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राहुल ने किया पीएम मोदी से तीन सवाल, 20 निहत्थे जवानों की हत्या क्यों हुई

अपने ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने भारत और चीन की सरकारों के बयानों को साझा किया है। इससे पहले चार जुलाई को भी राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था।

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Published on: 7 July 2020 10:01 AM GMT
राहुल ने किया पीएम मोदी से तीन सवाल, 20 निहत्थे जवानों की हत्या क्यों हुई
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नई दिल्ली: भारत-चीन की सीमा पर जारी विवाद के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं। अब उन्होंने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के पीछे हटने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई बातचीत को लेकर तीन सवाल पूछे हैं। यह सवाल उन्होंने ट्वीट करके पूछा है।

राहुल गांधी के तीन सवाल

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि 'राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। भारत सरकार का कर्तव्य इसकी रक्षा करना है। इसलिए, पहला- पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? दूसरा- हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? तीसरा- गलवां घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?

चेतावनी को नजरअंदाज करना भारत को पड़ सकता है महंगा

अपने ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने भारत और चीन की सरकारों के बयानों को साझा किया है। इससे पहले चार जुलाई को भी राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि देशभक्त लद्दाखी चीनी घुसपैठ के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार से अपनी बात सुनने को कह रहे हैं। उनकी चेतावनी को नजरअंदाज करना भारत को महंगा पड़ सकता है।

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'तेजी से' पीछे हटने पर हुए सहमत

गौरतलब है कि तनाव कम होने के पहले संकेत के रूप में चीनी सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों से अपनी सीमित वापसी शुरू कर दी। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर बात की जिसमें वे एलएसी से सैनिकों के 'तेजी से' पीछे हटने की प्रक्रिया को पूरा करने पर सहमत हुए।

'जल्द से जल्द' सैनिकों का 'पूरी तरह पीछे हटना' आवश्यक

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि डोभाल और वांग के बीच रविवार को हुई वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की पूर्ण बहाली के लिए 'जल्द से जल्द' सैनिकों का 'पूरी तरह पीछे हटना' आवश्यक है तथा दोनों पक्षों को मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। डोभाल और वांग दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता से संबंधित विशेष प्रतिनिधि हैं।

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