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झूठ मूठ का बाज़ारः सोशल मीडिया पर समय के साथ चलिए वरना ?

हमारे फैक्ट्स चेक में यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया पर अनेक बातें अतिरंजित और कपोलकल्पित होती हैं जो कि वास्तविकता के धरातल से कोसों दूर होती हैं। सोशल मीडिया पर जो परोसा जा रहा होता है वास्तविकता उससे अलग कुछ और ही कहानी बयां करती दिखाई देती है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 10 Oct 2020 10:15 AM GMT

झूठ मूठ का बाज़ारः सोशल मीडिया पर समय के साथ चलिए वरना ?
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Market of lies: Go with time on social media or else?
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योगेश मिश्र

न्यूजट्रैक ने सोशल मीडिया पर चलने वाले टैक्स्ट और फैक्ट्स को चेक किया है और इसे अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं हमारी कोशिश होगी कि हम भविष्य में भी इस तरह से सोशल मीडिया पर चलने वाले फैक्ट्स और टैक्स्ट्स को चेक करके अपने पाठकों तक पहुंचाते रहें।

क्या चल रहा है सोशल मीडिया पर

1998 में Kodak में 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे। जो दुनिया का 85% फ़ोटो पेपर बेचते थे। चंद सालों में ही Digital photography ने उनको बाज़ार से बाहर कर दिया। Kodak दिवालिया हो गयी और उनके सब कर्मचारी सड़क पे आ गए।

HMT (घडी)

BAJAJ (स्कूटर)

DYNORA (टीवी)

MURPHY (रेडियो)

NOKIA (मोबाइल)

RAJDOOT (बाईक)

AMBASDOR (कार)

मित्रों,

इन सभी की गुणवक्ता में कोई कमी नहीं थी फिर भी बाजार से बाहर हो गए!!

कारण?

उन्होंने समय के साथ बदलाव नहीं किया.!

आपको अंदाजा है कि आने वाले 10 सालों में दुनिया पूरी तरह बदल जायेगी। आज चलने वाले 70 से 90% उद्योग बंद हो जायेंगे।

चौथी औद्योगिक क्रान्ति में आपका स्वागत है...

Uber सिर्फ एक software है। उनकी अपनी खुद की एक भी Car नहीं है। इसके बावजूद वह दुनिया की सबसे बड़ी Taxi Company है।

Airbnb दुनिया की सबसे बड़ी Hotel Company है, जब कि उनके पास अपना खुद का एक भी होटल नहीं है।

Paytm, ola cabs , oyo rooms जैसे अनेक उदाहरण हैं।

US में अब युवा वकीलों के लिए कोई काम नहीं बचा है, क्यों कि IBM Watson नामक Software पल भर में ज़्यादा बेहतर Legal Advice दे देता है।

अगले 10 साल में US के 90% वकील बेरोजगार हो जायेंगे। जो 10% बचेंगे । वो Super Specialists होंगे।

Watson नामक Software मनुष्य की तुलना में Cancer का Diagnosis 4 गुना ज़्यादा Accuracy से करता है।

2030 तक Computer मनुष्य से ज़्यादा Intelligent हो जाएगा।

अगले 10 सालों में दुनिया भर की सड़कों से 90% cars गायब हो जायेंगीं। जो बचेंगी वो या तो Electric Cars होंगी या फिर Hybrid कारें।

सडकें खाली होंगी, Petrol की खपत 90% घट जायेगी, सारे अरब देश दिवालिया हो जायेंगे।

आप Uber जैसे एक Software से Car मंगाएंगे और कुछ ही क्षणों में एक Driverless कार आपके दरवाज़े पे खड़ी होगी। उसे यदि आप किसी के साथ शेयर कर लेंगे तो वो ride आपकी Bike से भी सस्ती पड़ेगी।

Cars के Driverless होने के कारण 99% Accidents होने बंद हो जायेंगे। इस से Car Insurance नामक धन्धा बंद हो जाएगा।

