TIPS: ऐसे करें परवरिश कि आपका बच्चा मजबूत बनें, मजबूर नहीं

आज के समय में बच्चों, की परवरिश कैसे करें, यह बात अभिभावकों, के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जहां आधुनिक अभिभावक चाहते है की उनका बच्चा, किसी भी स्थिति में किसी से कम नहीं हो, और बस इसी भागदौड़ मे लगे रहते हैं।

Published by suman Published: May 13, 2020 | 11:24 pm

जयपुर:  आज के समय में बच्चों, की परवरिश कैसे करें, यह बात अभिभावकों, के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जहां आधुनिक अभिभावक चाहते है की उनका बच्चा, किसी भी स्थिति में किसी से कम नहीं हो, और बस इसी भागदौड़ मे लगे रहते हैं।

सामान्यत पेरेंट्स के लिए बच्चों का खानपान, पहनावा, सही समय पर पढ़ाई कराना, यही परवरिश की परिभाषा है। लेकिन क्या कभी हम यह सोचते हैं, की हम बच्चों को कैसे संस्कार दे रहे हैं, उनको क्या सिखा रहे हैं जिससे, उनके अंदर अच्छी आदतों का विकास हो, और बच्चा सभ्य इंसान बन सके।

 

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धर्मशास्त्रों वेदों, में भी बच्चों की परवरिश की सीख दी गई है। उसे तीन भागों में बांटा गया है..

* कहते हैं कि 1 साल से 5 साल तक के बच्चों की बहुत ही लाड प्यार लालन पालन करना चाहिए। 6 से 15 साल के बच्चों को अनुशासन के साथ पालना चाहिए। इसी समय पर बच्चों को यह बताने की जरूरत होती है कि हमारे परिवार के संस्कार क्या है, सिद्धांत और मूल्य क्या है।
* उसके बाद 16 से 30 साल के बच्चों, के साथ माता पिता को, मित्र बनकर रहना चाहिए, व्यवहार जिससे कि बच्चे, अपने दिल की हर बात मां बाप से खुलकर करें। इस प्रकार से अगर हम अपने बच्चे, की परवरिश करते हैं, तो निश्चित रूप से बच्चा सभ्य और कामयाब इंसान बनेगा।

*जब बच्चा ज्यादा जिद करें तो उसकी बातों की अनदेखी करें। ऐसा करने पर बच्चे को भी लगेगा कि आप उसकी बातों को महत्व नहीं दे रहें हैं तो फिर से वह कभी जिद नहीं करेगा।

 

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*अगर उसे सीमाएं लांघने की एक बार अनुमति दे दी तो फिर उसे इसकी आदत लग जाएगी। फिर बच्चा बार-बार अपनी पसंद को मनवाने के लिए यही रूख अपनाएगा। अगर आप कभी उसकी बातों को मानेंगे और कभी नहीं तो ऐसे में बच्चे के अंदर चिड़चिड़ापन की भावना आती है। वह असंतोष महसूस करता है। यही वजह है कि अपनी तय की गई सीमाओं पर अडिग रहें ताकि बच्चे को भी इसकी आदत लग जाए। अगर आप प्यार से भी बच्चे को समझाएंगे तो वह जरूर आपकी बातों को समझेगा।

*परवरिश बहुत मुश्किल व जिम्मेदारी भरा काम है। इस ड्यूटी के पालन में आपके समक्ष कई सारी परेशानियां भी आती हैं। पर इन सबको पार करते हुए आपको अपनी ड्यूटी का दायित्वपूर्ण निर्वहन करना है। आप तभी एक सफल अभिभावक बन सकते हैं।