जन्मदिन विशेष: जब सिर्फ 46 सीटों के बावजूद एचडी देवगौड़ा बन गए प्रधानमंत्री

देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का आज 87 वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनकी अच्छी सेहत तथा लंबी आयु की कामना की।

Published by Aditya Mishra Published: May 18, 2020 | 11:26 am
Modified: May 18, 2020 | 11:28 am

नई दिल्ली: देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का आज 87 वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनकी अच्छी सेहत तथा लंबी आयु की कामना की।

देवेगौड़ा जून 1996 से अप्रैल 1997 तक देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। कर्नाटक की सियासत में देवगौड़ा का बड़ा प्रभाव माना जाता है। उनके बेटे कुमारस्वामी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं।

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देवगौड़ा का राजनीतिक सफर

पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा का जन्म 18 मई 1933 के कर्नाटक के एक वोक्कालिगा परिवार हुआ, जो समुदाय ओबीसी वर्ग से ताल्लुक है। पिता किसान थे इसलिए उन्हें परिवार के भरण पोषण में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पिता डी. गौड़ा धान की खेती करते थे और मां का नाम देवाम्मा था।

बचपन की पढ़ाई जैसे तैसे पूरी करने के बाद आगे उनका इरादा सिविल इंजीनियरिंग में था। इसलिए न केवल उन्होंने इसमें दाखिला लिया बल्कि अच्छे नम्बरों से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी भी की।

बड़े होने पर घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए परिवारवालों ने इनकी शादी चेन्नमा से कर दी थी।, जिनसे उनकी 6 संतान हैं। उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। एक और बेटे एचडी रेवन्ना कर्नाटक विधानसभा में विधायक हैं।

कांग्रेस के साथ शुरू की राजनीति

एचडी देवगौड़ा के राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस के साथ हुई। इमरजेंसी के वक्त 2 साल बेंगलुरु की जेल में कैद भी रहे।
वह 1953-62 तक कांग्रेस के सदस्य रहे।

साल 1962 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर होलेनारासिपुरा सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 1989 तक लगातार 6 बार देवगौड़ा इसी सीट से विधानसभा चुनाव भी जीतते रहे।

साल 1972-77 तक वह विधानसभा में नेता विपक्ष भी रहे और 2 बार कर्नाटक में जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।

उन्होंने इमरजेंसी के वक्त इंदिरा गांधी का जमकर विरोध भी किया था। जिसका कि बाद में उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा।

साल 1983 से 1988 के बीच वह कर्नाटक की जनता पार्टी सरकार में मंत्री पद भी संभाला।

इसके बाद 1994 में उन्हीं की अगुवाई में जनता दल ने कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और उन्हें राज्य का 14वां मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

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किस्मत से बने प्रधानमंत्री

अगर ये कहा जाए की देवगौड़ा किस्मत से प्रधानमंत्री बने थे तो ये गलत नहीं होगा। खास बात यह है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में किसी सीट से चुनाव भी नहीं लड़ा था। और सीधे मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन गये थे।

दरअसल साल 1996 के लोकसभा चुनाव में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 161 सीटें हासिल की थीं लेकिन वह लोकसभा में बहुमत से काफी दूर थी।

सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के कारण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल जी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, मई, 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएम पद की शपथ ली लेकिन लोकसभा में वह पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर पाए।

इसलिए सिर्फ 13 दिन बाद ही उनकी सरकार गिर गई। बीजेपी की सरकार गिरने का फायदा कांग्रेस को मिला क्योंकि तब भाजपा के बाद कांग्रेस ही दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। इसने चुनाव में 140 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

46 सीटें जीतने के बाद भी बन गये थे प्रधानमंत्री

उस वक्त के लोकसभा चुनाव में ‘जनता दल’ तीसरी बड़ी पार्टी थी क्योंकि इसके पास तब 46 सीटें थीं। कांग्रेस जानती थी कि उसके लिए अपने दम पर सरकार बनाना आसान नहीं होगा इसलिए वह उस वक्त जनता दल के साथ आकर खड़ी हो गई। और अपने किसी नेता का नाम आगे नहीं बढ़ाकर जनता दल के एचडी देवगौड़ा को यूनाइटेड फ्रंट का नेता घोषित कर दिया गया।

यहां ये भी जानना जरूरी है कि जिस यूनाइटेड फ्रंट के नेता एचडी देवगौड़ा चुने गए थे, उसमें 13 पार्टियां शामिल थीं और इसमें सांसदों की संख्या 192 थी। इस तरह से यूनाइटेड फ्रंट ने कांग्रेस के साथ मिलकर आसानी से केंद्र में अपनी सरकार बना ली और एचडी देवगौड़ा लोकसभा में सिर्फ 46 सीटों के बावजूद भारत के प्रधानमंत्री बन गए।

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महत्वपूर्ण बातें 

संसद और इसके संस्थानों की प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखने के लिए भी सभी ने उनकी खूब तारीफ की थी। 1975-76 में आपातकाल के दौरान इन्हें जेल में बंद रहना पड़ा था।

जब वे 1991 में हासन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने गए तब उन्होंने राज्य की समस्याओं विशेष रूप से किसानों की समस्याओं के निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवेगौड़ा ने किसानों की दुर्दशा के बारे में संसद में स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए जिसके लिए सभी ने उनकी खूब प्रशंसा की।