मुश्किल में सोनिया गांधी: पीएम केयर्स फंड को लेकर फंसी, दो राज्यों में मुकदमा दर्ज

कोविड फंड पर विवादित बयान दिए जाने के मामले में अब सोनिया गांधी के खिलाफ बिहार में एफआईआर दर्ज करवाई गयी है। मामला बीजेपी के पूर्व मीडिया प्रभारी पंकज सिंह कई धाराओं में दर्ज करवाया।

पटना: कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन, पीएम केयर्स फंड और आर्थिक पैकेज पर सियासत शुरू हो गई है। इसी कड़ी में पीएम केयर्स फंड को लेकर जारी विवाद में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी घिरती नजर आ रही हैं। कोविड फंड पर विवादित बयान दिए जाने के मामले में अब सोनिया गांधी के खिलाफ बिहार में एफआईआर दर्ज करवाई गयी है। मामला बीजेपी के पूर्व मीडिया प्रभारी पंकज सिंह कई धाराओं में दर्ज करवाया।

बीजेपी नेता पंकज सिंह ने सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

दरअसल, बिहार में बीजेपी के पूर्व मीडिया प्रभारी पंकज सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर धारा 504,505,1बी,505(2) के तहत कंकड़बाग थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी ने पीएम केयर्स फंड पर सवाल उठाकर लोगों को भड़काने का प्रयास कर रही हैं।

पीएम केयर फंड पर भ्रम फैलाने का आरोप

बीजेपी नेता ने कहा कि पीएम केयर फंड को लेकर कांग्रेस भ्रम फैलाने का काम कर रहे है। ऐसे में लोगों तक गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम केयर फंड में कोई भी व्यत्कि छाेटी से छोटी राशि जमा कर सकता है।

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कर्नाटक में भी सोनिया के खिलाफ दर्ज हो चुका मुकदमा

बता दें कि इसके पहले सोनिया गांधी के खिलाफ इसी आरोप में कर्नाटक में भी मुकदमा दर्ज हुआ था। यहां शिवमोगा जिले में सागर कस्बा पुलिस ने प्रवीण के वी नामक व्यक्ति की शिकायत पर आईपीसी की धारा 153 और 505 (1) (बी) के तहत केस दर्ज किया था।

पीएम केयर्स

क्या है मामला

गौरतलब है कि 11 मई को कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट पीएम केयर्स फंड पर ट्वीट किया गया, जिसमे लिखा था, ‘बीजेपी की हर योजना की तरह पीएम केयर्स फंड में भी गोपनीयता बरकरार रखी जा रही है। क्या पीएम केयर्स फंड में चंदा देने वाले देशवासियों को इसके उपयोग के बारे में जानकारी नहीं होना चाहिए?’

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कांग्रेस ने एक और ट्वीट किया, ‘ पीएम केयर्स नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि, ये फंड जनता का नहीं प्रधानमंत्री की केयर के लिए बनाया गया है। अगर बीजेपी सरकार में जनता की केयर करने की इच्छाशक्ति होती तो सड़कों पर प्रवासी मजदूरों के लंबे काफिले ना होते।

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