नेताओं की ये बेटियां: संभाली पिता की राजनीतिक विरासत, आज बनी मिसाल

राजनीति में नेता पुत्रों की चर्चा तो सभी करते हैं लेकिन कई बार नेता पुत्रियों की चर्चा नहीं हो पाती। इधर कुछ वर्षो से नेता पुत्रियां दिन पर दिन राजनीति में एक मुकाम हासिल कर अपने पिता की विरासत संभालने का काम कर रही हैं।

श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ: राजनीति में नेता पुत्रों की चर्चा तो सभी करते हैं लेकिन कई बार नेता पुत्रियों की चर्चा नहीं हो पाती। इधर कुछ वर्षो से नेता पुत्रियां दिन पर दिन राजनीति में एक मुकाम हासिल कर अपने पिता की विरासत संभालने का काम कर रही हैं।इनमें से कुछ बेटियां तो ऐसी भी है जो राजनीतिक यात्रा में अपने पिता से भी आगे निकल रही हैं।

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अखिलेश सिंह – अदिति सिंह

पिछले कई दशकों से कांग्रेस के गढ़ रहे रायबरेली में अपने व्यक्तिगत व्यवहार और जनछवि के चलते अखिलेश सिंह इस जिले की सदर विधानसभा से कई बार विधायक बने। पहले कांग्रेस से विधायक होने के बाद वह निर्दलीय विधायक भी बनते रहे। दंबंग और आक्रामक छवि के चलते उनका रुतबा आधुनिक युग की अदिति सिंह ने 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा और यूपी विधानसभा की सदस्य बनी। अभी कुछ समय पहले ही अखिलेश सिंह का लम्बी बीमारी के चलते निधन हो गया लेकिन अपने क्षेत्र की जनता के दिलोे में जगह बनाकर अदिति सिंह अपने पिता की कमी पूरी करने के प्रयास में लगी रहती है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी-प्रियंका गांधी

पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी 2007 के बाद हो रहे चुनावों लगातार सक्रिय हैं। फिर वह चाहे लोकसभा का चुनाव हो अथवा विधानसभा का। वह खुद चुनाव न लड़कर चुनाव प्रचार करने का काम करती है। फिलहाल वह यूपी की प्रभारी के तौर पर काफी समय इस प्रदेश को दे रही है। इसके अलावा उन्हे अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश होने का अनुमान कांग्रेसी कार्यकर्ता अभी से लगा रहे हैं।

स्व सोनेलाल पटेल -अनुप्रिया पटेल

अपना दल के संस्थापक स्व सोनेलाल पटेल की एक दुर्घटना में मौत के बाद राजनीतिक विरासत संभालने का काम उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल ने संभाल रखा है। दूसरी बार लोकसभा में पहुंची अनुप्रिया पटेल ने केन्द्र सरकार में मंत्री बनकर अपने पिता के सपने को साकार किया है। यूपी की विधानसभा में उनके 9 विधायक है और उनका दल भी यूपी सरकार में शामिल है।

प्रमोद तिवारी -आराधना मिश्रा

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी यूपी विधानसभा में 9 बार सदस्य रहने के बाद जब उन्होंने राज्यसभा की राह पकड़ी तो उनकी बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने रिक्त हुई सीट रामपुर से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरूआत की। उन्होंने यहां से जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंची। इसके पहले भी वह पिता प्रमोद तिवारी के चुनाव में उनकी मदद किया करती थी। अब वह एक बार फिर से यूपी विधानसभा का चुनाव जीतकर अपने पिता की तरह ही कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता हैं।

हेमवती नन्दन बहुगुणा -डा रीता बहुगुणा जोशी

डा रीता बहुगुणा के पिता हेमवती नन्दन बहुगुणा प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी बेटी डा रीता बहुगुणा जोशी ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया है। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी में बडे पदों पर रहने के बाद अब वह भाजपा से सांसद है। इसके पहले वह योगी आदित्यनाथ की सरकार में वह मंत्री भी रह चुकी है।

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राजा दिनेश सिंह-रत्ना सिंह

प्रतापगढ़ सीट से तीन बार सांसद रही और कालाकांकर की राजकुमारी रत्ना सिंह के पिता दिनेश सिंह को स्व इंदिरा गांधी का बेहद करीबी माना जाता था। पं नेहरू के निजी सचिव रहे स्व दिनेश् सिंह अमेरिका में भारत के राजदूत और विदेश मंत्री भी रहे। प्रतापगढ के सांसद रहने के बाद उनकी बेटी रत्ना सिंह ने बाद में उनकी राजनीतिक विरासत संभालने का काम किया है । इस समय वह भाजपा में हैं।

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