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बागपत में अजित सिंह के चुनाव लड़ने पर कभी 'ना' कभी 'हां'

Charu Khare

Charu KhareBy Charu Khare

Published on 25 July 2018 5:25 AM GMT

बागपत में अजित सिंह के चुनाव लड़ने पर कभी ना कभी हां
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मेरठ : राष्ट्रीय लोकदल मुखिया चौधरी अजित सिंह को आज अपनी ही कही बात पर कुछ ही घंटों बाद सफाई देनी पड़ गई। दरअसल, बागपत में पार्टी की चुनाव समीक्षा बैठक में पहुंचे अजित सिंह से स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों ने पहला सवाल बागपत से चुनाव लड़ने की बावत पूछा तो जवाब में मुस्कारते हुए अजित सिंह ने कह दिया कि मैं तो चुनाव लड़ूगा ही नही।

अजित सिंह ने 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने की बात को नकारते हुए कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, अब 80 साल का हो गया हूँ। अब और चुनाव नहीं। अजित सिंह का यह कहना था कि इलेक्ट्रानिक्स चैनलों और समाचार पत्रों की वेब साइटों पर अजित के 2019 का चुनाव ना लड़ने की बात प्रसारित होने लगी। जिसके बाद एकाएक नींद से जागने के अंदाज में अजित सिंह ने अपनी ही बात को नकारते हुए कहा कि मैंने कभी नही यह कहा कि मैं चुनाव लड़ूगा।

न्यूजट्रैक-अपना भारत से बातचीत में अजित सिंह ने कहा कि मीडिया की मर्जी है कि वह कुछ भी छापे और प्रसारित करें। लेकिन,मैने चुनाव नही लड़ने की बात नही कही है। बकौल अजित सिंह मैने तो मीडिया वालों के इस सवाल पर की चुनाव कहां से लड़ोगे के जवाब में सिर्फ इतना ही कहा था कि अभी चुनाव करीब एक साल दूर हैं। इसलिए अभी कुछ तय नही है। चुनाव के नजदीक आने पर ही चुनाव संबंधी बात की जायेगी। फिलहाल तो में यहां फरवरी से सदभावना यात्रा अभियान में लगा हूं। मेरा यहां आने का मकसद यह नही है कि कौन कहां से चुनाव लड़ रहा है।

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मीडिया से बातचीत में अजीत सिंह ने महागठबंधन को समय की जरूरत भी बताया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के तहत 2019 का चुनाव लडऩा हर दल की मजबूरी है। अगर अगला लोकसभा चुनाव कोई दल अकेला लड़ता है तो वह समाप्त हो जाएगा। भाजपा से गठबंधन के सवाल पर अजित सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता। रालोद मुखिया ने कहा कि रालोद भाजपा के खिलाफ बन रहे महागठबंधन के साथ मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी। अुजत सिंह ने कहा कि परिवर्तन की बयार बहनी शुरू हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। देश में भाजपा का नहीं आरएसएस का राज चल रहा है।

अजित सिंह ने कहा कि भाजपा लोगों को बरगलाने और नफरत की सियासत कर रही है। वह हिंदू-मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदूओं को भी जातिगत आधार पर बांटकर लड़ाने का काम कर रही है। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष नहीं बल्कि पीएम की हार हुई है, क्योंकि राहुल गांधी पीएम मोदी के गले लग यह संदेश देने में सफल रहे कि हम प्यार की सियासत करते हैं और भाजपा नफरत की राजनीति करती है। मोदी के चार साल के कार्यकाल में किसान और मजदूर समेत हर वर्ग परेशान है। गन्ना समर्थन मूल्य में 20 रुपये प्रति कुंतल बढ़ाने की घोषणा की गई लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को महज 6.42 रुपये प्रति कुंतल का बढ़ा दाम मिलेगा।

केंद्र सरकार के सात हजार करोड़ के गन्ना पैकेज को ढकोसला बताते हुए कहा कि किसानों को इससे रत्तीभर फायदा नहीं मिलने वाला। भाजपा नफरत की सियासत करती है और हम प्यार की राजनीति करते हैं। मुजफ्फरनगर में हमने जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत करने की शुरूआत की थी उसी का नतीजा है कैराना लोकसभा उपचुनाव में तबस्सुम बेगम की जीत हुई। अजित ने कहा कि देश के असल मुद्दो से ध्यान हटाने को भाजपा दंगे कराने के सिवा कोई काम नहीं करती। मोदी हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा पूरा नहीं कर पाए अब देश में भाजपा विरोधी की आंधी चल रही है।

इससे पहले बागपत के पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में अजित सिंह ने कार्यकर्ता के साथ बैठक भी की। बताया जाता है कि इस दौरान बैठक में चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई। लेकिन इस बैठक में चुनिंदा कार्यकर्ताओं को ही चौधरी अजित सिंह से मिलने इजाजत दी गई।

बैठक के दौरान आरएलडी के कोई भी बड़े नेता नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि यह बैठक अजित सिंह सीधे ही कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए कर रहे हैं, ताकि आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा सके। यही वजह है कि बड़े नेताओं से मिलने के बजाय अजित सिंह सीधे कार्यकर्ताओं से रूबरू हो रहे हैं। दरअसल, यह बताया जा रहा है कि अजित सिंह चाहते हैं कि धरातल पर होने वाली किसी भी परेशानी को समय से पहले दूर किया जा सके।

इसके लिए बैठक में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश को निषेध किया गया है। बैठक के दौरान पहुंचे मीडियाकर्मियों को भी इस बैठक से दूर रखा गया। हालांकि ,गेस्ट हाउस के अंदर और बाहर काफी भीड़ मौजूद रही। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि चौधरी अजित सिंह 2019 चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है।

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लोकसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रदेश में सियासत गरमाने लगी है। अपनी पुस्तैनी सियासी जमीन खो चुके राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह मंगलवार को बागपत पहुंचे। थे। पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव राजकुमार सांगवान के अनुसार अजीत सिंह के दौरे का मुख्य उद्देश्य हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे को फिर से पुनर्जीवित करना है।

यहां बता दें कि बागपत अजित सिंह की लोक सभा सीट रही है। वे इसी क्षेत्र से बार-बार जीतते रहे हैं। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की आंधी में वे अपनी सीट भी नहीं बचा पाए थे। दरअसल, 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जाट और मुस्लिं के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा की वजह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ने हिंदू और मुस्लिमों के वोट को पूरी तरह से बंट गया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ और इसकी कीमत चौधरी अजित सिंह को चुकानी पड़ी। यही वजह है कि चौधरी अजित सिंह अब हिन्दू-मुस्लिमों के बीच की खाई को बांटने में जुट गए हैं।

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