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Bihar Diwas: बिहार के Real Heroes ये, कोई बचाता जिंदगी, कोई संवार रहा भविष्य

Newstrack.Com आपको ऐसी शख्सियतों के बारे में बताने जा रहा है, जो न केवल बिहार का नाम रोशन कर रहे, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गए हैं। जिन्हें 'बिहार का रियल हीरो' कहा जा सकता है। 

Shivani

ShivaniBy Shivani

Published on 22 March 2021 10:28 AM GMT

Bihar Diwas: बिहार के Real Heroes ये, कोई बचाता जिंदगी, कोई संवार रहा भविष्य
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पटनाः 22 मार्च यानी आज बिहार दिवस (Bihar Diwas) है। Newstrack.Com आपको ऐसी शख्सियतों के बारे में बताने जा रहा है, जो न केवल बिहार का नाम रोशन कर रहे, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गए हैं। जिन्हें 'बिहार का रियल हीरो' कहा जा सकता है।

1 सुपर 30 वाले अभयानंद और आनंद कुमार-

अभयानंद और आनंद कुमार ने शिक्षा में ऐसी लकीर खीच दी जिससे आज पुरी दुनिया उन्हें सलाम कर रहा। एक पर बना फिल्म परीक्षा तो दुसरे पर सुपर 30।

अभयानंद बताते हैं कि उनके अभयानंद, रहमानी,मगध सुपर थर्टी और देश के बाहर सीएसआर के तहत चल रहे संस्थानों से 2000 से अधिक स्टूडेंट्स ने आइआइटी क्रैक किया है। वह कहते हैं कि मेरी यह धारणा बन रही है कि अब हर समाज के लोग यह कोशिश कर रहे हैं बच्चे पढ़ें। उन्हें यह समझ में आ गया है कि यह सरकार के बूते की बात नहीं। समाज की मदद से ही आंकड़ा बढ़ रहा है। यह अच्छा है।

ये भी पढ़ें- बिहार: ‘का बा’ का जवाब है आनंद कुमार, तथागत, सत्यम कुमार और आरके श्रीवास्तव

बिजी शिड्यूस से वक्त निकालकर प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर-30 में फिजिक्स पढ़ाना शुरू किया। वहां बच्चे उन्हें आइजी अंकल कहते थे। एडीजी बनने के बाद भी बच्चे उन्हें इसी नाम से पुकारते थे।

उनके शिक्षक रहते सुपर-30 आइआइटी को रिकार्डतोड़ सफलता मिली। फिर कुछ कारणों से अभयानंद सुपर-30 से अलग हो गए और इसी साल आइजी अंकल के पढाने के जुनून के कारण ही रहमानी सुपर 30 की स्थापना हुई। इसके बच्चे हर साल आइआइटी में अपनी सफलता का परचम लहराते रहे हैं, यह अभयानंद जी का ही कमाल है।

रिटायरमेंट के बाद और मेहनत की

सुपर-30 से अलग होने के बाद उन्होंने मुस्लिम बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई। यहीं से जन्म हुआ रहमानी सुपर 30 का। वली रहमानी ने जगह उपलब्ध करायी इसीलिए इसका नाम रहमानी सुपर 30 पडा। मुस्लिम बच्चों ने भी सफलता हासिल की। बच्चों के आइजी अंकल एडीजी हुए और डीजीपी होने के बाद कुछ वर्ष पहले रिटायर भी हो गए हैं मगर पढ़ाने और पढऩे का सिलसिला आज भी लगातार जारी है।

2- खान सर बने सोशल मीडिया के हीरो-

बिहार की राजधानी पटना के खान सर पूरे देश में अपने पढ़ाने के स्टाईल को लेकर पहचान बना चुके हैं। यूट्यूब इंडिया ने देश के Top-10 Creators 2020 के लिस्ट में खान सर को भी जगह दिया है। यूट्यूब इंडिया के तरफ से ट्वीट करके इसकी जानकारी दी गई। खान सर को यूट्यूब क्रिएटर के रूप में इंडिया में 8वां स्थान मिला है जो कि एक बड़ी उपलब्धि है।

खान सर ने 2019 में यूट्यूब ज्वाइन किया था। अब करीब करीब 5 मिलीयन से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाला यूट्यूब चैनल बन चुका है। खान सर के यूट्यूब चैनल का नाम यूट्यूब पर खान जीएस रिसर्च सेंटर के नाम से है जहां पर उनके चैनल पर अब तक 249 से अधिक वीडियो है ।

