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नागरिकता कानून: कई विपक्षी सांसदों ने इस तरह की मोदी सरकार की मदद

जामिया मिलिया में आगजनी और हिंसा की घटना के बाद पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर खरीखोटी सुनाई और राष्ट्रपति से मुलाकात कर इस कानून को वापस लेने की मांग की।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 18 Dec 2019 8:46 AM GMT

नागरिकता कानून: कई विपक्षी सांसदों ने इस तरह की मोदी सरकार की मदद
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नई दिल्ली: देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून का जबर्दस्त विरोध हो रहा है और कई जगह प्रदर्शन ने हिंसक रूप भी अख्तियार कर लिया है। जामिया मिलिया में आगजनी और हिंसा की घटना के बाद पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर खरीखोटी सुनाई और राष्ट्रपति से मुलाकात कर इस कानून को वापस लेने की मांग की।

विपक्ष का कहना है कि यह कानून संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है। विपक्ष सदन से बाहर तो इस कानून का जमकर विरोध कर रहा है मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस दिन इसे लेकर राज्यसभा में मतदान हो रहा था उस दिन विपक्ष के तमाम सांसदों ने अनुपस्थित रहकर बिल को पास कराने में मोदी सरकार की मदद की।

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विपक्ष ने काम कर दिया आसान

नागरिकता संशोधन बिल को लोकसभा में पास कराने में मोदी सरकार के सामने कोई दिक्कत नहीं थी मगर राज्यसभा में सरकार के कौशल की परीक्षा थी। सरकार फ्लोर मैनेजमेंट में जरूर जुटी थी मगर विपक्ष के कई सांसदों ने भी अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद की। विपक्ष ने सरकार का काम काफी आसान कर दिया। नागरिकता संशोधन बिल को राज्यसभा में 125 मतों से पारित किया गया जबकि इसके विरोध में 99 मत पड़े। काबिलेगौर बात यह भी है कि एनडीए के पास 99 ही मत थे मगर एनडीए फ्लोर मैनेजमेंट से बिल के समर्थन में 125 मत पाने में कामयाब रहा। एनडीए 26 अतिरिक्त वोट पाने में कामयाब रहा जबकि उसके चार सांसद स्वास्थ्य कारणों से मतदान के समय अनुपस्थित रहे।

शिवसेना सांसदों ने किया वाकआउट

वैसे सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि किस तरह विपक्षी सांसदों ने अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद की। सबसे पहले शिवसेना के रुख को लिया जाए तो उसने लोकसभा में इस बिल के समर्थन में मतदान किया था मगर जब इसे लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने रुख कड़ा किया तो राज्यसभा में उसका रुख बदल गया। शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस बिल को लेकर राज्यसभा में लंबा चौड़ा भाषण किया मगर जब मतदान का समय आया तो शिवसेना सांसदों ने इसके विरोध में मतदान करने की जगह वाकआउट कर दिया। मतदान के समय शिवसेना के तीनों सांसदों संजय राउत, अनिल देसाई और राजकुमार धूत वाकआउट कर गए।

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राकांपा-बसपा के दो-दो सांसद गैरहाजिर

शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने मोदी सरकार की मदद की क्योंकि कैब पर मतदान के समय उसके दो सांसद माजिद मेनन और वंदना चव्हाण भी अनुपस्थित थे। हालांकि शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल सदन में मौजूद थे और उन्होंने बिल के विरोध में मतदान किया। बसपा मुखिया मायावती इस बिल के पास होने के बाद मोदी सरकार पर खूब बरस रही हैं और उन्होंने इसे लेकर राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है मगर यह बात काबिलेगौर है कि उनके दो सांसद बिना किसी स्पष्टीकरण के मतदान के समय अनुपस्थित थे। उसके दो सांसदों राजाराम और अशोक सिद्धार्थ मतदान के समय सदन में गैरहाजिर थे।

टीएमसी सांसद ने की हाई बीपी की शिकायत

एमसी के एक सांसद के.डी.सिंह ने गजब का काम किया। उन्होंने मतदान के समय हाई बीपी की शिकायत की और मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अब टीएमसी नेतृत्व ने कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

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सपा का भी एक सांसद रहा अनुपस्थित

माजवादी पार्टी भी इस कानून का जबर्दस्त विरोध कर रही है। पार्टी ने इसे लेकर लखनऊ सहित विभिन्न जिलों में धरना दिया है मगर उसके भी एक सांसद बेना प्रसाद वर्मा ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस के भी एक सांसद मुकुट मीठी मतदान के समय सदन में अनुपस्थित थे। टीआरएस के धर्मापुरी श्रीनिवास भी

मतदान के समय सदन में मौजूद नहीं थे।

हालांकि इस बिल को पास कराने में एआईडीएमके के 11, बीजू जनता दल के 7, टीडीपी के दो और कुछ अन्य सांसदों ने मोदी सरकार का साथ दिया मगर विपक्ष के भी कई सांसदों ने अनुपस्थित रहकर मोदी सरकार की अपरोक्ष रूप से काफी मदद की।

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