ड्राईवर जैसा कोई रोज़गार धरती पे नहीं बचेगा। जब शहरों और सड़कों से 90% Cars गायब हो जायेंगी, तो Traffic और Parking जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जायेंगी। क्योंकि एक कार आज की 20 Cars के बराबर होगी।

आज से 5 या 10 साल पहले ऐसी कोई ऐसी जगह नहीं होती थी जहां PCO न हो। फिर जब सब की जेब में मोबाइल फोन आ गया, तो PCO बंद होने लगे। फिर उन सब PCO वालों ने फोन का recharge बेचना शुरू कर दिया। अब तो रिचार्ज भी ऑन लाइन होने लगा है।

आपने कभी ध्यान दिया है..?

आजकल बाज़ार में हर तीसरी दुकान मोबाइल फोन की है।

sale, service, recharge , accessories, repair, maintenance की।

अब सब Paytm से हो जाता है। अब तो लोग रेल का टिकट भी अपने फोन से ही बुक कराने लगे हैं। अब पैसे का लेनदेन भी बदल रहा है।

Currency Note की जगह पहले Plastic Money ने ली और अब Digital हो गया है लेनदेन।

दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है.. आँख कान नाक खुले रखिये वरना आप पीछे छूट जायेंगे।

समय के साथ बदलने की तैयारी करें।

इसलिए...

व्यक्ति को समयानुसार अपने व्यापार एवं अपने स्वभाव में भी बदलाव करते रहना चाहिये।

"Time to Time Update & Upgrade"

समय के साथ चलिये और सफलता पाईये ।

( बीते कई दिनों से सोशल मीडिया पर यह टैक्सट चल रहा है। जैसा चल रहा है। हमने उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। अंग्रेज़ी के शब्दों को हिंदी में भी नहीं लिखा है। क्योंकि हो सकता है आप में से तमाम लोगों के पास यह टैक्सट पहुँचा हो। सोशल मीडिया पर चलने वाली चीजों पर यक़ीन स्वाभाविक है। वह भी तब जब किसी के व्यक्तित्व व कृतित्व को ढहाया न जा रहा हो। हमने इस टैक्सट का फैक्ट चेक किया है। फैक्ट आपके सामने ला रहे हैं।)

अब आते हैं फैक्ट्स चेक पर

डिजिटल कैमरा के सामने कोडक कंपनी ने अपने को थोड़ा देर में बदला। कोडक ने भी डिजिटल कैमरा बनाये। लेकिन जापानी टेक्नोलॉजी के सामने यह टिक नहीं पाया। कोडक ने अपने को 2012 में दिवालिया घोषित किया था । लेकिन 2013 में ही यह वापस बिजनेस में आ गयी। कंपनी अब भी फोटोग्राफी मेटेरिअल बनाती और बेचती है। कोडक के टीवी भी बनते हैं।

एचएमटी कंपनी का घड़ी बनाने और बेचने का बिजनेस सरकारी मिसमैनेजमेंट की वजह से ठप हो गया। वैसे एचएमटी अब भी कायम है। इसकी भारत में 6 जगह फैक्ट्री हैं । जहाँ इंडस्ट्रियल मशीन और टूल्स का निर्माण होता है। घड़ी का बिजनेस और प्लांट्स 2016 में बंद कर दिए गए थे।

आर्थिक सुधारों के कारण विदेशी बाइक कम्पनियाँ भारत में आ गयीं तो बजाज कम्पटीशन झेल नहीं पाया। सिर्फ मोनोपोली के दम पर बाजार में छाये बजाज का बिजनेस मंदा हो गया। बजाज ने स्कूटर्स निर्माण 2005 से 2019 तक बंद रखा। अब फिर से चेतक ब्रांड इलेक्ट्रिक स्कूटर बनने लगे हैं । जिनका यूरोप में भी एक्सपोर्ट किया जाता है।

