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कई बड़ी रैलियों का गवाह रहा है ब्रिगेड ग्राउंड, जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व

आजादी के बाद समय-समय पर यह ब्रिगेड ग्राउंड राजनीतिक दलों के लिए भी शक्ति प्रदर्शन का बड़ा प्रतीक रहा है। वाम गठबंधन की ओर से भी इस ब्रिगेड ग्राउंड पर कई बड़ी रैलियों का आयोजन किया जा चुका है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 7 March 2021 3:50 AM GMT

कई बड़ी रैलियों का गवाह रहा है ब्रिगेड ग्राउंड, जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व
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भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा रैली का आयोजन किया गया है।
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अंशुमान तिवारी

कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा रैली का आयोजन किया गया है। इस रैली के जरिए पीएम मोदी भाजपा के चुनाव अभियान को धार देने के साथ ही बड़ा सियासी संदेश भी देंगे। ब्रिगेड ग्राउंड का काफी ऐतिहासिक महत्व है और यह ग्राउंड अतीत में भी कई बड़ी रैलियों का गवाह रहा है। कांग्रेस-वाम गठबंधन ने पिछले रविवार को इसी ग्राउंड पर बड़ी रैली करके अपनी ताकत दिखाई थी।

कांग्रेस-वाम गठबंधन ने किया था शक्तिप्रदर्शन

इस रैली में फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेकुलर फ्रंट ने भी शिरकत की थी। इस रैली में काफी भीड़ जुटी थी और रैली के बाद कांग्रेस-वाम गठबंधन की ओर से दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल की सियासी जंग में इस गठबंधन को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। इस रैली के कारण ही अब भाजपा के सामने भीड़ जुटाने की चुनौती और बढ़ गई है।

ग्राउंड का क्या है ऐतिहासिक महत्व

जिस ब्रिगेड ग्राउंड में पीएम मोदी की मेगा रैली होने जा रही है, उस ग्राउंड का काफी ऐतिहासिक महत्व रहा है। प्लासी की लड़ाई 1757 में हुई थी और उस लड़ाई में जीत दर्ज करने के बाद अंग्रेजों ने कोलकाता में फोर्ट विलियम महल बनवाया था। अंग्रेजों ने अपनी फौज के रहने के लिए इस किले का निर्माण कराया था और फौज की परेड के लिए किले के सामने एक विशाल मैदान भी बनाया गया। अंग्रेजों ने इसका नाम ब्रिगेड परेड ग्राउंड रखा था और यहां पर अंग्रेज सैनिक परेड किया करते थे। मौजूदा समय में यह ब्रिगेड ग्राउंड भारतीय सेना के नियंत्रण में रहता है। आजादी के पहले और उसके बाद भी कोलकाता का यह ऐतिहासिक और प्रसिद्ध ब्रिगेड ग्राउंड कई बड़ी घटनाओं का गवाह रहा है।

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चितरंजन दास ने फूंका था संघर्ष का बिगुल

यदि आजादी से पहले के समय को देखा जाए तो रॉलट एक्ट के खिलाफ देश में काफी गुस्सा उभर गया था। रॉलट एक्ट के खिलाफ देशबंधु चितरंजन दास ने इसी ब्रिगेड ग्राउंड पर बड़ी रैली की थी। 1955 में सोवियत प्रीमियर निकोल एलेक्जेंड्रोविच और सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के पहले सचिव ख्रुश्चेव का भी इस ब्रिगेड ग्राउंड पर आगमन हुआ था। उनका स्वागत करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय भी मौजूद थे।

बांग्लादेश की मुक्ति के बाद इंदिरा की रैली

1972 में भी ब्रिगेड ग्राउंड एक बड़ी रैली का गवाह बना था। बांग्लादेश की मुक्ति के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में इसी ब्रिगेड ग्राउंड पर विशाल जनसभा को संबोधित किया था। इंदिरा गांधी की जनसभा में बांग्लादेश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मुजीब उर रहमान ने भी हिस्सा लिया था।

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इन नेताओं ने भी दिखाई थी यहां ताकत

आजादी के बाद समय-समय पर यह ब्रिगेड ग्राउंड राजनीतिक दलों के लिए भी शक्ति प्रदर्शन का बड़ा प्रतीक रहा है। वाम गठबंधन की ओर से भी इस ब्रिगेड ग्राउंड पर कई बड़ी रैलियों का आयोजन किया जा चुका है। 1984 में केंद्र सरकार के खिलाफ चंद्रशेखर, पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और फारूक अब्दुल्ला समेत कई बड़े नेताओं ने यहां रैली करके संघर्ष का बिगुल फूंका था।

brigade parade ground

22 दलों के नेताओं का लगा था जमावड़ा

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मैदान पर अपनी ताकत दिखा चुके हैं। 2019 में उन्होंने इसी ग्राउंड पर बड़ी रैली का आयोजन किया था जिसमें 22 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। ममता की रैली में हिस्सा लेने वाले नेताओं में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी शामिल थे। देश के दो और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विश्वनाथ प्रताप सिंह भी इस ब्रिगेड ग्राउंड पर रैली के जरिए अपनी ताकत दिखा चुके हैं।

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अब इसी ग्राउंड पर पीएम मोदी दिखाएंगे ताकत

अब इसी ऐतिहासिक ब्रिगेड ग्राउंड पर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा रैली का आयोजन किया गया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस रैली में दस लाख लोगो की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह ग्राउंड इतना बड़ा है कि लाखों की भीड़ भी इसमें नहीं पता चलती है। इसलिए ग्राउंड को भरना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है और इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भाजपा नेताओं ने पूरी ताकत झोंक रखी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा को अपना लक्ष्य हासिल करने में कहां तक कामयाबी मिलती है।

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