1000 अफसरों पर मोदी सरकार का बड़ा प्रहार, ताबड़ तोड़ एक्शन जारी

बीजद सांसद भर्तुहरि महताब और बीजेपी सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने लोकसभा में ये प्रश्न किया था कि क्या प्रधानमंत्री बताएंगे कि पिछले तीन वर्षों में कितने आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई हुई।

नई दिल्ली:  मोदी सरकार, चाहे पिछली सरकार हो या इस बार की सरकार भ्रष्टाचार पर प्रहार जारी है। गृह मंत्रालय ने भ्रष्टाचार और खराब चाल-चरित्र के मामले में घिरे एक हजार अफसरों को पिछले पांच वर्षों में बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं 86 आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अफसरों के खिलाफ भी सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच शुरू की है। सरकार ने यह जानकारी बुधवार को लोकसभा में दी।

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 इस मामले को लेकर बीजद सांसद भर्तुहरि महताब और बीजेपी सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने प्रधानमंत्री से प्रश्न किया था

सूत्रों के मुताबिक बीजद सांसद भर्तुहरि महताब और बीजेपी सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने लोकसभा में ये प्रश्न किया था कि क्या प्रधानमंत्री बताएंगे कि पिछले तीन वर्षों में कितने आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई हुई।

साथ ही कितने अफसर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने में फंसे। उन अफसरों का ब्यौरा क्या है, जो अपने खिलाफ जांच शुरू होने पर विदेश भाग गए।

तीन वर्षों में 26 आईएएस, आईपीएस, आईआरएस के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं

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लोकसभा में PMO के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामलों में कुल 86 आईएएस, आईपीएस और आईआरएस के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कार्रवाई की है। ये कार्रवाई 2016, 2017, 2018 और 2019 में हुई। मोदी सरकार ने 30 जून 2019 तक हुई कार्रवाइयों का ब्यौरा देते हुए बताया कि इन तीन वर्षों में 26 आईएएस, आईपीएस, आईआरएस के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं।

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हालांकि कोई भी अफसर विदेश नहीं भागा है। मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाए हुए है। उधर गृह मंत्रालय ने बताया है कि पिछले पांच वर्षों में 1083 अधिकारियों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन अफसरों के खिलाफ परफॉर्मेंस, चरित्र और भ्रष्टाचार के मामले में सरकार ने कार्रवाई की है।