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पंचायत चुनाव में नए सिरे से हो सकता है आरक्षण: पंचायतीराज निदेशालय

सूत्रों के अनुसार 2015 में जो सीट आरक्षित थी, इस बार उन्हें रिजर्व नही किया जाएगा। आरक्षण में बदलाव का काम जिला स्तर पर किया जाएगा।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 5 Jan 2021 7:15 AM GMT

पंचायत चुनाव में नए सिरे से हो सकता है आरक्षण: पंचायतीराज निदेशालय
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पंचायत चुनाव में नए सिरे से हो सकता है आरक्षण: पंचायतीराज निदेशालय (PC: social media)
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लखनऊ: यूपी में जल्द होने वाले पंचायत चुनाव के लिए एक बार फिर से ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतों का नए सिरे से आरक्षण किया जाएगा। पंचायतीराज निदेशालय ने शासन को इसका फार्मूला भेज दिया है। शासन ने अगर प्रदान की मंजूरी तो ग्राम व जिला पंचायत सीटो के आरक्षण में बदलाव किया जाएगा।

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2015 में जो सीट आरक्षित थी, इस बार उन्हें रिजर्व नही किया जाएगा

सूत्रों के अनुसार 2015 में जो सीट आरक्षित थी, इस बार उन्हें रिजर्व नही किया जाएगा। आरक्षण में बदलाव का काम जिला स्तर पर किया जाएगा। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट का आरक्षण शासन स्तर पर होगा। आरक्षण का काम जिलाधिकारी ग्राम पंचायत जिला पंचायत स्तर पर करेगें।

एक अधिकारी ने बताया कि एस सी ओबीसी की पिछली बार की आरक्षित सीटों में बदलाव किया जाएगा। 1995 में कौन सी ग्राम पंचायत किस वर्ग के लिए आरक्षित थी इसके बाद चक्र के हिसाब से बदलाव होगा।

आरक्षण का निर्धारण चक्रानुक्रम में किया जाएगा

एससी, एसटी और पिछड़े वर्ग के लिए प्रधानों के आरक्षित पदों की संख्या उस ब्लॉक में अलग-अलग पंचायतों में उस वर्ग की आबादी के अनुपात में आवंटित की जाएगी। आरक्षण का निर्धारण चक्रानुक्रम में किया जाएगा, लेकिन 2015 में जो पंचायत एससी या एसटी के लिए आरक्षित थी, उन्हें इस बार एससी या एसटी के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा।

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पंचायतीराज विभाग ने अभी तक शहरी क्षेत्र में पूरी या आंशिक रूप से शामिल की जा चुकीं पंचायतों के ब्यौरे को अंतिम रूप नहीं दिया है। आंशिक परिसीमन के बाद ही वार्डों का नए सिरे से निर्धारण होगा और फिर आरक्षण तय किया जाएगा। इस काम में करीब दो महीने का समय लगेगा। इस तरह से दिसम्बर व जनवरी वोटर लिस्ट, परिसीमन व आरक्षण निर्धारण आदि में ही लग जाएंगे।

रिपोर्ट- श्रीधर अग्निहोत्री

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