन टयूमर या कैंसर हो सकता है| सेल फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी एनर्जी के कारण ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है| कई दिनों में ज्यादा फोन इस्तेमाल ग्रीन को नुकसान पहुंचाते हैं हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर हो यह जरूरी नहीं है |जैसे ऊपर बताया है दो प्रकार के ब्रेन ट्यूमर होते हैं कैंसर रहित और कैंसर कैंसर युक्त ट्यूमर को भी उसके विकसित होने के तरीके के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाता है यह कुछ भ्रांतियां अक्सर बिंदु को लेकर रहती हैं |

समाज का प्रार्थना

आज हम सभी मस्तिष्क व सर्जन डॉक्टरों की प्रभु सहायता करे | इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को जल्दी से जल्दी ठीक होने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और आप सभी से आग्रह करते हैं कि अगर हम एक सामान्य जीवन जीते हैं तो यह निश्चित मानिए कि हम एक स्वस्थ जीवन की कामना कर सकते हैं।

Ashiki

Ashiki

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