राहुल गांधी का बड़ा हमला, कहा- PM मोदी ने किए घरेलू बजट के टुकड़े-टुकड़े

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने देशवासियों के घरेलू बजट के टूकड़े टूकड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर यह बातें कहीं।

Published by dharmendrakumar Published: January 14, 2020 | 10:05 pm
Modified: January 14, 2020 | 10:19 pm

नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने देशवासियों के घरेलू बजट के टूकड़े टूकड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर यह बातें कहीं।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि कमरतोड़ महंगाई, जानलेवा बेरोजगारी और गिरती जीडीपी ने आर्थिक आपातकाल की स्थिति बना दी है। सब्ज़ी, दाल, खाने का तेल, रसोई गैस व खाद्य पदार्थों की महंगाई ने गरीब के मुंह का निवाला छीन लिया है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने देशवासियों के घरेलू बजट के टुकड़े-टुकड़े कर दिए हैं।

कांग्रेस महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रही है। इससे पहले कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वह विपक्षी पार्टी के नेताओं के साथ एक बैठक बुलाएं और उन्हें मंहगाई रोकने के लिए सरकार के रोडमैप के बारे में जानकारी दें जो कि 2014 में यूपीए के सत्ता से बेदखल होने के बाद काफी ऊंचाई पर पहुंच गई है।

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि एक महीने में महंगाई को रोकने के लिए क्या रोडमैप है? रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल विभाजनकारी बातों में लगे हुए हैं और देश के सामने खड़े महत्वपूर्ण मुद्दों से नहीं निपट रहे हैं।

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आंकड़ों के मुताबिक साल-दर-साल आधार पर, खुदरा महंगाई दर सोमवार को साढ़े पांच साल के उच्चतम स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सोमवार को विपक्ष ने एक प्रस्ताव पारित किया, जहां राजनीतिक दलों ने सरकार द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के पूर्ण कुप्रबंधन के कारण लोगों की आजीविका की स्थिति में व्यापक रूप से गिरावट पर चिंता व्यक्त की।

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इस प्रस्ताव में कहा गया है कि आर्थिक संकट ने अर्थव्यवस्था को देश की जीडीपी में गिरावट के साथ मंदी के कगार पर धकेल दिया है और पिछली आधी सदी में बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है। किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के साथ कृषि संकट गहराता जा रहा है, बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयों में बंदी या छंटनी हुई है। पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस, सब्जियों और सभी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने लोगों के जीवन को दुश्वर बना दिया है।