तस्वीरों में देखिये कैसा है मजदूरों का सफर, हाल पूछने वाला कोई नहीं

जी हाँ ऐसे ही कुछ हालत हैं आजकल पलायन कर रहे मजदूरों की, ट्रेनों से सफर कर रहे मजदूर बेहाल हो चुके हैं। कहीं कोई बीमार है तो कहीं किसी का ऑपेरशन हुआ है, लेकिन ट्रेनों से उतरने के बाद उनसे उनका हाल पूछने वाला कोई नहीं है। 

Published by SK Gautam Published: May 29, 2020 | 6:44 pm
Modified: May 29, 2020 | 7:24 pm

लखनऊ: ना गांव ने पनाह दी, ना शहर ने बक्शा…वो मजदूर दर-दर न भटकता तो क्या करता ? जी हाँ ऐसे ही कुछ हालत हैं आजकल पलायन कर रहे मजदूरों की, ट्रेनों से सफर कर रहे मजदूर बेहाल हो चुके हैं। कहीं कोई बीमार है तो कहीं किसी का ऑपेरशन हुआ है, लेकिन ट्रेनों से उतरने के बाद उनसे उनका हाल पूछने वाला कोई नहीं है।

ट्रैन में ही बच्चे को जन्म दे रही हैं मजदूर महिलायें

इस लॉक डाउन में सबसे ज्यादा अगर कोई प्रताड़ित हुआ है तो वो है मजदूर, कोई महिला ट्रैन में ही बच्चे को जन्म दे रही है तो कोई अपने बीमार भाई को कंधे पर बिठाकर ले जा रहा है, जिसका हाल ही में एक आपरेशन हुआ है। छोटे-छोटे बच्चे बड़े-बड़े छोले और बोरियां उठाने को मजबूर हैं।

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कुछ दिनों तक सड़कों पर सैकड़ों किलोमीटर चलने वाले प्रवासी मजदूरों की तस्वीरें देख कर मन विचलित हुआ, तो अब जबकि राज्य और केंद्र सरकारों की आँखें खुलीं तो इन प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेनें शुरू हुईं । लेकिन यहां भी इनका दुःख कम नहीं हुआ है।

हमारे फोटो जर्नलिस्ट आशुतोष त्रिपाठी जी ने ट्रेन से अपने-अपने घरों के लिए निकले इन प्रवासी मजदूरों की तस्वीरें ली हैं, जिसको देख कर आपको एक अलग ही कहानी नजर आएगी।

जरा देखें इन तस्वीरों को-

1-ट्रेनों से उतरने के बाद हाल तक पूछने वाला कोई नहीं है

 

 

2-बीमार भाई को कंधे पर बिठाकर, ले जा रहा मजदूर, व्हील चेयर की सुविधा क्यों नहीं ?

 

3-ट्रेनों से सफर कर रहे मजदूर बेहाल हो चुके हैं

 

 

4-वो मजदूर दर-दर न भटकता तो क्या करता

 

 

5-लॉक डाउन में सबसे ज्यादा अगर कोई प्रताड़ित हुआ है तो वो है मजदूर

 

 

6-छोटे-छोटे बच्चे बड़े-बड़े छोले और बोरियां उठाने को मजबूर हैं

 

 

7- ट्रेनों में खाने-पीने की व्यवस्था के झूठे दावे की पोल खोलती ये तस्वीरें

 

 

8-इनका दुःख अभी कम नहीं हुआ

 

 

9- अगले सफ़र के लिए आगे बढ़ते लोग

 

 

10-महिला ट्रैन में ही बच्चे को जन्म दे रही हैं

 

 

सदियों से ये सफ़र जारी है, रूकेगा नहीं । क्योंकि ये हैं देश के निर्माता

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