अखिलेश-शिवपाल गठबंधन में अभी हैं कई पेंच

अखिलेश के पार्टी संभालने के बाद से ही पार्टी में काफी कुछ बदल गया है। कई पुराने नेता हाशिये पर आ गये और नये-नये आये लोगों के हाथों में पार्टी की बागडोर आ गयी। अब सुलह के मसले पर यही लोग रोड़े अटका रहे है।

अखिलेश-शिवपाल गठबंधन में अभी हैं कई पेंच

अखिलेश-शिवपाल गठबंधन में अभी हैं कई पेंच

लखनऊ: समाजवादी पार्टी में बीते विधानसभा चुनाव से पहले हुये घमासान के बाद हुये बंटवारे का यूपी विधानसभा चुनाव और हाल ही में हुये लोकसभा चुनाव में नतीजा देखने के बाद अब एक बार फिर पार्टी के सभी क्षत्रप एक साथ आने की संभावना देख रहे है। हालांकि, इसमे कई पेंच भी है। सपा और प्रसपा दोनों ही दलों में कुछ नेताओं का एक धडा ऐसा भी है जो इस तरह के गठबंधन के खिलाफ है।

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सपा से अलग हो कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने बीते रविवार को फिरोजाबाद में कहा है कि अगर सपा मुखिया अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनाव में उनके दल के साथ गठबंधन की पेशकश करते है तो वह इसके लिए तैयार हैं। सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद शिवपाल की यह पेशकश उस समय आयी है जब सभी दल 12 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तैयारी में जुटे है।

हालांकि सपा मुखिया अखिलेश यादव की ओर से इस संबंध में अभी कोई बयान नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि अखिलेश यादव पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव का दबाव है कि वह शिवपाल सिंह यादव की पार्टी प्रसपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरे।

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुलायम की इच्छा है कि सपा और प्रसपा का यह गठबंधन यूपी में होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले हो जाये। काफी समय तक यूपी की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे दिग्गज राजनेता मुलायम इससे पहले भी दोनों दलों को एक साथ लाने का असफल प्रयास कर चुके है।

गौरतलब है कि सपा और प्रसपा दोनों ही दलों के कुछ कार्यकर्ता भी चाहते है कि पार्टी फिर से एक हो जाये और अखिलेश व शिवपाल के नेतृत्व में मिलकर भाजपा का मुकाबला किया जाये। सपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने तो सपा के आफिशियल फेसबुक पेज पर शिवपाल को सपा में वापस लाने के लिए बाकायदा मुहिम भी छेड़ी थी, लेकिन चाचा व भतीजे में सुलह नहीं हो पायी।

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दरअसल, अखिलेश के पार्टी संभालने के बाद से ही पार्टी में काफी कुछ बदल गया है। कई पुराने नेता हाशिये पर आ गये और नये-नये आये लोगों के हाथों में पार्टी की बागडोर आ गयी। अब सुलह के मसले पर यही लोग रोड़े अटका रहे है। सपा और प्रसपा के यह नेता नही चाहते है कि यह गठबंधन हो।

पूर्व में सपा सरकार में मंत्री रह चुके और मौजूदा समय में प्रसपा में शामिल एक नेता ने कहा कि शिवपाल यादव ने सपा से गठबंधन का प्रस्ताव तो दे दिया है लेकिन अभी यह तय नहीं है कि इसमे सपा छोड़ कर आये लोगों की क्या भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव को हम लोगों के राजनीतिक भविष्य के बारे में भी सोचना होगा, आखिर मुश्किल समय में हम लोग उनके साथ खड़े रहे हैं।

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