पढ़ाने के तरीके के फैन्स बने लोग

यूजर्स टीचर के पढ़ाने के तरीके की तारीफ करते दिखते रहे हैं, यहां तक कि उनके वीडियो को आईपीएस अरुण बोथरा अपने ट्विटर हैंडल से शेयर कर चुके है. वीडियो के साथ अरुण बोथरा ने लिखा था कि ‘अगर मुझे ऐसा शिक्षक मिला होता तो मैंने यूपीएससी टॉप कर लिया होता’, सबसे बड़ी बात कि वो सभी बातें एकदम देसी स्टाइल में बताते हैं। शायद यही वजह है कि लोग इस शिक्षक के पढ़ाने के अंदाज के फैन हो गए हैं।

3- एक बिहारी कैसे बन गया ‘बीमारों का मसीहा’

बेकसों की बेकसी को देख कर, जब नहीं अपने सुखों को खो सके।

तब चले क्या लोग सेवा के लिए, जब न सेवा पर निछावर हो सके।

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की प्रसिद्ध कविता की ये पंक्तियां उन लोगों पर फिट बैठती हैं, जो किसी आपदा में जब सेवा कर नाम कमाने की होड़ लगती है तो 4 आने का सामान देकर 10 आने की पब्लिसिटी कर लेते हैं। सोशल मीडिया पर खूब फोटो शेयर करते हैं।

एक गुमनाम सेल्स मैन

लेकिन इन सबसे अलग एक गुमनाम सेल्स मैन भी हैं, जिन्होंने बचपन से न जाने कितने आवारा पशु और सड़क पर तड़प रहे बीमार, बेसहारा लोगों का इलाज करा कर उन्हें नया जीवन दिया। जिन जख्मों की बदबू से लोग दूर भागते हैं, वहां पटना के राजीव नगर निवासी विवेक विश्वास मरहम-पट्‌टी लेकर पहुंच जाते हैं। अस्पताल ले जाकर अपनी देखरेख में तब तक इलाज कराते हैं, जब तक कि वह पूरी तरह से ठीक ना हो जाए।

4- बिहारी हॉकी खिलाड़ी अपने आविष्कारों से बन गया ‘क्रिएटिव मैन’-

हॉकी के नेशनल खिलाड़ी योगेश कुमार ने बिहार के मान को बढ़ाया। राष्ट्रीय स्तर के हॉकी प्लेयर कोच और अंपायरिंग कर चुके योगेश ने बिहार में हॉकी को लड़कियों से जोड़ने का काम किा। फिलहाल योगेश अकाउंटेंट जेनरल ऑडिट पटना ऑफिस में ऑडिटर हैं। योगेश ने 100 खिलाड़ी दिए, जिन्होंने हॉकी का नेशनल खेला। इनमें एक नाम अजितेश राय का है, जिन्होने हॉकी का इंटरनेशनल खेला और सीनियर हॉकी टीम के कैप्टन भी बने। योगेश नें रेलवे, DPS, केन्द्रीय विद्यालय, DAV आदि कई संस्थानों में कोच के रूप में ट्रेनिंग दी है।

मेडी रॉबोट PHC पर लगाएं जाएं तो अस्पतालों पर मरीजों का भार कमेगा

उनकी एक बड़ी पहचान आविष्कारक की भी है, जो आम लोगों की दिनचर्या को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए काम के लिए कुछ न कुछ नया बनाने के प्रयास में रहते हैं। उन्होंने मेडिकल पर्पस से मेडी रोबोट बनाया। कोरोना काल में जब वे वर्क फ्रॉम होम करने लगे, तब अपनी दोनो बेटियो के साथ मिलकर उन्होने एक ऐसा रोबोट बनाया जो कोरोना काल में लोगो की मदद कर सकें।

यह आम रोबोट की तरह ट्रांसपोर्टेशन है, जिसमें दवा, ऑक्सीजन, पानी, भोजन आदि तो पहुंचाता ही है। साथ ही यह सर्विलांस का काम भी करता है। इसमें कैमरा और टैब लगा है। डॉक्टर दूर बैठे-बैठे ही पेशेंट से बात कर सकते हैं और मरीज डॉक्टर को देखते हुए अपनी बात बताता रहता है। यह सब लाइव होता है।

