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बंगाल में भाजपा ने अभी तक नहीं खोले पत्ते, जानिए क्या है इसका कारण

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की सबसे पहले घोषणा करके बाजी मार ली है। टीएमसी उम्मीदवारों के एलान के बाद राज्य में सियासी हलचल काफी तेज हो गई है।

Ashiki Patel

Ashiki PatelBy Ashiki Patel

Published on 6 March 2021 5:46 AM GMT

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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की सबसे पहले घोषणा करके बाजी मार ली है। टीएमसी उम्मीदवारों के एलान के बाद राज्य में सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। अब हर किसी की नजर भाजपा के उम्मीदवारों पर टिकी है मगर भाजपा ने अभी तक चुनाव के लिए अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

पार्टी से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस समय पार्टी का पूरा फोकस रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली पर है। इस रैली में दस लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है और पार्टी ने इस रैली को कामयाब बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।

ये भी पढ़ें: ममता को मुस्लिम उम्मीदवारों पर भरोसा कम, वोट के लिए उठाया ये कदम

लंबे मंथन के बाद भी सूची नहीं

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की गुरुवार देर रात तक बैठक चली थी और इस बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर लंबा मंथन भी किया गया था। इस बैठक के बाद भाजपा की ओर से शुक्रवार को असम के 70 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी गई मगर पश्चिम बंगाल विधानसभा के संबंध में भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। केंद्रीय चुनाव समिति की शुक्रवार को भी बैठक होने वाली थी मगर बाद में इस बैठक को रद्द कर दिया गया।

Mamata and BJP's political war in Bengal-2

पार्टी का सारा जोर पीएम की रैली पर

जानकार सूत्रों के अनुसार पार्टी ने इस समय सारा जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को होने वाली रैली पर लगा रखा है। इस रैली के जरिए पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार का विधिवत आगाज करेगी। फरवरी महीने में भाजपा की ओर से राज्य में परिवर्तन यात्राएं निकाली गई थीं और इस रैली का आयोजन परिवर्तन में यात्राओं के समापन के मौके पर किया जा रहा है। भाजपा की ओर से इस रैली में दस लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है और भाजपा के राज्य स्तरीय सभी नेता इस रैली में अधिक से अधिक लोगों की भीड़ जुटाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

त्रिकोणीय मुकाबले से भाजपा को होगा फायदा

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 200 सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर रखा है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी नेताओं को पूरी ताकत लगानी पड़ रही है। चुनाव समिति की बैठक में राज्य की सियासी स्थितियों पर भी चर्चा की गई। जानकारों के मुताबिक भाजपा की नजर में राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन रही है और पार्टी इस स्थिति को अपने लिए अच्छा मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में वोटों का ब॔टवारा होगा जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

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पीएम के नाम और काम का सहारा

भाजपा के लिए सबसे बड़ी दिक्कत सीएम पद का चेहरा न होना है। पार्टी की ओर से अभी तक किसी को सीएम पद का चेहरा नहीं बनाया गया है और पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम पर ही चुनाव मैदान में उतर रही है। भाजपा पश्चिम बंगाल की सत्ता में कभी नहीं रही है। ऐसे में पार्टी केंद्र की उपलब्धियों और योजनाओं के जरिए मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में जुटी हुई है।

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भाजपा नेता अपनी सभाओं में आरोप लगाते रहे हैं कि ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों तक केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने दिया। पार्टी का वादा है कि भाजपा के सत्ता में आने पर केंद्र की सारी योजनाएं पश्चिम बंगाल में लागू की जाएंगी।

मिथुन चक्रवर्ती और सौरव पर टिकीं निगाहें

रविवार को होने वाली पार्टी की रैली में सिने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती और मशहूर क्रिकेटर और बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली के भी हिस्सा लेने की संभावना है। मिथुन और सौरव को पश्चिम बंगाल में बड़ा आइकन माना जाता है। जानकारों के मुताबिक यदि इन दोनों ने भाजपा को समर्थन दिया तो निश्चित रूप से पार्टी को बड़ा सियासी फायदा हो सकता है। मिथुन चक्रवर्ती ने पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख से मुलाकात भी की थी। सौरव गांगुली भी पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा कर चुके हैं मगर अपनी सियासी पारी के संबंध में उन्होंने अभी तक चुप्पी साध रखी है।

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