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केजरीवाल ने तोड़ी 70 साल की परंपरा, अब तक न हुआ वो कर दिखाया

आप सब के मन में सवाल उठ रहे होंगे कि दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल ने ऐसा क्या कर दिया। अरविंद केजरीवाल जिसे अन्ना हजारे के आंदोलन की उपज कहा जाता है। जिसका खुद का कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है। इस आदमी की पार्टी का भी कोई राजनीतिक इतिहास नहीं रहा। 2012 में यह पार्टी बनी।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 12 Feb 2020 9:10 AM GMT

केजरीवाल ने तोड़ी 70 साल की परंपरा, अब तक न हुआ वो कर दिखाया
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रामकृष्ण वाजपेयी

लखनऊः ये तो सभी जानते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनाव इस बार कुछ खास थे। लेकिन क्या आपको यह बात पता है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने इस बार एक ऐसी परंपरा तोड़ दी है जिसे आज तक कोई राजनीतिक दल किसी राज्य में नहीं तोड़ पायी थी। दिल्ली में भी कभी ऐसा नहीं हुआ था। इस सच्चाई को जब आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। ये बात ही कुछ ऐसी है। 70 साल के लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ। जो केजरीवाल ने इस बार कर दिखाया है।

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आप सब के मन में सवाल उठ रहे होंगे कि दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल ने ऐसा क्या कर दिया। अरविंद केजरीवाल जिसे अन्ना हजारे के आंदोलन की उपज कहा जाता है। जिसका खुद का कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है। इस आदमी की पार्टी का भी कोई राजनीतिक इतिहास नहीं रहा। 2012 में यह पार्टी बनी। और जब बनी तो यह पूरी तरह गैरराजनीतिक लोगों की पार्टी थी।

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एक नौकरशाह ने अन्ना हजारे के आंदोलन से निकल कर एक भ्रष्टाचार मुक्त शासन का सपना जमीन पर उतारने का सोचा। लेकिन यह तो ऐसी बात नहीं थी न जाने कितने लोग ऐसा करते हैं। लेकिन 2013 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने लगभग कुल वोटों में से लगभग 30 फीसदी वोट पाकर सरकार बना ली। ये भी तमाम राज्यों में हुआ है। 1985 में असम गण परिषद ने भी सरकार बनाई थी लेकिन उस टीम के सारे लड़के छात्र आंदोलन की उपज थे।

रिकार्ड दर रिकार्ड

2015 के दिल्ली विधानसभा के चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने अपने पिछले रिकार्ड को तोड़ा तो लोगों को लगा कि सरकार के 45 दिन में ही गिर जाने से लोगों की सहानुभूति की लहर पर सवार होकर अरविंद केजरीवाल ने कुल वोटों में से 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल कर लिये। कहीं कोई हलचल नहीं हुई कोई चौकन्ना नहीं हुआ।

लेकिन 2020 के दिल्ली विधानसभा के इस चुनाव में जब अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने अपने ही पिछले रिकार्ड को बरकरार रखते हुए कुल वोटों में से 50 फीसदी वोट हासिल किये तो लोकतंत्र का नया कीर्तिमान बन गया। जी हां पिछले 70 साल के लोकतांत्रिक इतिहास में कोई भी दल कुल वोटों का 50 फीसदी से अधिक वोट प्राप्त करने का कीर्तिमान दोहरा नहीं सका है जो कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने कर दिखाया है। ये एक ऐसा कीर्तिमान है जिसकी गूंज लंबे समय तक गूंजती रहेगी।

राम केवी

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