5- ‘लावारिस लाशों का मसीहा’ बना बिहारी बाबू-

बिहार में अस्पताल में लावारिस लाश की दुर्दशा देख विजय नाम के शख्स ने कोरोना काल में शवों के लिए बड़ा कदम उठाया। 1985 से उन्होने लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया, जो कोरोना काल में भी बंद नहीं हुआ। लावारिस लाश की सूचना मिलते ही विजय ने विधि विधान से शव का अंतिम संस्कार कराते है। इतना ही नही वे 15 सालों से हर दिन एक हजार से अधिक गरीबों को 15 रुपए में भरपेट भोजन भी करा रहे हैं।

6- ‘पैड वुमेन’ अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा

पीरियड्स से जुड़े मिथक महिलाओं की दुर्दशा और जागरूकता के अभाव में लापरवाही स्वास्थ्य के लिए घातक है। ऐसे में बिहार से उभर कर निकली दो महिलाओं अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा ने पीरियड्स को लेकर जागरूक करने की मुहिम शुरु की। उनके प्रयास से आज बिहार के 20 जिलों में मोबाइल पैड बैंक संचालित हो रहा है।

पैड बैंक खुला, महिलाओं को मिलता है सैनिटरी पैड

पैड बैंक के लिए महिलाओं का अकाउंट खुलता है। इसके लिए पासबुक भी बनते हैं। हर महीने इसी पासबुक से महिलाओं को सैनिटरी पैड दी जाती है। इसके अलावा महिलाओं को शी केयर हेल्थ कार्ड से फ्री काउंसिलिंग भी दी जाती है। अमृता सिंह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जबकि पल्लवी एक डॉक्टर। इसलिए दोनों की जोड़ी महिलाओं को शारीरिक से लेकर मानसिक समस्याओं का हल दे रही हैं। नवादा, बेगूसराय, पूर्णिया, जमुई, छपरा, सीवान, मधुबनी सहित 20 जिलों में इन्होंने मोबाइल बैंक की स्थापना की है। ये पंचायत स्तर पर पैड बैंक बनाती हैं।

2 पैड मिलते हैं 5 रुपए में

2 साल तक अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा ने फ्री में पैड बांटे, लेकिन महिलाओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद इन्होंने सस्ते में पैड देना शुरू किया। बाजार में जहां पैड 35-40 रुपए में मिलने शुरू होते हैं, वहीं इन्होने 5 रुपए में देना शुरू किया। 5 रुपए में दो पैड मिल जाते हैं। इसलिए महिलाएं इसे खूब पसंद कर रही हैं।

7- ‘ब्लड मैन’ मुकेश हिसारिया

पटना के मुकेश हिसारिया को लोग ‘ब्लड मैन’ के नाम से जानते हैं। 50 हजार से अधिक लोगों को खून उपलब्ध कराकर उनकी जान बचा चुके मुकेश के काम से अमिताभ, शाहरुख और कपिल जैसी शख्सियत भी प्रभावित हैं। वह हर साल नियमित रूप से रक्तदान करते रहे। एक मासूम की जान बचाने के बाद मुकेश के लिए रक्तदान एक जुनून बन गया। पूरे देश में रक्तदाताओं से जुड़ने के लिए मुकेश हिसारिया ने मां वैष्णो देवी सेवा समिति बनाई। पटना से लेकर बिहार के हर गांव-शहर के सामाजिक कार्यकर्ता उनके नेटवर्क से जुड़े हैं।

8- 1 रूपया में पढाकर इंजीनियर बनाता है यह शिक्षक

न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया के इंजीनियरिंग स्टुडेंट्स के बीच एक चर्चित नाम है 1 रूपया में पढाकर इंजीनियर बनाने वाला शिक्षक। बिहार के आरके श्रीवास्तव ने मैथेमैटिक्स गुरू बन सैकङों निर्धन परिवार के स्टूडेंट्स के सपने को पंख लगा दिया।

आरके श्रीवास्तव ने दिए गरीब छात्रों के सपनों को पंख

पूरे देश की दुआएं आरके श्रीवास्तव को मिलता हैं । विदेशो में भी इन बिहारी शिक्षकों के पढाने के तरीकों को पसंद किया जाता हैं। आरके श्रीवास्तव सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर गणित का गुर सिखाते है। आरके श्रीवास्तव का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ ऑफ़ रिकॉर्डस लंदन, इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है ।