ये कंपनियां हुईं बंद

डायनोरा टीवी की कंपनी डायनाविज़न तमिलनाडु सरकार के साथ एक जॉइंट पब्लिक सेक्टर कंपनी थी। 1972 में इसने ब्लैक एंड व्हाइट टीवी और 82 में कलर टीवी बनाना शुरू किया। 1994 के बाद से ये अमेरिका की थोमसन इलेक्ट्रॉनिक के लिए टीवी, ऑडियो आदि उपकरण बनाने लगी। 2004 में थोमसन ने भारत में बिजनेस बंद कर दिया तो डायनोरा भी बंद हो गयी।

मर्फी रेडियो ब्रिटिश कंपनी थी जो 1929 में शुरू हुई थी। 1962 में यह बुश रेडियो कंपनी में मर्ज हो गयी। 1978 में बुश का तोशिबा के साथ संयुक्त उपक्रम हुआ। बाद में यह भी बंद हो गयी।

नोकिया मोबाइल सिर्फ एंड्राइड सॉफ्टवेयर को नहीं अपनाने की जिद में मार्किट से बाहर हो गया। बाद में इसने मोबाइल में विंडोज सॉफ्टवेर अपनाया जो एंड्राइड के सामने टिक नहीं सका। नोकिया कंपनी अब भी चल रही है। मोबाइल, टेलिकॉम उपकरण वगैरह बनते हैं।

इन कंपनियों को लगा झटका

एस्कॉर्ट्स ग्रुप का बाइक बिजनेस भी मुक्त बाजार व्यवस्था को झेल नहीं पाया। राजदूत बाइक को एस्कॉर्ट्स ग्रुप बनाता था। बाद में इनका याहमा से टाईअप हो गया। लेकिन जापानी बाइक कंपनियों के आगे राजदूत कम्पटीशन नहीं कर पाया। कंपनी ने भी बाइक बिजनेस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। आज एस्कॉर्ट्स हेवी मशीन और ट्रेक्टर के मूल बजनेस में कायम है।

अम्बेसडर को बिरला कंपनी बनाती थी। सरकार से लॉबिंग करके बिरला और वालचंद (फ़िएट कार वाले) ने भारत में विदेशी कार निर्माताओं को आने ही नहीं दिया, जिस वजह से सरकारी खरीद में अम्बेसडर की मोनोपोली दशकों तक रही। जब आर्थिक सुधर हुए तो अम्बेसडर चल नहीं पायी क्योंकि इस कार कंपनी ने अपने प्रोडक्ट में रत्ती भर सुधर नहीं किया था।

उबर, एयरबीएनबी, ओयो सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि एग्रीगेटर कम्पनियाँ हैं। ये भी एक बिजनेस मॉडल है जो फिलहाल घाटे में ही चल रहा है।

वकील बेकार हुए कहना गलत

आईबीएम वाटसन एक आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेर है जिसका इस्तेमाल फेफड़े के कैंसर से सम्बंधित सवालों के जवाब ढूढने में किया जा रहा है। इसके अलावा इसमें लीगल जानकारियाँ भी हैं जैसी कि पुराने केस आदि।

लेकिन यह कहना कि अमेरिका में वकील बेकार हो गए हैं, एकदम गलत है। क्योंकि यह सॉफ्टवेर वकीलों की मदद के लिए ही बना है। वकील इससे पुराने केस, जजमेंट आदि बहुत कम समय में पा जाते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन आयेंगे लेकिन पेट्रोल डीजल वाहन गायब नहीं होने वाले। एक अनुमान है कि तीस साल बाद यानी 2040 में आधी नयी कारें इलेक्ट्रिक होंगी। बिना ड्राईवर की कार पर अभी बहुत काम हो रहा है ।.लेकिन यह आने वाले दशकों तक कुल कारों की 10 फीसदी ही हो पाएंगी। फोर्ड, टोयोटा, जेनेरल मोटर्स आदि बड़ी बड़ी कम्पनियाँ अभी प्लानिंग की स्टेज में है।

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