Anand Kumar and Mathematics Guru fame RK Srivastava

1 रुपया गुरु दक्षिणा में बनाया छात्रों को आधिकारी

बिहार के रोहतास जिले में रहने वाले शिक्षक आरके श्रीवास्तव न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया के इंजीनियरिंग स्टुडेंट्स के बीच एक चर्चित नाम हैं। इनका ‘1 रूपया गुरु दक्षिणा’ प्रोग्राम विश्व प्रसिद्ध है। इसके तहत वे आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को 1 रूपया गुरु दक्षिणा लेकर इंजीनियर बना रहे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है आर के श्रीवास्तव की प्रशंसा

शैक्षणिक मीटिंग के दौरान मैथेमैटिक्स गुरू के नाम से महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है सम्बोधित। आरके श्रीवास्तव ने युवाओ को हमेशा बताया की “जीतने वाले छोङते नही, छोड़ने वाले जीतते नही” के मार्ग पर हमेशा आगे बढ़े ।

9- मैथली ठाकुर

उम्र 20 साल, सोशल मीडिया पर फॉलोअर 1 करोड़

बिहार की मैथिली ठाकुर के गीतों की गूंज अब देश के कोने-कोने से होती हुई दुनियाभर में सुनाई देती है। 20 साल की मैथिली के फेसबुक पर 1 करोड़ 46 लाख 881, यू ट्यूब पर 60 लाख और इंस्टाग्राम पर 26 लाख फॉलोअर हैं।

मिथिला की माटी से उभरी मैथिली ने 'लोक' को 'गीत' से जोड़ा

मैथिली जब गाती हैं तो उनकी सुरीली आवाज लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। हारमोनियम, तबले और ताल पर उनकी आवाज को संगत देते हैं उनके दो नन्हे-मुन्ने साथी। दादा शोभा सिंधु ठाकुर राम-सीता विवाह कीर्तन गाते थे। घर में शुरू से ही गीत-संगीत का माहौल था। मैथिली ने पहला गाना गाया था ब्राह्मण गीत।

लिट्ल चैंप से बड़े मंच पर आई तो फिर देशभर ने उन्हे सुना और सराहा। 2015 में इंडियन आइडल में गई। राइजिंग स्टार में फर्स्ट रनर अप रहीं। मैथिली को राजीव गांधी अवार्ड और आई जीनियस यंग सिंगिंग स्टार अवार्ड मिला। वीमेंस डे पर प्रसार भारती ने सम्मानित किया। केंद्रीय महिला आयोग ने भी सम्मान से नवाजा।

10- ‘ट्री मैन' राजेश कुमार

बिहार में ट्री-मैन के नाम से मशहूर हो चुके हैं राजेश

राजेश कुमार सुमन लोगों को मैसेज देते हैं कि पौधे ऑक्सीजन देते हैं, प्रदूषण से बचना है तो पौधे जरूर लगाएं। नहीं तो आने वाले समय में बच्चे, बूढ़े हर किसी को पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलने की नौबत आ जाएगी। राजेश कुमार सुमन मूल रूप से रोसड़ा के रहने वाले हैं। वे पौधे लगाने के लिए लोगों को नए तरीके से मोटिवेट कर करतो हैं।

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वे बच्चों को उनके जन्मदिन पर पौधे देते हैं। बेटी की शादी के मौके पर फलदान की परंपरा होती है। सुमन लोगों को मोटिवेट करते हैं कि फलदान कार्यक्रम में दामाद को 5 तरह के फल के साथ ही 5 तरह के फलदार पौधे भी दें। इससे पौधों के बड़ा होने पर बेटी को सही मायने में फल का स्वाद मिल सकेगा। सुमन ग्रीन पाठशाला चलाते हैं। फीस के रूप में छात्र-छात्राओं से कुल 18 पौधे लगवाते हैं।

11- ऑक्सीजन मैन गौरव

पटना में गौरव राय का ऑक्सीजन बैंक हैं। उन्हें 'ऑक्सीजन मैन' के नाम से लोग पुकारते हैं। 1870 ऑक्सीजन सिलेंडर से 986 लोगों की जान बचा चुके गौरव ने कोरोना काल और लॉकडाउन में लोगों के घर पर जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए . वो भी बिना एक पैसा लिए।

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गौरव ने तय किया है कि ऑक्सीजन के लिए किसी से पैसे नहीं लेंगे। गौरव ने पिछले साल 20 जुलाई को 13 सिलेंडरों के साथ ऑक्सीजन बैंक की मुहिम शुरू की और जिद पर अड़ गए कि किसी की भी सांस ऑक्सीजन की कमी से टूटने नहीं देंगे। बिहार के अब 21 जिलों में ऑक्सीजन बैंक चल रहा है।

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